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मरीज देखकर बढ़ता है डॉक्टर का मर्ज
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 18 Sep 2014 03:20 PM IST
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सबसे बड़े सरकारी अस्पताल के हैं एक डॉक्टर साहब। डॉक्टर साहब की खूबी है कि कम उम्र में ही काफी मुकाम हासिल कर लिए। कभी प्रदेश के मुखिया रहे नेताजी का भी मर्ज देखते आते हैं।
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सो बातों और हरकतों में थोड़ा नजाकत भी नजर आती है। इन डॉक्टर साहब की एक और कमी इनकी खूबियों पर पानी फेर देती है। दरअसल, मरीजों का मर्ज देखने वाले इन डॉक्टर साहब का मर्ज मरीजों की भीड़ देखकर बढ़ जाता है।
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अब सरकारी अस्पताल है, सो मरीजों की भीड़ बढ़ती देखकर ये डॉक्टर साहब चुपके से किसी न किसी बहाने इधर-उधर खिसक लेते है। अब भला मरीज इंतजार में खड़े रहें इनकी बला से। ये तो तभी पहुंचते हैं जब ज्यादातर मरीज थककर इधर-उधर पहुंच जाते हैं।
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डॉक्टर साहब! शाम को जिस प्राइवेट क्लीनिक में जाते हो वहां भी इन गरीब और जरूरतमंद मरीजों की नजर हैं। वहां तो मरीजों को देखकर ऐसा मर्ज नहीं बढ़ता होगा। कभी प्राइवेट क्लीनिक में इन मरीजों की नजर में पड़ गए तो फिर क्या होगा डाक्टर साहब?