#GST: उत्तराखंड में आज से नए पैटर्न में होगा कारोबार, आपको मिलेंगी ये सुविधाएं
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एक देश, एक कर के लिए उत्तराखंड पूरी तरह तैयार है। शनिवार से प्रदेश में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) प्रणाली लागू हो जाएगी। इसके लिए राज्य सरकार ने होमवर्क पूरा कर लिया है।
अब व्यापारी जिस भी सामान की बिक्री करेगा, उसका बिल जीएसटी एक्ट के प्रावधानों के तहत कटेगा। हालांकि, जीएसटी में रिटर्न फाइल करने और सामान की डिक्लेरेशन को लेकर कारोबारियों में असमंजस की स्थिति है।
व्यापारियों की दिक्कतों को दूर करने के लिए वाणिज्य कर विभाग ने भी सभी कार्यालयों में हेल्प डेस्क बनाए हैं। साथ ही कॉमन सर्विस सेंटरों और जीएसटी मित्रों के माध्यम से कारोबारियों की रिटर्न भरने में मदद की जाएगी।
प्रदेश सरकार ने कैबिनेट की मंजूरी देकर वाणिज्य कर विभाग के माध्यम से जीएसटी की 21 अधिसूचना जारी कर दी है। जीएसटी एक्ट पेट्रोल, डीजल, क्रूड पेट्रोलियम, हवाई जहाज व टरबाइन फ्यूल, नेचुरल गैस और आबकारी पर लागू नहीं होगा।
200 कॉमन सर्विस सेंटरों पर रिटर्न भरने की सुविधा
इन छह उत्पादों पर पुराने टैक्स प्रणाली के अनुसार ही वैट व सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी लगेगी। जबकि अन्य सभी वस्तुओं पर जीएसटी की दरों के अनुसार टैक्स लगेगा। शुक्रवार आधी रात से प्रदेश में भी जीएसटी लागू कर लिया गया।
शनिवार से व्यापारी जिस भी सामान की बिक्री करेगा, उसका बिल जीएसटी में दर्ज होगा। ई-वे बिल को लेकर अभी तक जीएसटी काउंसिल की ओर से स्थिति स्पष्ट नहीं है।
जिससे राज्य में बाहर से आने और जाने वाले सामान की बिल्टी बिल से डिक्लेरेशन होगी। सभी वस्तुओं पर जीएसटी की ओर से निर्धारित की गई 5, 12, 18 और 28 प्रतिशत स्लैब के हिसाब से व्यापारियों को प्रति माह टैक्स जमा करना होगा।
200 कॉमन सर्विस सेंटरों पर रिटर्न भरने की सुविधा
जीएसटी को लेकर व्यापारियों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। इसके लिए राज्य में 200 कॉमन सर्विस सेंटरों पर भी रिटर्न फाइल करने की सुविधा मिलेगी। अगर व्यापारी खुद ही ऑनलाइन रिटर्न नहीं भर सकता है तो वह सीएसटी सेंटर में जाकर रिटर्न फाइल कर सकता है। इसके साथ ही दो हजार युवाओं को विशेष ट्रेनिंग देकर जीएसटी मित्र बनाया जा रहा है। जिनकी सेवाएं व्यापारी अपना रिटर्न भरने में ले सकेंगे।
प्रदेशभर में 20 हेल्प डेस्क स्थापित
वाणिज्य कर विभाग ने प्रदेशभर में अपने कार्यालयों में करीब 20 हेल्प डेस्क बनाए हैं। जीएसटी लागू के बाद कारोबारियों को किसी तरह की परेशानी आती है तो हेल्प डेस्क के माध्यम से उसका समाधान किया जाएगा। 350 कार्यशालाओं के माध्यम से विभाग के सभी अधिकारियों और कारोबारियों को जानकारी दी गई। ताकि जीएसटी से किसी तरह से मुश्किलें न आए।
ऑनलाइन व्यापार करना है तो पंजीकरण जरूरी
ऑनलाइन व्यापार करना है तो पंजीकरण जरूरी
राज्य में 10 लाख से अधिक सालाना कारोबार करने वाले करीब एक लाख व्यापारी जीएसटी के दायरे में आएंगे। लेकिन अभी तक करीब 85 हजार व्यापारियों का जीएसटी में इनरोलमेंट हुआ है। 25 जून से दोबारा पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू की गई। जिसमें करीब तीन सौ से अधिक कारोबारियों ने इनरोलमेंट के लिए आवेदन किया है। जिन व्यापारियों और उद्यमियों को ऑनलाइन कारोबार करना है तो उन्हें जीएसटी में पंजीकरण करना ही पड़ेगा।
समाधान योजना में तिमाही रिटर्न भरने का प्रावधान
पर्वतीय क्षेत्रों में 60 प्रतिशत व्यापारी ऐसे हैं जिनका सालाना कारोबार करीब 75 लाख से कम है। समाधान योजना में 75 लाख से कम कारोबार करने वाले व्यापारी या डीलर को तिमाही रिटर्न भरने का प्रावधान है। ऐसे में पहाड़ों में अगर नेटवर्क की समस्या रहती है तो व्यापारियों को रिटर्न फाइल करने को ज्यादा परेशानी नहीं होगी।
जीएसटी को लेकर विभाग की ओर से सभी तैयारियां की गई है। जिससे व्यापारियों को परेशानी नहीं आएगी। प्रदेश के अति दुर्गम क्षेत्रों में भी कारोबारियों को जीएसटी की जानकारी दी गई। विभागीय के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को जीएसटी का प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
-श्रीधर बाबू अद्दांकी, अपर सचिव एवं आयुक्त(कर)