उत्तराखंड: गोल्डन फॉरेस्ट की जमीन पर लगेंगे उद्योग, गरीबों के लिए बनाए जाएंगे घर
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उत्तराखंड में गोल्डन फॉरेस्ट ग्रुप की सरकार में निहित सैकड़ों हेक्टेयर भूमि अब उद्योग स्थापित करने और गरीबों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना में मकान बनाने के काम आएगी। इसके अलावा सरकार ने भूमि का बड़ा हिस्सा सिंचाई विभाग को सौंग, जमरानी और पंचेश्वर बांध से पुनर्वासित होने वाले लोगों को आवंटित करने के लिए दिया है।
कुछ भूमि सरकारी कार्यालयों के निर्माण के लिए आरक्षित है, जबकि 342 हेक्टेयर भूमि पंचायतों को विकास कार्यों के लिए दी गई है। गोल्डन फारेस्ट ग्रुप की जनपद देहरादून में कई जगह भूमि थी, जिसे कानूनी विवाद के बाद सरकार में निहित कर दिया गया था।
राजस्व विभाग ने बुधवार को गोल्डन फारेस्ट की आवंटन योग्य भूमि सरकारी विभागों में निहित करने का आदेश जारी कर दिया है। इन्वेस्टर्स समिट के बाद बड़ी संख्या में औद्योगिक निवेश के प्रस्ताव सरकार के पास आए, लेकिन भूमि की उपलब्धता नहीं होने के चलते निवेश गति नहीं पकड़ रहा था।
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत प्रदेश में प्रस्तावित 38 हजार आवासों का निर्माण भी भूमि नहीं मिलने से प्रभावित हो रहा है। इसी के साथ प्रदेश में सौंग, जमरानी, पंचेश्वर, ब्यासी, लखवाड़ जैसी परियोजनाओं के निर्माण से वहां के कई गांवों का पुनर्वास किया जाना है। इसके लिए भी पर्याप्त भूमि उपलब्ध नहीं है। इसके अलावा सरकारी कार्यालयों के निर्माण के लिए भी भूमि दी जानी है।
ये है पूरा प्लान
भूमि की कमी को दूर करने के लिए अब सरकार ने सैकड़ों हेक्टेयर गोल्डन फारेस्ट ग्रुप की भूमि को विभिन्न विभागों को देने का आदेश दिया है। सचिव राजस्व सुशील कुमार ने इसकी पुष्टि की है।
भूमि आवंटन
उद्योगों की स्थापना- सिडकुल को तहसील विकासनगर बैरागीवाला, जस्सोवाला, लाखनवाला, ढकरानी और तहसील सदर में तिमली मानसिंह एवं भैंसवाड़ा में 49.706 हेक्टेयर भूमि।
बांध पुनर्वास - सिंचाई विभाग को तहसील विकासनगर में शीशमबाड़ा, शेरपुर एवं फतेहपुर, मिर्जापुर में कुल 29.789 हेक्टेयर भूमि।
आवास निर्माण - आवास विभाग को तहसील विकासनगर- ईस्ट होप टाउन, सेंट्रल होप टाउन, रामपुरकलां एवं सुद्दोंवाला और तहसील सदर में चालंग, गुजराड़ा मान सिंह में कुल 22.519 हेक्टेयर भूमि।
राजकीय कार्यालय - आमवाला तरला, आमवाला उपरला एवं चकडांडा लखोंड, डांडा लखोंड मयचक में कुल 9.6851 हेक्टेयर भूमि।
शेष 342.688 हेक्टेयर भूमि ग्राम पंचायत में विकास एवं सामुदायिक सुविधाओं के लिए निहित की जाएगी।