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Uttarakhand: गोल्डन कार्ड से कैशलेस इलाज पर संकट खड़ा, अस्पताल भी इलाज करने में हाथ खड़े कर रहे
Wed, 26 Mar 2025 03:06 PM IST
रेनू सकलानी
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
Published by: रेनू सकलानी
Updated Wed, 26 Mar 2025 03:06 PM IST
सार
गोल्डन कार्ड योजना के तहत कर्मचारियों और पेंशनरों के साथ उनके आश्रितों को असीमित खर्च पर इलाज की सुविधा है, लेकिन अब इस योजना पर संकट खड़ा हो गया।
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बैठक
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
प्रदेश के कर्मचारियों और पेंशनरों और उनके आश्रितों के लिए गोल्डन कार्ड से कैशलेस इलाज पर संकट खड़ा हो गया है। कर्मचारियों और पेंशनरों के अंशदान से इलाज का खर्च पूरा नहीं हो रहा है। जिस कारण कैशलेस करने वाले अस्पतालों की देनदारी 100 करोड़ से अधिक हो गई है। अब अस्पताल भी इलाज करने में हाथ खड़े कर रहे हैं।
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अंशदायी योजना होने के कारण प्रदेश सरकार की ओर से कोई बजट नहीं दिया जाता है। वर्ष 2021 में राजकीय कर्मचारियों, पेंशनरों के लिए राज्य स्वास्थ्य योजना शुरू की गई थी। इस योजना के तहत कर्मचारियों और पेंशनरों के साथ उनके आश्रितों को गोल्डन कार्ड पर असीमित खर्च पर इलाज की सुविधा है।
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इस सुविधा के लिए कर्मचारियों व पेंशनरों के वेतन व पेंशन से हर माह अंशदान लिया जाता है। इससे सालाना 120 करोड़ राशि प्राप्त होती है। जबकि इलाज पर होने वाला सालाना खर्च 300 करोड़ पहुंच गया है। ऐसे में योजना में सूचीबद्ध अस्पतालों की देनदारी 100 करोड़ तक पहुंच गई है।
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भुगतान न होने पर सूचीबद्ध अस्पताल इलाज करने से मना कर रहे हैं। हिमालयन अस्पताल जौलीग्रांट ने पहले ही इंकार कर दिया है। वहीं, अन्य अस्पतालों की ओर से राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण को इलाज न करने का अल्टीमेटम दिया जा रहा है।