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खून नहीं मिला तो पहुंचे ‘अमर उजाला’
अमर उजाला, रुड़की
Updated Fri, 07 Mar 2014 10:13 PM IST
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दूसरों की जिदंगी बचाने के लिए ‘अमर उजाला’ ब्लड डोनर मुहिम एक बिटिया के लिए जीवन ज्योति बनकर उभरी है। तीन माह की बच्ची की जिदंगी को बचाने के लिए पिता ने रक्त के लिए ‘अमर उजाला’ ऑफिस आकर गुहार लगाई।
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कई साथी रक्तदान के लिए तैयार हो गए। अस्पताल के ब्लड बैंक ने बिना देर किए बच्ची के लिए रक्त उपलब्ध करा दिया। खून चढ़ते ही बिटिया की हालात में सुधार आ गया।
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अमर उजाला फाउंडेशन चला रहा है मुहिम
मतदाता जागरुकता के साथ ‘अमर उजाला’ ने खून की कमी से होने वाली मौतों पर रोक लगाने के इरादे से इन दिनों ब्लड डोनर मुहिम चला रखी है। जागरुकता के साथ लगातार क्लबं सदस्यों की तादाद बढ़ रही है।
मुहिम को सुनकर पहुंचा कार्यालय
झबरेड़ा के सढौली निवासी बाबूराम की तीन माह की बेटी को उपचार के लिए गंगनहर कोतवाली क्षेत्र के एक नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया था। खून की कमी के चलते चिकित्सक ने रक्त की व्यवस्था करने के लिए कहा। बाबूराम नन्हीं से जान बचाने के लिए इधर-उधर दौड़ा, लेकिन हर तरफ से निराशा हुई।
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देहात क्षेत्र से जुडे़ बाबूराम को किसी ने सलाह दी तो रक्त की चाह में वह सिविल लाइंस स्थित ‘अमर उजाला’ कार्यालय पहुंच गया। पीड़ा सुनने के बाद ऑफिस के साथी बच्ची के लिए रक्तदान करने के लिए राजी हो गए।
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सिविल अस्पताल के ब्लड बैंक से संपर्क साधा गया। बैंक के सीनियर टैक्निशियन अक्षय लाल ने भी बिना देर किए ही बिटिया के लिए खून उपलब्ध करा दिया। खून चढ़ने के बाद बच्ची की हालात में सुधार आ गया।
अमर उजाला का जताया आभार
अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद शुक्रवार को बाबूराम अपनी पत्नी सलोचना और बिटिया राखी को लेकर सीधे अमर उजाला ऑफि स पहुंच गया। दंपत्ति पूरे समय हाथ जोड़कर अमर उजाला का आभार जताते रहे।
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मां सलोचना का कहना था कि अमर उजाला ने उनके लिए जो किया है, वो उसे कभी नहीं भूल पाएंगे। राखी के पिता तो हर तरफ से ना उम्मीद हो चुके थे। ‘अमर उजाला’ उनकी बेटी के लिए जीवन ज्योति लेकर आया है।