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यहां गैस के बुलबुलों से बन गया बेशकीमती हीरा, दुनिया भर के वैज्ञानिक हैरान

Mon, 09 Oct 2017 09:45 AM IST
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून Updated Mon, 09 Oct 2017 09:45 AM IST
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डायमंड कारोबार

गैस के बुलबुलों से ​बेशकीमती हीरा बनने के बाद से दुनियाभर वैज्ञानिक हैरान हैं। वैज्ञानिकों की शोध रिपोर्ट से ऐसा चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। हिमालय क्षेत्र की चट्टानों के भीतर के हाईड्रो-कार्बन गैसों के बुलबुले जब तरल रूप में भूगर्भ की और गहराई में जाते हैं तो घनीकरण के बाद ये हीरा बन जाते हैं। वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान और यूनिवर्सिटी ऑफ टैक्सास के वैज्ञानिकों की शोध रिपोर्ट से ऐसा चौंकाने वाला खुलासा हुआ है।


 

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himalaya
वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान और अमेरिका के टैक्सास विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों का एक दल हिमालय क्षेत्र में उस जगह का अध्ययन कर रहा है जहां भारतीय प्लेट यूरेशियन प्लेट के नीचे धंस रही है। ‘लॉस्ट सिटी’ नाम के इस अभियान के तहत यह पता लगाया जा रहा कि उस स्थान पर जब समुद्र रहा होगा तो किस तरह के जलीय जीवों, वनस्पतियों आदि की वहां मौजूदगी रही होगी। शोध के इसी क्रम में वैज्ञानिकों को पता चला है कि हाइड्रोकार्बन गैसें घनीकरण के बाद हीरा बन जाती हैं।
 
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बेहद खूबसूरत है कोहिनूर - फोटो : Getty
बता दें कि इससे पहले यही माना जाता था कि भूगर्भ में दबी वनस्पतियों व जीवों केकार्बन के रूप में घनीकृत होने के बाद हीरा बनता है। हाइड्रोकार्बन गैसें घनीकृत होने के बाद हीरा बन जाती हैं यह तथ्य अब तक अज्ञात था। वैज्ञानिकों ने दक्षिण-पूर्वी लद्दाख के निदार गांव में दो माइक्रॉन का हीरा भी खोज निकाला है जो संभवत: इसी प्रक्रिया से बना है। यह हीरा 410 किलोमीटर नीचे इसका निर्माण हुआ और भूगर्भिय हलचल के कारण ये ऊपर आया। इस खोज ने दुनियाभर के भूगर्भ वैज्ञानिकों का ध्यान खींचा है।

 
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Research
गर्भीय प्रक्रियाओं के संबंध में छिपे रहस्यों से उठेगा पर्दा
वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. बीके मुखर्जी और यूनिवर्सिटी ऑफ टैक्सास के पृथ्वी एवं पर्यावरणीय विज्ञान विभाग के वैज्ञानिक डॉ. एस. दास और डॉ. एआर बसु की यह नई शोध रिपोर्ट जियोलोजिकल सोसाइटी ऑफ अमेरिका के जर्नल ‘जियोलोजी’ के ताजा अंक में प्रकाशित हुई है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस खुलासे से भूगर्भीय प्रक्रियाओं के संबंध में छिपे रहस्यों से पर्दा उठेगा।

 
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BK mukherjee
‘भूगर्भ के अध्ययन में यह अत्यंत महत्वपूर्ण खोज है। आर्थिक रूप से इसका प्रभाव बता पाना अभी संभव नहीं है, लेकिन आने वाले समय में इससे अध्ययन की नई दिशा निर्धारित होगी। चीजों को और गहराई से समझने के लिए शोध अभी चल रहा है।’
- डॉ. बीके मुखर्जी (शोधकर्ता एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक, वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान)

ऐसे आता है संरचनात्मक बदलाव
वैज्ञानिकों के मुताबिक, चट्टानों के भीतर छोटे-छोटे गड्ढे (कैविटी) होती है। इनमें हाईड्रोकार्बन गैस और तरल रूप में मौजूद रहते हैं। पत्थर जब भूगर्भ में जाता है तो अंदर के ताप की वजह से रासायनिक क्रियाएं होने लगती हैं। ताप के प्रभाव के कारण इसके प्रकार, संरचना आदि में बदलाव आने लगता है। संभवत: इसी प्रक्रिया के तहत हीरे का भी निर्माण होता है।
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