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गांधी जयंती विशेष : देहरादून के खाराखेत में नमक बनाकर दी गई थी ब्रिटिश हुकूमत को चुनौती 

Fri, 02 Oct 2020 01:38 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Fri, 02 Oct 2020 01:38 PM IST
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Gandhi jayanti 2020: British rule was challenged by making salt in Kharakhet of Dehradun
महात्मा गांधी की मूर्ति (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock

राजधानी से महज 18 किलोमीटर दूर एक ऐसा भी गांव है, जहां महात्मा गांधी के नमक सत्याग्रह की यादें बरकरार हैं। यहां नून नदी के नमकीन पानी से आजादी के मतवालों ने वर्ष 1930 में नमक बनाकर ब्रिटिश हुकूमत को चुनौती दी थी। यहां बने स्मारक को पर्यटन विभाग ने संजोया तो है लेकिन यहां तक पहुंचाने वाली सड़क बदहाल है। 

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वर्ष 1930 में महात्मा गांधी के नेतृत्व में आजादी के दीवाने देशभर में नमक कानून तोड़ने के लिए एकजुट हो रहे थे। 20 अप्रैल की दोपहर अखिल भारतीय नमक सत्याग्रह समिति के बैनर तले महावीर त्यागी व साथियों की अगुवाई में आजादी के मतवाले खाराखेत में एकत्रित हुए और नमक बनाकर ब्रिटिश हुकूमत को चुनौती दी। आंदोलनकारियों ने वहां सात मई 1930 तक छह टोलियों में नून नदी पर नमक बनाया और फिर शहर के टाउन हॉल में बेचते हुए गिरफ्तार हुए।  
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खाराखेत में जिस स्थान पर नमक कानून तोड़ा गया था, वहां मौजूद महात्मा गांधी के स्तंभ पर इन सभी स्वतंत्रता सेनानियों के नाम अंकित किए गए हैं। ग्राम प्रधान सुमन ने बताया कि गांव तक पहुंचने का रास्ता तो बेहतर हो गया है, लेकिन अभी भी खाराखेत स्मारक तक पहुंचना आसान नहीं है। यहां सड़क न होने की वजह से लोगों को परेशानी होती है।

हालांकि पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने खाराखेत में काफी सुधार किए हैं। स्मारक की बदहाली को भी दूर किया है। खाराखेत के पूर्व प्रधान भगवान सिंह ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में खाराखेत का सुधार हुआ है, लेकिन अभी और काम बाकी है। उन्होंने भी सरकार से मांग की है कि खाराखेत जैसे ऐतिहासिक स्मारक को सरकार संरक्षित करे और पर्यटन स्थल के तौर पर विकसित करे।

ये हुए थे आंदोलन में शामिल 

नमक कानून तोड़ने वालों में हुकम सिंह, अमर सिंह, रीठा सिंह, धनपति, रणवीर सिंह, कृष्ण दत्त वैद्य, नारायण दत्त, महावीर त्यागी, नरदेव शास्त्री, दाना सिंह, श्रीकृष्ण, नत्थूराम, ध्रुव सिंह, किशन लाल, गौतम चंद, चौधरी बिहारी, स्वामी विचारानंद, हुलास वर्मा, रामस्वरूप, नैन सिंह, किरण चंद आदि ने अहम भूमिका निभाई थी। 

गांधी का लगाया पौधा बना वृक्ष

महात्मा गांधी ने करीब 91 साल पहले बाल वनिता आश्रम में पीपल का पौधा लगाया था। आज वह विशाल वृक्ष बन चुका है। बताया जाता है कि महात्मा गांधी वर्ष 1929 में दून आए थे। 17 अक्तूबर को उन्होंने मसीही ध्यान केंद्र में यह पौधा रोपा था। 

गांधी ने रखी थी श्रद्धानंद बाल वनिता आश्रम की नींव

महात्मा गांधी ने 16 अक्तूबर 1929 को दून में श्रद्धानंद बाल वनिता आश्रम की नींव रखी थी। आज इस आश्रम में सैकड़ों अनाथ, बेसहारा बच्चों को आश्रय मिला हुआ है। यहां से निकलकर कई होनहार बच्चे डॉक्टर, इंजीनियर बन देश की सेवा कर रहे हैं। 

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