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राजधानी की पहेली से मुंह मोड़ देहरादून चली उत्तराखंड सरकार
राकेश खंडूड़ी, अमर उजाला, भराड़ीसैंण
Updated Tue, 27 Mar 2018 09:33 PM IST
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अब तक चले सबसे लंबे विधानसभा सत्र में गैरसैंण पूरी तरह से छाया रहा। गैरसैंण को राजधानी बनाने की तलब भाजपा और कांग्रेस दोनों के भीतर शिद्दत से महसूस हुई।
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छह दिन तक चले सत्र में विनियोग विधेयक समेत कुल 17 विधेयक पास हुए। लेकिन, सरकार राजधानी की उलझी पहेली को जहां का तहां छोड़कर देहरादून लौट गई। हालांकि यह सवाल उसका आसानी पीछा छोड़ने वाला नहीं है कि गैरसैंण में सत्र कराकर सरकारें कब तक पहाड़ और मैदान को भ्रम में रखेंगी।
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सियासी हवाओं में यह सवाल तैर रहा है कि देश में बड़े और दुस्साहसिक फैसले ले चुकी प्रचंड बहुमत की भाजपा सरकार क्या उत्तराखंड में राजधानी के सवाल का हल निकालने का साहस करेगी। सत्र के दौरान खुद उसी के विधायक यह प्रश्न उठा चुके हैं। सत्र के पहले दिन से विधानसभा के अंदर और बाहर गैरसैंण को लेकर हंगामा रहा। विपक्ष ने राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान हंगामा काटा तो बाहर आंदोलनकारियों ने गिरफ्तारियां दीं। अभिभाषण और बजट पर सामान्य चर्चा के दौरान भी गैरसैंण का बार-बार जिक्र आया। लेकिन सरकार ने गैरसैंण पर आखिर तक पत्ते नहीं खोले।
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सरकारों का रहा संदेश पर जोर
पिछली सरकार की तरह ही मौजूदा सरकार ने भी गैरसैंण को लेकर संदेश देने की ही कोशिश की। जाने से पहले वह यह सवाल उठने नहीं देना चाहती थी कि उसने गैरसैंण में स्थायी राजधानी को लेकर आंदोलन कर रहे आंदोलनकारियों से बात नहीं की। इसलिए रविवार को सरकार के दो मंत्री प्रकाश पंत और डॉ. धन सिंह आंदोलनकारियों को मनाने पहुंचे। लेकिन आंदोलनकारी नहीं माने। उनमें से कुछ राजधानी नहीं तो कम से कम गैरसैंण को जिला घोषित करने की मांग कर रहे हैं।
अब तक हुए सत्र और खर्च
विधानमंडल भवन का निर्माण होने से पहले और उसके बाद गैरसैंण (भराड़ीसैंण) में पांच सत्र कर चुकी है। पहली बार और सबसे ज्यादा दिनों तक बजट सत्र संचालित हुआ। आरटीआई से प्राप्त जानकारी के अनुसार राज्य विधानसभा सचिवालय ने सत्रों के आयोजन पर अब तक एक करोड़ 94 लाख 86 हजार 208 रुपये खर्च कर चुका है।
खर्च का ब्योरा
वर्ष - तिथि- खर्च
2014- 9 से 11 जून- 57,09,126
2015- 2 से 3 नवंबर- 2,77,817
2016- 17 से 18 नवंबर- 36,29,870
2017- 7 से 8 दिसंबर- 98,69,870
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कुल खर्च - 1,94,86,208
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करोड़ों का पड़ा ऐतिहासिक सत्र
भराड़ीसैंण में ऐतिहासिक सत्र सरकारी खजाने पर करोड़ों का पड़ा है। हालांकि अभी खर्च का ब्योरा तैयार नहीं हुआ है, लेकिन एक मोटे अनुमान के अनुसार छह दिन चले सत्र पर करीब ढाई से तीन करोड़ रुपये के खर्च का अनुमान है। यह खर्च सिर्फ विधानसभा सचिवालय के स्तर का है। इसके अलावा सत्र की व्यवस्थाओं को लेकर लोक निर्माण विभाग, राज्य संपत्ति विभाग और सूचना विभाग का खर्च अलग से है। पिछली बार दो दिन के सत्र में विधानसभा ने 98 लाख रुपये से अधिक की राशि खर्च कर दी थी।