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...एक साथ जली पिता-पुत्र और भतीजे की चिता

Wed, 04 Sep 2013 09:31 AM IST
अमर उजाला, गैरसैंण
अमर उजाला, गैरसैंण Updated Wed, 04 Sep 2013 09:31 AM IST
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funeral together of father, son and nephew

उत्तराखंड के गैरसैण्ा में बरसाती गदेरे में ऊफान में मारे गए पकोल-तिमला गांव के पिता-पुत्र और भतीजे की कुनीगाड़ पैत्रिक घाट पर गमगीन माहौल में अंत्येष्टी की गई।

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इस मौके पर भारी संख्या में क्षेत्रीय ग्रामीण मौजूद थे। हादसे के बाद से क्षेत्र में मातम पसरा पड़ा है। दोनों मासूम अपने-अपने माता-पिता के एकलौते चिराग थे।
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मंगलवार को ही लुधियाना से पहुंचे मृतक बलवंत के भाई वचन सिंह ने तीनों चिताओं को मुखाग्नि दी। इस मौके पर वहां मौजूद हर किसी की आंखे छलक उठी। इस घटना के बाद से गांव में मानों सब खामूस से हो गए हो।

अतीत बनी जिंदगी
विश्वास नहीं हो रहा, कि कल तक अठखेलियां करने वाले सूरज और करन आज उनके बीच नहीं हैं। लोगों के सुख-दुख में सबसे आगे सहयोग करने वाले मान सिंह के बड़े पुत्र बलवंत मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करता था।

एकलौते चिराग को अच्छी शिक्षा देने के लिए रोहिड़ा पब्लिक स्कूल में भर्ती किया, जिसे वह स्यवं ही स्कूल छोड़ने और स्कूल से घर लाने जाते थे। लेकिन अब ये सब अतीत बन चुका है।

नहीं है यकीन
मृतक के वृद्व पिता मान सिंह को यकीन नहीं हो रहा है कि उनके सामने ही बड़ा बेटा बलवंत और दो पोते सूरज और करन को काल ने उनसे हमेशा के लिए छिन लिया है। घर में मातम पसरा पड़ा है।


दर्शनी देवी अपने पति और आठ वर्षीय पुत्र सूरज को याद कर रोते हुए बेहोश हो रही हैं। जबकि सात वर्षीय करन की मां कला देवी का भी यही हाल है। घर में बेटियां हैं, लेकिन उन्हें यह नहीं सूझ रहा कि वे इन हालात में क्या करें।

बीस मिनट की बारिश लेकर आई मौत
पकोल-तिमला निवासी बलवंत सिंह, उसके पुत्र सूरज और भतीजे करन के लिए सोमवार को बीस मिनट की बरसात काल बनकर बरसी।

जीआईसी रोहिड़ा के समीप खड्यूंणी गदेरा बारिश से ऊफान पर चढ़ गया, जिसे पार करते समय ये तीनों बह गए थे। अवतार सिंह ने बताया कि यह मंजर उन्होंने स्वयं अपनी आंखों से देखा।

कुछ बच गए
कुछ बच्चों ने पहले ही गदेरा पार कर लिया था। लेकिन उक्त तीनों बह गए, जिन्हें बचाने की हरसंभव कोशिश भी की। लेकिन सफल नहीं हो पाए।

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