फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   friend Insect will help farmers

किसानों के दुश्मन कीटों का सफाया करेंगे ‘मित्र कीट’

Wed, 01 Nov 2017 12:44 PM IST
विजेंद्र श्रीवास्तव/ अमर उजाला, देहरादून
विजेंद्र श्रीवास्तव/ अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 01 Nov 2017 12:44 PM IST
विज्ञापन
friend Insect will help farmers
गरुड़ के छटिया गांव में पावर टिलर से खेत जोतता एक कृषक।  - फोटो : amar ujala file photo

आने वाले समय में पेड़ों पर लगने वाले कीटों का सफाया करने के लिए कीटनाशकों की तरह ‘मित्र कीट’ मिलेंगे।

विज्ञापन


यह मित्र कीट किसानों और बागबानी करने वालों की फसल को नुकसान पहुंचाने वाले हानिकारक कीट को खत्म कर देंगे। इससे कीटनाशकों के इस्तेमाल से पर्यावरण को होने वाले नुकसान की भी बचत होगी। फारेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों के अनुसार यह तरीका पूरी तरह सुरक्षित है। इसका पंजाब और हरियाणा में सफलता पूर्वक प्रयोग किया गया है।

एफआरआई के वैज्ञानिकों के अनुसार विदेश में कीटों का खत्म करने के लिए कीटों का इस्तेमाल किया जाता है। यह प्रयोग भारत में भी शुरू किया गया है। हानिकारक कीटों को खत्म करने में ट्राइकोग्रामा नामक कीट काफी मददगार होता है, बस इसे प्रभावित इलाके में छोड़ना भर होता है वह चुन-चुन कर पत्तियों के जरिये पेड़ों को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों को खत्म कर देता है।
विज्ञापन


एफआरआई दो साल से इसका ट्रायल पंजाब और हरियाणा में कर रहा था, जो काफी सफल रहा था। अब एफआरआई इसे प्रगतिशील किसानों को भी उपलब्ध कराने पर भी विचार कर रहा है। इसमें किसान जैसे कीटनाशक लेते हैं, उसी तर्ज पर ट्राइकोग्रामा कीटों के पैकेट ले सकेंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन


एफआरआई के कीट विज्ञान प्रभाग के वैज्ञानिक डॉ. केपी सिंह के अनुसार ट्राइकोग्रामा मित्र कीट के जरिये दुश्मन कीटों का सफाया करने का प्रयोग डॉ. युसुफ के निर्देशन में दो साल से चल रहा था, जिसके परिणाम काफी सुखद आए हैं।

आले वाले समय में अगर कहीं पर कीट का बड़े पैमाने पर हमला होता है, तो एफआरआई के वैज्ञानिकों से संपर्क किया जा सकता है, वह इलाके में कीटों के नियंत्रण के लिए ट्राइकोग्रामा को छोड़ देंगे, जिससे स्थिति नियंत्रण में आ जाएगी। यह समस्या को जड़ से खत्म करेगा। भविष्य में इस तकनीक को किसानों को भी उपलब्ध कराया जाएगा।


कैसे काम करता है
वैज्ञानिक डॉ. केपी सिंह के अनुसार पेड़ पर हानिकारक कीट लगा है, तो वहां पर ट्राइकोग्रामा कीट छोड़ा जाएगा, तो वह हानिकारक कीटों को ही चुनकर खाएगा और खत्म कर देगा। यह तरीका केवल पत्तियों के बाहर लगने वाले कीटों पर प्रभावी होगा। अगर पेड़ के अंदर से कीट लगा है, तो यह कारगर नहीं होगा। इस तकनीक से किसी तरह का पर्यावरण आदि पर नुकसान नहीं पड़ेगा, यह पूरी तरह सुरक्षित है। यह आम, लीची, पापुलर, यूकेलिप्टस आदि में बेहद कारगर है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed