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लीज की जमीन पर जीवन यापन करने को मजबूर है स्वतंत्रता संग्राम सेनानी का परिवार

Wed, 19 Sep 2018 02:02 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोटद्वार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोटद्वार Updated Wed, 19 Sep 2018 02:02 PM IST
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freedom fighter veer chandra singh garhwali family in poor condition
Veer Chandra Singh Garhwali family - फोटो : amar ujala

आजादी के आंदोलन में बढ़ चढ़कर भाग लेने वाले महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और पेशावर कांड के नायक वीर चंद्र सिंह गढ़वाली के निधन के बाद उनके दोनों बेटों का भी असामयिक निधन हो गया।

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इसके बाद उनका परिवार कोटद्वार भाबर में उत्तराखंड बार्डर से सटे यूपी के साहनपुर रेंज में दी गई लीज की जमीन पर जीवन यापन कर रहे हैं। हल्दूखाता में यूपी सरकार की लीज पर दी गई जमीन पर वीर चंद्र सिंह गढ़वाली के दो बेटों आनंद सिंह और कुशलचंद्र के परिवार रहते हैं। दोनों बेटों की असामयिक निधन के बाद उनकी विधवा बहुओं कपोत्री देवी और विमला देवी के ऊपर परिवार को संभालने की जिम्मेदारी आ गई।
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आज भी दोनों परिवार जैसे-तैसे अपना जीवन यापन कर रहे हैं। इसी बीच बिजनौर वन प्रभाग की ओर से गढ़वाली की बहुओं कपोत्री देवी पत्नी स्व. आनंद गढ़वाली और विमला देवी पत्नी स्व. कुशलचंद्र गढ़वाली को लीज पर दी गई भूमि के पंजीकरण और नवीनीकरण न करवाने पर दिए गए नोटिस से उनकी नींद उड़ गई है। गढ़वाली की छोटी पुत्रवधू विमला देवी का कहना है कि वह लीज की रकम देने को तैयार है, लेकिन वन विभाग की ओर से उन्हें कोई सहयोग नहीं मिल रहा है। उनका कहना है कि उनके पति की मौत के बाद परिवार की आर्थिक हालत भी अच्छी नहीं है। 

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कौन थे पेशावर कांड के नायक वीर चंद्र सिंह गढ़वाली

freedom fighter veer chandra singh garhwali family in poor condition
veer chandra singh garhwali - फोटो : AmarUjala

23 अप्रैल 1930 को गढ़वाली बटालियन का नेतृत्व कर रहे हवलदार मेजर चंद्र सिंह भंडारी (अब गढ़वाली) ने अंग्रेज सरकार के निर्देश पर जब आजादी की लड़ाई लड़ रहे निहत्थे पठानों पर गोली चलाने से इनकार कर दिया था। तब उनकी पूरी बटालियन को बगावत के जुर्म में कठोर कारावास झेलना पड़ा।

अंग्रेज सरकार ने गढ़वाली के पैतृक गांव दूधातोली में उनकी जमीन और मकान भी कुर्क कर दी। इन्हीं मेजर चंद्र सिंह भंडारी को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने गढ़वाली की उपाधि से सम्मानित किया। आजादी के आंदोलन में गढ़वाली की अहम भूमिका को देखते हुए 21 जनवरी 1975 को अविभाजित यूपी के तत्कालीन मुख्यमंत्री हेमवती नंदन बहुगुणा ने कोटद्वार भाबर के हल्दूखाता गांव से सटी बिजनौर जिले के साहनपुर रेंज में दस एकड़ जमीन 90 साल की लीज पर दी थी।

एक अक्तूबर 1979 में वीर चंद्र सिंह गढ़वाली का निधन हो गया, तब से उनका परिवार हल्दूखाता में रह रहा है। गढ़वाली के बड़े बेटे आनंद गढ़वाली के परिवार में उनकी पत्नी कपोत्री देवी और दो बेटे आलोक गढ़वाली और रुपेश गढ़वाली का परिवार रहता है, जबकि दो बेटियों बसंती और सरिता का विवाह हो चुका है। छोटे बेटे कुशल चंद्र गढ़वाली के परिवार में उनकी पत्नी विमला देवी के साथ चार बेटे रवींद्र, संजय, राहुल और देशबंधु का परिवार रहता है। बेटी ममता का विवाह हो चुका है।

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