ठगी का शिकार होने वाला पीड़ित भी है अपराध का जिम्मेदार, कैसे जानिए...
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धोखाधड़ी के मामले में शिकार करने वाला ही जुर्म के लिए दंडित होता है, वरना सही मायने में धोखाधड़ी के मामले में कथित पीड़ित भी दंडित होना चाहिए।
ठगी, धोखाधड़ी के ज्यादातर मामलों में अगर कोई लालच न करे तो वारदात हो ही नहीं सकती। इसी देहरादून दो मुंह वाले सांप के नाम पर हुई ठगी ताजी घटना की बानगी ले लें, प्रेमनगर के जूता कारोबारी अश्वनी कुकरेती के लालच ने हद ही पार कर दी है।
जालसाजों के फेर में आकर कारोबारी ने बिना किसी को बताए करोड़ों कमाने के चक्कर में 18 लाख गंवा दिए। व्यापारी ने एक बार भी दिमाग का इस्तेमाल नहीं किया और लालच के चलते दो मुंहा सांप से चार करोड़ रुपये कमाकर अमीर बनने के लालच में रुपए गंवा दिए।
लालच को ही हथियार बनाकर शिकार करते हैं ठग
सहीं मायने में ठग कथित पीड़ित के लालच को ही हथियार बनाकर उसका शिकार करते हैं। विधि विशेषज्ञ शिवकुमार शर्मा कहते हैं कि वास्तव में पीड़ित थोड़े से फायदे के लालच में गैरकानूनी काम करता है और ठगी का शिकार होकर पीड़ित बन जाता है।
जमीन में गड़ी मोहरे, अशर्फियां, सोने की ईंट बेचने के नाम पर पूरे देश में करीब चार सौ करोड़ रुपए की ठगी हर साल होती है। इन पीड़ितों से कोई एक बार नहीं पूछता कि क्या इस तरह की सामग्री खरीदना गैर कानूनी नहीं है? इसी तरह नौकरी लगाने के लिए रुपए देने के मामले में भी आरोपी ही सजा का पात्र होता है। एक बार यह सवाल नहीं उठता कि आखिर नौकरी के लिए रिश्वत देना क्या कानूनी है ?
इसी तरह औने-पौने दामों पर समान खरीदने, कम दिनों में बड़े ब्याज के चक्कर में लाखों गंवाने की घटनाएं अक्सर होती रहती हैं। सही मायने में आवाज उठनी चाहिए कि ऐसे लोगों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। रिटायर्ड सीओ उमाकांत का कहना है कि लालच लोगों पर भारी पड़ रहा है।
ठगी का शिकार होने वाले कथित पीड़ित ही इसके लिए काफी हद तक जिम्मेदार हैं। लुभावने ऑफर मिलने पर ही पुलिस को सूचित कर दिया जाए तो इस तरह की घटनाओं को न केवल खुद बचा जा सकता है, बल्कि और लोगों को भी ठगी का शिकार होने से बचाया जा सकता है।