पढ़िए, आपके सिलेंडर से कैसे चोरी होती है गैस?
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घरेलू गैस उपभोक्ता के हक पर डाका डाला जा रहा है। घरेलू गैस पर खूब डंडीमारी चल रही है। खुद एजेंसी वाले इस खेल में सबसे बड़े हिस्सेदार हैं। एजेंसी मालिक खुद बताते हैं किस तरह वह अपना और अपने स्टाफ के चंद कर्मचारियों का भला करने में मददगार बने हुए हैं।
जोगीवाला स्थित इन एजेंसी मालिक की मानें तो 300 रुपये अधिक चुकाकर सिलेंडर हासिल किया जा सकता है। इसमें से 150 रुपये उसके खुद के होते हैं।
50 रुपये आर्डर लाने वाले कमीशन एजेंट के पास जाते हैं, जबकि 50 रुपये आटो वाला ले लेता है। स्टाफ के कर्मचारियों को भी चाय-पानी इसी पैसे से हासिल है।
शहर में लगभग 26 और जिले में 40 के आस-पास एजेंसियां हैं। इनसे 8000 से लेकर 30000 तक ग्राहक जुड़े हुए हैं। छोटी एजेंसी से हर रोज 300-400, जबकि बड़ी एजेंसी से हर रोज 1000-1500 सिलेंडर डिलीवर होते हैं। बेईमानी की हर रोज की कमाई लाखों में है। ऐसे लोगों की कमी नहीं, जिनकी एक काल पर सिलेंडर लेने की चाह बेईमानी के इस खेल को बढ़ाती है।
सिलेंडर की वाल्व तक गायब
इस कर्मचारी की मानें तो कई ग्राहक हल्के सिलेंडर, गैस जल्दी खत्म होने की शिकायत करते हैं। ऐसा उसमें मिलावट की वजह से होता है। यह भी होता कि डिस्ट्रीब्यूटर से ग्राहक तक पहुंचने के बीच सिलेंडर की पीतल की वाल्व काट इसमें पाइप लगा देते हैं, ताकि मिलावट आसानी से हो सके। यह कभी रेत तो कभी पानी की होती है।
मजबूरी का नाम नेकी राम
नेकी राम (बदला हुआ नाम) का काम ग्राहकों के घर तक गैस सिलेंडर पहुंचाना है। बेहद कम पढ़े नेकी राम को तनख्वाह के 4200 रुपये मिलते हैं। पांच बच्चों समेत कुल सात सदस्यों वाले परिवार का खर्च बेहद मुश्किल से चलता है। नेकीराम ने अपनी गरीबी से लड़ने का तोड़ रेत में निकाला है। घरेलू सिलेंडर में इसकी मिलावट से वह चंद रुपयों का हकदार हो जाता है।
100 पर 10, नीचे से ऊपर तक मिलीभगत
गैस की बेईमानी के इस खेल में डिस्ट्रीब्यूटर, सप्लायर, वैन ड्राइवर, डिलीवरी मैन तक सबकी मिलीभगत रहती है। डिलीवरी से जुड़े अयाज (परिवर्तित नाम) की मानें तो गरीब को 100 रुपये में से 10 ही रुपये हासिल होते हैं। बाकी तो सब चेन में बंट जाता है।
बातों ही बातों में चुरा लेते हैं पेट्रोल
सबसे ज्यादा मुसीबत उन लोगों की है, जिनके पास कागजात नहीं और जो सिलेंडर ब्लैक में लेते हैं। ऐसे ज्यादातर दूसरे शहरों में काम करने वाले या छात्र हैं। उन्हें गैस डिलीवरी करने वाला कई बार जो सिलेंडर पकड़ाता है, उसकी सील कई बार ऊपर से खुली होती है। वह ‘गैस तो मिल ही गई’ सोचकर ज्यादा सिरदर्द नहीं करते।
बेईमानी का यह खेल केवल गैस एजेंसी पर ही चल रहा हो, ऐसा नहीं। पेट्रोल पंप भी इसके अड्डे बने हुए हैं। ग्राहक की आंख के आगे ही पेट्रोल चुरा लिया जा रहा है। पंप मालिक अपने पंप पर ‘सब ठीक है’ का दावा करते हैं, लेकिन कर्मचारी खुद बेईमानी के पोल खोलते नजर आते हैं।
डंडीमारी से हर रोज 20-40 रुपये अंटी
पेट्रोल पंप पर डंडीमारी सेल्समैन के लिए दो पैसे कमा लेने का धंधा बनी है। पंपमालिक बेशक अपने पेट्रोल पंप पर मशीनें एडवांस होने का दावा किए जा रहे हों, लेकिन सच यह है कि पंप पर काम कर रहे ज्यादातर सेल्स मैन तिकड़म से हर रोज के 20-40 या इससे भी अधिक रुपये कमा ही लेते हैं। अगर पेट्रोल लेते वक्त ‘जीरो’ से आपकी आंख हट गई तो जेब कटी समझो। सेल्समैन आगे से तेल चलाता है और बाकी रह गई मात्रा का पैसा हजम हो जाता है।
राउंड आफ से अंजान ग्राहकों से यूं वसूली
राउंड आफ का फायदा उठाने के लिए अब कई ग्राहक 100, 500 की जगह 80-90 रुपये तक का पेट्रोल भरवा रहे हैं। मसलन पेट्रोल की कीमत 71.18 रुपये प्रति लीटर है तो कुछ लोग 100 की जगह 70 का ही भरवा रहे हैं। दो लीटर भरवाने पर एक ग्राहक से 3 रुपये केआस-पास की डंडी मारी जा सकती है। लेकिन ज्यादातर ग्राहक राउंड आफ की गड़बड़ी केप्रति सचेत नहीं।