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दून में दस हजार में मिल रहा आशियाना!
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Sat, 31 Jan 2015 01:56 PM IST
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देहरादून में एक ओर जहां जमीनों के दाम आसमान छू रहे हैं, वहीं महज पांच से दस हजार रुपए में गरीबों को आशियाना बनाने के लिए जमीन दिलाई जा रही है।
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सरकारी जमीनों और नदी-नालों पर कराए जाने वाले कब्जों के लिए हर परिवार को फर्जी रजिस्ट्री मुहैया कराई जाती है। काठबंगला बस्ती में नगर निगम की कार्रवाई के बाद फिर यह खुलासा हुआ है कि राजधानी में सफेदपोशों के कई गिरोह अवैध बस्तियां बसा रहे हैं।
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गुरुवार को नगर निगम ने काठबंगला में अवैध बस्ती पर जेसीबी चला दी थी। 12 पक्के निर्माण ढहाए गए। शुक्रवार को बस्ती के लोग नगर निगम पहुंचे और मुख्य नगर अधिकारी हरक सिंह रावत से मिले। रावत ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया।
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मुख्य नगर अधिकारी ने दोटूक कहा कि राजधानी में अवैध बस्तियां बर्दाश्त नहीं की जाएंगी। इसके बाद बस्ती के लोग मेयर विनोद चमोली के पास पहुंचे। बस्ती में रहने वाले अधिकतर लोग मजदूर हैं।
इन लोगों ने जब मेयर को जमीनों की रजिस्ट्री दिखाई तो मेयर भी चौंक गए। हालांकि, जांच की गई तो रजिस्ट्री फर्जी निकली। बस्तीवासियों ने मेयर को बताया कि स्थानीय छुटभैये नेताओं ने उनसे दस-दस हजार रुपए लेकर जमीन की रजिस्ट्री दी है। इसके बाद उन्होंने मकान बनाए।
उनका कहना था कि ये छुटभैये नेता बड़े नेताओं की शह पर लोगों को बसाते हैं। मेयर ने बस्तीवासियों की बात सुनी, लेकिन बस्ती दोबारा बसाने से इनकार कर दिया। इसके बाद लोग लौट गए।
महिला नेता को पड़ी लताड़
बस्तीवासियों के साथ एक महिला नेता भी पहुंची थी। इस महिला ने मेयर विनोद चमोली से बस्ती दोबारा बसाने की पैरवी की तो मेयर उखड़ गए। उन्होंने कड़े शब्दों में ऐसा करने से इनकार करते हुए महिला को फटकार लगाई।
कहा कि अगर वह बस्ती दोबारा बसाएंगे तो भविष्य में निगम कर्मचारियों को किस आधार पर कार्रवाई के लिए कहेंगे। बात नहीं बनी तो महिला नेता लौट गई।
सरकारी जमीनों, नालों पर कब्जे कराने वाला गिरोह सा बन गया है। मजदूरों, गरीबों को बरगलाकर, उनसे रुपये वसूलकर अवैध बस्तियां बसाई जा रही हैं। ऐसे लोगों पर सफेदपोशों का ही हाथ रहता है। निगम के संज्ञान में ऐसे मामले आए हैं। भविष्य में ऐसी जानकारी मिलने पर मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया जाएगा।
- विनोद चमोली, मेयर