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पूर्व प्रधानमंत्री अटल के नाम से जानी जाएंगी हिमालय की चोटियां, जिन्हें फतह करने रवाना हुई टीम

Sat, 20 Oct 2018 07:24 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उत्तरकाशी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उत्तरकाशी Updated Sat, 20 Oct 2018 07:24 PM IST
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four peaks of the Himalayas will be known by the name of Atal bihari vajpayee
निम व पर्यटन विकास परिषद के दल ने किया आरोहण - फोटो : अमर उजाला

पूर्व पीएम भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी के सम्मान में चार अनछुई चोटियों का सफल आरोहण कर नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (निम) व उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद का पर्वतारोही दल उत्तरकाशी पहुंच गया है।

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अटल अभियान के तहत चार से 19 अक्तूबर तक आठ सदस्यीय पर्वतारोही दल ने रक्तवन ग्लेशियर क्षेत्र में चार चोटियों का आरोहण किया। गंगोत्री हिमालय क्षेत्र स्थित अटल-1 (6566 मीटर), अटल-2 (6557 मीटर), अटल-3 (6116 मीटर) व अटल-4 (6116 मीटर) नामक इस संपूर्ण पर्वत श्रृंखला को अब से अटल श्रृंखला के नाम से जाना जाएगा।
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सरकार की ओर से आयोजित अटल अभियान के तहत निम व पर्यटन विकास परिषद की संयुक्त टीम गंगोत्री हिमालय की अनछुई चोटियां को फतह करने के लिए चार अक्तूबर को देहरादून से रवाना हुई थी। इसके बाद दल ने कैलाश व सुदर्शन हिमशिखर के बीच स्थित अनाम चोटियों की पूरी श्रृंखला का आरोहण किया।

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मलबे में तब्दील हो रहा रक्तवन ग्लेशियर

टीम में निम के प्रधानाचार्य कर्नल अमित बिष्ट, अवधेश भट्ट, विजेंद्र सिंह, विष्णु सेमवाल, घनश्याम,  राकेश राणा, ज्योत्सना रावत, अनामिका बिष्ट शामिल थे। शनिवार को पत्रकार वार्ता में निम के प्रधानाचार्य कर्नल अमित बिष्ट ने बताया कि अभियान के दौरान रक्तवन ग्लेशियर की विषम परिस्थितियां, ऑक्सीजन की कमी व अनछुए क्षेत्र की जानकारी नहीं होना सबसे बड़ी चुनौती थी। जिसे सभी सदस्यों ने अपने साहस व सहायक दल के प्रेम सिंह, मनीष सेमवाल, सुभाष राणा व ग्याल्बू शेरपा के सहयोग से पार किया गया। 

अटल अभियान पर गई टीम के लीडर निम के प्रधानाचार्य कर्नल अमित बिष्ट ने रक्तवन ग्लेशियर में आ रहे बदलावों का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि गंगोत्री ग्लेशियर के सहायक ग्लेशियर के आसपास हो रहे भूस्खलन से जगह-जगह मलबे के ढेर जमा हो गए हैं, जिससे कई स्थानों पर ग्लेशियर भी टूटने लगा है। आलम यह है कि पूरे ग्लेशियर में बड़े-बड़े बोल्डर जमा हो गए हैं, जिससे अभियान दल को इसे पार करने में दिक्कत हो रही है। हालांकि ग्लेशियर के पिछले हिस्से में अभी भी अच्छी तादाद में बर्फ और आइस फील्ड मौजूद हैं, जो राहत की बात है। बताया कि पहले के अभियानों के दौरान भोजवासा से रक्तवन तक के क्षेत्र में भरल के 400 से 500 तक के झुंड दिखा करते थे, लेकिन इस बार पूरे ट्रैक में मात्र 20-30 भरल ही दिखाई दिए। 

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