गंदा पानी पीकर जिंदा रहे बाढ़ में फंसे युवक
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रोजी-रोटी के लिए श्रीनगर पहुंचे दून के चार युवा वहां की बाढ़ में फंस गए हैं। चारों वहां के एक होटल में काम करते हैं। इनकी जिंदगी इन दिनों चॉपर से गिरने वाले फूड पैकेट पर ही टिकी है। होटल की दो मंजिलें पानी में डूबी हैं। तीसरी मंजिल में रात कट रही है।
अलसुबह इन युवाओं के अलावा होटल का स्टाफ टीन की छत पर इस उम्मीद में पहुंच जाता है कि शायद आज उन्हें रेस्क्यू करने कोई चॉपर आ जाए लेकिन मायूसी ही हाथ लगती है। फोन भी ठप थे। सात दिन बाद मां से बात हुई तो खुशी-गम के आंसू एक साथ छलक आए।
रानीपोखरी न्याय पंचायत क्षेत्र के भट्टनगरी गांव के गुरु प्रसाद (23) और मनीष (22) रोजगार की तलाश में तीन माह पूर्व ही श्रीनगर पहुंचे थे। वहां मौलाना आजाद नगर रोड पर स्थित द ग्रेट मुमताज में उन्हें नौकरी मिल गई। सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन सात सितंबर की बाढ़ के बाद से वहीं फंसे रह गए हैं।
शनिवार को होटल की तीसरी मंजिल पर एक मोबाइल कंपनी का जेनरेटर किसी तरह चालू हुआ तो सभी ने मोबाइल चार्ज किए। इसके बाद परिजनों को अपने जीवित होने की सूचना दी। गुरु प्रसाद ने फोन पर बताया कि होटल में कुल 15 का स्टाफ है। आसपास भी लोग फंसे हुए हैं।
फोन पर बेटे से बात कर मां को आया चैन
श्यामपुर ऋषिकेश निवासी दीपक गुसांई और गढ़ी कैंट देहरादून निवासी रोहित नेगी भी उन्हीं के साथ हैं। खाने-पीने का सामान पानी में डूबकर बर्बाद हो गया। गुरु प्रसाद ने बताया कि कुछ लोग भूख और प्यास के चलते गंदा पानी पीने से बीमार हो गए हैं।
सुबह छह बजे मोबाइल की घंटी बजी तो गुरु प्रसाद के भाई संदीप, मां कौशल्या देवी और छोटी बहन लक्ष्मी के दिल को सुकून मिला। सभी का रो-रोकर बुरा हाल था। पड़ोस में ही रहने वाली मनीष की मां सावित्री देवी ने भी चैन की सांस ली।
चौथे दिन हेलीकॉप्टर से गिरे फूड पैकेट
गुरु प्रसाद ने बताया कि पानी दूसरी मंजिल तक पहुंचा तो लगा अब कोई नहीं बचेगा। लेकिन इसके बाद पानी स्थिर हो गया। जिंदगी तो बच गई लेकिन अब खाने के लाले पड़ गए। तीन दिन और तीन रातें भूखे ही गुजारी। चौथे दिन हेलीकॉप्टर से फूड पैकेट और पीने का पानी उन तक पहुंचा। तब जान में जान आई।