{"_id":"6a7b6cab0a4875627b0b5ba4","slug":"four-accused-including-mastermind-bank-employee-vikas-nagar-news-c-5-1-drn1089-1040432-2026-08-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"Dehradun News: 18 लाख लूट के मामले में मास्टरमाइंड बैंककर्मी सहित चार आरोपी बरी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Dehradun News: 18 लाख लूट के मामले में मास्टरमाइंड बैंककर्मी सहित चार आरोपी बरी
Wed, 12 Aug 2026 12:10 AM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून
संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून
Updated Wed, 12 Aug 2026 12:10 AM IST
विज्ञापन
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (विकासनगर) नंदन सिंह की अदालत ने 27 मई 2016 को पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) की नौगांव शाखा के प्रबंधक से 18 लाख रुपये लूटने के बहुचर्चित मामले में फैसला सुनाया। अदालत ने अभियोजन पक्ष की ओर से ठोस सबूत पेश न कर पाने और साक्ष्यों की कड़ी टूटने पर बैंककर्मी सहित चार आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया है। मामले के पांचवें आरोपी की मौत हो चुकी है।
बरी होने वालों में विशाल (निवासी थापुल, सहारनपुर), नवनीत, शौहार्द उर्फ मुन्ना (निवासी यमुनानगर, हरियाणा) और विक्रम सिंह (निवासी झज्जर, हरियाणा) शामिल हैं। मृतक आरोपी मंजेश कुमार हरिद्वार का रहने वाला था।
घटनाक्रम के अनुसार, 27 मई 2016 को पीएनबी नौगांव के प्रबंधक वेदप्रकाश शर्मा और बैंककर्मी विशाल 18 लाख रुपये कार से देहरादून (एश्ले हॉल शाखा) की चेस्ट में जमा कराने जा रहे थे। यमुना पुल से कैंपटीफॉल रोड पर एक कार सवार बदमाशों ने ओवरटेक कर उन्हें रोक लिया। हथियारों के बल पर मारपीट कर उन्हें कार में ही बंधक बनाया और मोबाइल की बैटरी व नकदी से भरा बैग लूटकर ढकरानी पावर हाउस के पास कार छोड़कर फरार हो गए थे।
विज्ञापन
पुलिस की इन खामियों से औंधे मुंह गिरा केस
अदालत ने साक्ष्यों के विश्लेषण में पाया कि अभियोजन पक्ष घटना को संदेह से परे साबित करने में पूरी तरह विफल रहा। एफआईआर में किसी भी आरोपी का नाम नहीं था, फिर भी पुलिस ने शिनाख्त परेड नहीं कराई। बरामदगी के दौरान किसी स्वतंत्र गवाह को शामिल नहीं किया गया। इसके अलावा, 18 लाख रुपये की निकासी साबित करने के लिए बैंक का कोई मूल रिकॉर्ड या किसी विश्वसनीय कर्मचारी की गवाही तक पेश नहीं की गई। आरोपी विशाल की गिरफ्तारी भी संदिग्ध प्रतीत हुई। इन खामियों के चलते अदालत ने संदेह का लाभ देते हुए चारों आरोपियों को बरी कर दिया।
बैंककर्मी विशाल ही था वारदात का मास्टरमाइंड
पुलिस की प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई थी कि बैंककर्मी विशाल ही इस पूरी लूट का मास्टरमाइंड था। उसने अपने बचपन के दोस्त नवनीत के जरिए अन्य पेशेवर बदमाशों (मंजेश, विक्रम और शौहार्द) को इस साजिश में शामिल किया था। पूरी सोची-समझी योजना के तहत ही विशाल उस दिन प्रबंधक को अपनी कार में बैठाकर देहरादून के लिए निकला था, ताकि रास्ते में वारदात को अंजाम दिया जा सके।
विशाल की हत्या करना चाहते थे बाकी आरोपी
लूट के बाद अन्य चारों आरोपियों ने अपने साथी बैंककर्मी विशाल को उसका हिस्सा नहीं दिया था। उन्हें डर सता रहा था कि विशाल पुलिस के हत्थे चढ़ गया तो उनके सारे राज खुल जाएंगे। इसलिए चारों ने विशाल की हत्या करने की खौफनाक साजिश भी रची थी, लेकिन अपने मंसूबों में कामयाब होने से पहले ही वे पुलिस के हत्थे चढ़ गए।
मृतक आरोपी मंजेश का रहा है भारी आपराधिक इतिहास
मुकदमे की सुनवाई के दौरान जिस पांचवें आरोपी मंजेश कुमार की मौत हुई, वह एक शातिर अपराधी था। उस पर हरियाणा के जगाधरी व अंबाला में 10 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज थे। देहरादून के डालनवाला में भी वर्ष 2002 में उस पर लूट व आर्म्स एक्ट के मामले दर्ज हुए थे। वर्ष 2008 में वह यमुनानगर पुलिस की कस्टडी से फरार भी हो चुका था।
विज्ञापन
बरी होने वालों में विशाल (निवासी थापुल, सहारनपुर), नवनीत, शौहार्द उर्फ मुन्ना (निवासी यमुनानगर, हरियाणा) और विक्रम सिंह (निवासी झज्जर, हरियाणा) शामिल हैं। मृतक आरोपी मंजेश कुमार हरिद्वार का रहने वाला था।
विज्ञापन
घटनाक्रम के अनुसार, 27 मई 2016 को पीएनबी नौगांव के प्रबंधक वेदप्रकाश शर्मा और बैंककर्मी विशाल 18 लाख रुपये कार से देहरादून (एश्ले हॉल शाखा) की चेस्ट में जमा कराने जा रहे थे। यमुना पुल से कैंपटीफॉल रोड पर एक कार सवार बदमाशों ने ओवरटेक कर उन्हें रोक लिया। हथियारों के बल पर मारपीट कर उन्हें कार में ही बंधक बनाया और मोबाइल की बैटरी व नकदी से भरा बैग लूटकर ढकरानी पावर हाउस के पास कार छोड़कर फरार हो गए थे।
विज्ञापन
पुलिस की इन खामियों से औंधे मुंह गिरा केस
अदालत ने साक्ष्यों के विश्लेषण में पाया कि अभियोजन पक्ष घटना को संदेह से परे साबित करने में पूरी तरह विफल रहा। एफआईआर में किसी भी आरोपी का नाम नहीं था, फिर भी पुलिस ने शिनाख्त परेड नहीं कराई। बरामदगी के दौरान किसी स्वतंत्र गवाह को शामिल नहीं किया गया। इसके अलावा, 18 लाख रुपये की निकासी साबित करने के लिए बैंक का कोई मूल रिकॉर्ड या किसी विश्वसनीय कर्मचारी की गवाही तक पेश नहीं की गई। आरोपी विशाल की गिरफ्तारी भी संदिग्ध प्रतीत हुई। इन खामियों के चलते अदालत ने संदेह का लाभ देते हुए चारों आरोपियों को बरी कर दिया।
बैंककर्मी विशाल ही था वारदात का मास्टरमाइंड
पुलिस की प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई थी कि बैंककर्मी विशाल ही इस पूरी लूट का मास्टरमाइंड था। उसने अपने बचपन के दोस्त नवनीत के जरिए अन्य पेशेवर बदमाशों (मंजेश, विक्रम और शौहार्द) को इस साजिश में शामिल किया था। पूरी सोची-समझी योजना के तहत ही विशाल उस दिन प्रबंधक को अपनी कार में बैठाकर देहरादून के लिए निकला था, ताकि रास्ते में वारदात को अंजाम दिया जा सके।
विशाल की हत्या करना चाहते थे बाकी आरोपी
लूट के बाद अन्य चारों आरोपियों ने अपने साथी बैंककर्मी विशाल को उसका हिस्सा नहीं दिया था। उन्हें डर सता रहा था कि विशाल पुलिस के हत्थे चढ़ गया तो उनके सारे राज खुल जाएंगे। इसलिए चारों ने विशाल की हत्या करने की खौफनाक साजिश भी रची थी, लेकिन अपने मंसूबों में कामयाब होने से पहले ही वे पुलिस के हत्थे चढ़ गए।
मृतक आरोपी मंजेश का रहा है भारी आपराधिक इतिहास
मुकदमे की सुनवाई के दौरान जिस पांचवें आरोपी मंजेश कुमार की मौत हुई, वह एक शातिर अपराधी था। उस पर हरियाणा के जगाधरी व अंबाला में 10 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज थे। देहरादून के डालनवाला में भी वर्ष 2002 में उस पर लूट व आर्म्स एक्ट के मामले दर्ज हुए थे। वर्ष 2008 में वह यमुनानगर पुलिस की कस्टडी से फरार भी हो चुका था।