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स्मृति शेष: उत्तराखंड विधानसभा सत्र में एक शिक्षक की तरह लोकतंत्र का पाठ पढ़ा गए थे प्रणब दा 

Mon, 31 Aug 2020 11:34 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Mon, 31 Aug 2020 11:34 PM IST
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Former President of india Pranab Mukherjee death: Pranab Mukherjee Speech in Uttarakhand Assembly Session in 2015
उत्तराखंड में प्रणब मुखर्जी - फोटो : अमर उजाला

वर्ष 2015 के मई माह में प्रणब दा राष्ट्रपति के रूप में उत्तराखंड आए थे। एक शिक्षक की तरह लोकतांत्रिक मूल्यों का पाठ पढ़ा कर गए थे। एक मर्मज्ञ की तरह उन्होंने विधानसभा के विशेष सत्र में उत्तराखंड की उम्मीदों, आपदा से उबरने, चुनौतियों और रह गई कमियों के बारे में बात की थी। 

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उस समय हरीश रावत की कांग्रेस सरकार के विशेष सत्र में प्रणब दा ने कहा था कि प्रदेश सरकार गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाना चाहती है। यह उन्हें सुखद लगा। उस समय विशेष सत्र में राष्ट्रपति रहते हुए उन्होंने जिन मुद्दों को छ़ुआ था, वह आज भी प्रासंगिक बने हुए है।
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प्रणब दा ने यह भी कहा था कि उत्तराखंड ने गरीबी कम की है लेकिन मैदान के मुकाबले पहाड़ पिछड़ रहे हैं। उन्होंने सत्र के दिन लगातार कम होते जाने पर भी चिंता जताई थी। उस समय पूर्व राष्ट्रपति का उत्तराखंड का यह तीसरा दौरा था। 

उत्तराखंड से विशेष लगाव था प्रणब दा को : राज्यपाल

राज्यपाल बेबीरानी मौर्य ने पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के निधन को अपूरणीय क्षति बताया है। राज्यपाल ने कहा कि पूर्व राष्ट्रपति का उत्तराखंड और देहरादून से खासा लगाव था। उन्होंने ही देहरादून स्थित द प्रेसीडेंट बाडीगार्ड का जीर्णोद्धार कराया था। 

प्रणब दा का जाना अपूरणीय क्षति : विस अध्यक्ष
विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने कहा कि पूर्व राष्ट्रपति का निधन समाज के लिए अपूरणीय क्षति है। उनके जाने से देश ने एक ऐसा नेता खो दिया जो हमेशा जमीन से जुड़े रहे।

राजनीति, वित्त, विधि के विशेषज्ञ थे- सीएम
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भारत रत्न पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति तथा शोक संतप्त परिजनों को धैर्य प्रदान करने की ईश्वर से कामना की है। उन्होंने कहा कि स्व. प्रणब मुखर्जी बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी थे। राजनीति, वित्त, विधि आदि क्षेत्रों के वे विशेषज्ञ थे। अपने लंबे सार्वजनिक व राजनीतिक जीवन में उन्होंने गहरी छाप छोड़ी है। वह कुशल प्रशासक और भारतीय राजनीति के शिखर पुरुष थे। स्व.मुखर्जी का देवभूमि उत्तराखंड के प्रति गहरा लगाव था। जब वह राष्ट्रपति थे तो उन्होंने उत्तराखंड विधानसभा को संबोधित किया था।

आपदा के बाद उत्तराखंड का आत्मविश्वास बढ़ाने आए थे : हरदा
पूर्व सीएम हरीश रावत के मुताबिक पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने उनके सीएम रहने के दौरान ही उत्तराखंड में विशेष सत्र में सदन को संबोधित किया था। उस दौर में 2013 की आपदा के बाद आत्मविश्वास दोबारा हासिल करने की कोशिश उत्तराखंड कर रहा था। 

मध्य हिमालय के विकास की सोच को धार दी थी : किशोर

कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय के मुताबिक प्रणब दा गंगा और मध्य हिमालयी सरोकारों से गहन रूप से जुड़े हुए थे। उन्होंने योजना आयोग के उपाध्यक्ष के रूप में मध्य हिमालय के विकास की सोच को धार भी दी थी। 

नीति पर रखते थे ध्यान, हमेशा मिला अनुभव का लाभ : इंदिरा
नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश ने कहा कि प्रणव दा नीति पर हमेशा ध्यान देते थे। उनकेे दीर्घ और गहरे अनुभव का कांग्रेस को हमेशा लाभ मिला। 

कांग्रेस के कार्यक्रम स्थगित, कांग्रेस ने जताया शोक
पूर्व राष्ट्रपति के निधन की जानकारी मिलने के बाद कांग्रेस ने अपने आगामी कार्यक्रम भी स्थगित कर दिए हैं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने पूर्व रारूट्रपति के निधन पर शोक जताया है। कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना, धीरेंद्र प्रताप आदि ने भी शोक जताया है।

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