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पूर्व मंत्री ठाकुर प्रेम प्रकाश सिंह मामला: फर्जी दस्तावेजों से हड़पी जमीन की वसीयत निष्प्रभावी घोषित

Fri, 26 Mar 2021 10:25 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रुद्रपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रुद्रपुर Published by: अलका त्यागी Updated Fri, 26 Mar 2021 10:25 PM IST
सार

  • अपर जिला न्यायाधीश द्वितीय ने भी माना कि पूर्व मंत्री प्रेम प्रकाश ने जाली दस्तावेजों से हड़पी थी स्वतंत्रता सेनानी की जमीन

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Former minister Thakur Prem Prakash Singh case: Land Grabbed by fake documents declared ineffective
- फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

उत्तराखंड के रुद्रपुर में सिविल जज सीनियर डिविजन के बाद अब अपर जिला न्यायाधीश द्वितीय चंद्रमणि राय ने भी पूर्व मंत्री ठाकुर प्रेम प्रकाश सिंह की ओर से तैयार की गई जमीन की वसीयत को शून्य और निष्प्रभावी घोषित कर दिया है। कोर्ट ने माना है कि मंत्री ने फर्जी दस्तावेजों एवं कूटरचित तरीके से स्वतंत्रता संग्राम सेनानी की जमीन हड़पी है।  किच्छा मार्ग स्थित बागवाला गांव में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रामअवध सिंह को सरकार ने 50 एकड़ भूमि दान में दी थी। रामअवध के निधन के बाद 32 एकड़ भूमि उनकी बेटी प्रभावती के नाम हो गई थी और शेष 18 एकड़ जमीन सीलिंग में चली गई थी।

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आरोप था कि 32 एकड़ जमीन को बरहज यूपी के पूर्व विधायक और पूर्व मंत्री ठाकुर प्रेमप्रकाश सिंह ने फर्जी वसीयत बनाकर अपने नाम कर ली थी। वर्ष 2014 में पूर्व स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रामअवध की बेटी प्रभावती ने कोतवाली में प्रेमप्रकाश सिंह, प्रेमनारायण सिंह और नवनाथ तिवारी के खिलाफ केस दर्ज कराया था। इसके बाद हुई विवेचना में पुलिस ने पूर्व मंत्री प्रेम प्रकाश की पत्नी मंजूलता सिंह, पुत्रवधू निधि सिंह, बेटे शिववर्धन, पूर्व जिला शासकीय अधिवक्ता स्वतंत्र बहादुर सिंह, उनकी पत्नी गीता सिंह और पुत्रवधू शिखा सिंह के नाम भी शामिल कर दिए थे। 
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वर्ष 2016 में पुलिस ने सभी के खिलाफ कोर्ट में आरोपपत्र दाखिल किए थे। प्रभावती की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता बीसी जोशी, आनंद सिंह सोलंकी, सिद्धार्थ श्रीवास्तव और पीयूष पंत, यजुवेंद्र सिंह ने बताया कि पूर्व में प्रभावती देवी ने सिविल जज सीनियर डिविजन धीरेंद्र भट्ट की अदालत में वसीयत को फर्जी बताकर वाद दायर किया था। तब कोर्ट ने वसीयत को शून्य और निष्प्रभावी घोषित किया था।
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संदेह के आधार पर यह मामला द्वितीय अपर जिला न्यायाधीश की अदालत में गया था। बृहस्पतिवार को अपर जिला न्यायाधीश (द्वितीय) चंद्रमणि राय ने फैसला सुनाते हुए वसीयत को निष्प्रभावी और शून्य घोषित कर दिया। कोर्ट ने माना कि प्रेमप्रकाश ने फर्जी और कूटरचित तरीके से स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रामअवध की जमीन हड़पी थी।

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