जंगल में लगी आग ने बढ़ाया सियासी तापमान
- हरीश रावत ने सरकार के प्रयासों को बताया नाकाफी
- कहा, उनके सुझावों पर नहीं किया अमल
- -मुख्य सचिव और अन्य अधिकारियों ने गिनाए सरकार के काम
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि उनकी ओर से राज्यपाल को तीन महत्वपूर्ण सुझाव दिये गए थ्रे। 22 अप्रैल को कैबिनेट ने जंगलों में लगी आग पर काबू पाने के लिए तीन महत्वपूर्ण सुझाव दिये थे। 28 को भी इस मामले में राज्यपाल को सुझाव दिये गए थे।
रावत ने कहा कि इन सुझावों पर अमल नहीं किया गया। इन सुझावों पर अमल होता तो जमीन पर असर दिखाई देता। उनकी ओर से सुझाव दिया गया था कि आग पर नियंत्रण के लिए जंगल महकमे में बीट के स्तर पर कार्यबल गठित किया जाए। आग पर काबू पाने के लिए स्थानीय लोगों का सहयोग किया जाए।
उत्तराखंड में घोषित हो वनाग्नि आपदाः रावत
इसके साथ ही केंद्र से यह भी आग्रह किया जाए कि आपदा घोषित करने का अधिकार राज्यों को दिया जाए और उत्तराखंड में वनाग्नि आपदा घोषित की जाए। रावत ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर यह गलत धारणा पेश की जा रही है कि जंगलों में जबरन स्थानीय लोग आग लगा रहे हैं। कुछ मानव जनित कारण हो सकते हैं। लेकिन, इसकी एक बड़ी वजह यह भी है कि जंगलों से लोगों का जुड़ाव पिछले 25 सालों में बिल्कुल ही खत्म कर दिया गया।
वनाग्नि पर ही इसके तुरंत बाद सचिवालय में मुख्य सचिव शत्रुघभन सिंह, अपर मुख्य सचिव एस रामास्वामी और अन्य वन अधिकारी मीडिया से मुखातिब हुये। मुख्य सचिव ने कहा कि वनों की आग पर नियंत्रण पाने का हर संभव प्रयास किया जा रहा है। पिछले दो दिनों में इसमें कमी भी आई है। एक मई को 130 मामले सामने आये। 30 अप्रैल को 219 मामले सामने आये थे। 29 मई को 417 मामले सामने आये। लेकिन इससे भी इनकार नहीं किया जा सकता कि आग के मामले मई में फिर से सामने नहीं आयेंगे।
मुख्य सचिव ने कहा कि आग पर नियंत्रण पाने के लिए जितनी कोशिश इस बार की गई, उतनी पहले कभी नहीं हुई। दस हजार से ज्यादा कर्मी आग बुझाने में जुटे हैं। अब अर्ली वार्निंग के लिए भी कोशिश की जा रही है।
आग बुझाने पहुंचा केंद्र से विशेषज्ञों का दल
आग के कारणों की पड़ताल और रोकथाम के उपाय के लिए रविवार को केंद्र से पहुंचे विशेष दल ने प्रदेश के आला अधिकारियों के साथ विचार विमर्श किया। मुख्यसचिव के मुताबिक केंद्रीय दल ने मिट्टी की नमी को बचाये रखने के लिए जल संग्रहण आदि के उपाय करनें और फायर लाइन की निरंतरता को बनाये रखने के सुझाव दिया है। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के कारण एक निर्धारित ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पेड़ों को काटकर फायर लाइन नहीं बनाई जा सकती। इसके लिए अब सर्वोच्च न्यायालय से इस पर पुनर्विचार का आग्रह किया जाएगा।
राज्यपाल नकारात्मक प्रचार से चिंतित
सूत्रों के मुताबिक वनाग्नि को लेकर मीडिया में आ रही खबरों पर राज्यपाल ने चिंता जताई। यही वजह रही कि देर रात मुख्य सचिव को बाकायदा प्रेस वार्ता बुलाकर सरकार का पक्ष सामने रखना पड़ा। जंगलों में लगी आग को लेकर हरीश रावत और कांग्रेस दिन भर सक्रिय रही।