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ऑनलाइन करिए अपने पितरों का तर्पण
अमर उजाला, देहरादून
Updated Tue, 01 Oct 2013 10:34 AM IST
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श्राद्ध को पितरों का कर्ज उतारने का माध्यम माना जाता है। लोग घरों में या हरिद्वार में गंगा तट पर पितरों को तर्पण देते हैं। लेकिन वक्त के साथ यह परंपरा भी हाईटेक स्वरूप ले चुकी है। विदेशों में रहने वाले लोग व्यस्तता के चलते घर नहीं आ पा रहे, लेकिन ऑनलाइन तर्पण दे रहे हैं।
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ऑनलाइन संपर्क पर पत्नी संग पूजा
ऑस्ट्रेलिया के व्यापारी मिलन एवाम ने दो दिन पूर्व ही अपने पंडित से तर्पण करवाया। पंडित से ऑनलाइन संपर्क पर जुड़े मिलन अपने घर पर पत्नी संग पूजा करते रहे। बाद में पंडितजी को ही भिक्षुकों को दान करने को कह दिया। इसी तरह स्मिता चिटनिस के पति का ऑस्ट्रेलिया में रेस्टोरेंट है।
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स्मिता बुजुर्गों का श्राद्ध करना कभी नहीं भूलती। पहले वह कैसे भी समय निकाल कर इंडिया आ जाती थी, लेकिन अब पूजन सामग्री छूकर ऑनलाइन पूजन ही करा लेती है।
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पूजन कराने वाले लोग पहले ही कोरियर से पूजन सामग्री मंगवा लेते हैं। पहले लोगों में भ्रम था कि पता नहीं ऑनलाइन पूजन पुण्यदायी नहीं है। उन्हें समझाया गया कि कंप्यूटर पर पंडित के क्रियाकलापों को देखकर वे भी वैसी ही क्रियाएं करते हैं तो इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। अब काफी लोग इससे जुड़ रहे हैं। विदेशों में रहने वाले लोग तो अब ऑनलाइन पूजन के ही भरोसे हैं, क्योंकि उन्हें पारिवारिक पंडितों पर ही भरोसा है।
-डॉ. आचार्य सुशांत राज, संस्थापक, नवग्रह शनि मंदिर, गढ़ी कैंट