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वाहनों की कमी के चलते ओवरलोड वाहनों में सफर को मजबूर हुए लोग
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साहिया। माघ मरोज पर्व शुरू होते ही नौकरीपेशा लोगों ने अपने गांवों को लौटना शुरू कर दिया है। इसके चलते रविवार को साहिया बाजार क्षेत्र में लोगों की खासा भीड़ दिखाई दी। वाहनों की कमी के चलते लोगों को छोटे वाहनों की छत में सफर करने को मजबूर होना पड़ा। कई बार साहिया बाजार में जाम की स्थिति भी उत्पन्न हुई। दिनभर बाजार में लोगों की चहल-पहल बनी रही।
कयलू देवता मंदिर में चुराच का बकरा चढ़ने के साथ ही क्षेत्र में माघ पर्व की शुरुआत हो गई है। सोमवार को घरों में मरोज पर्व का पहला बकरा काटा जाएगा। इस पर्व में हिस्सा लेने के लिए नौकरीपेशा लोग भी अपने घरों को लौटते हैं। इसके चलते रविवार को बाजार क्षेत्र में खासा चहल-पहल दिखाई दी। वाहनों की कमी के चलते लोगों को ओवरलोड वाहनों में सफर करना पड़ा। पांच सीटर वाहन में 30-40 लोग सफर करते दिखाई दिए। लोगों को जान हथेली में रखकर सफर करना पड़ा।
स्थानीय निवासी और पूर्व प्रधान मोहन लाल शर्मा, बलवीर सिंह राठौर, वीरेंद्र सिंह पंवार, दौलत सिंह चौहान और सतपाल राय आदि का कहना है कि हर बार प्रशासन से क्षेत्र में त्योहार होने पर अतिरिक्त वाहनों के संचालन की मांग की जाती है लेकिन, इस ओर कोई सुनवाई नहीं होती। बड़ा हादसा होने पर ही विभागों को वाहनों की संख्या बढ़ाने की याद आती है और मामला पुराना होते ही इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। विकासनगर में भी लोग छोटे वाहनों में ओवरलोड होकर अपने गंतव्य को रवाना होते दिखाई दिए, वहीं संपर्क करने पर एआरटीओ ने फोन नहीं उठाया।
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कयलू देवता मंदिर में चुराच का बकरा चढ़ने के साथ ही क्षेत्र में माघ पर्व की शुरुआत हो गई है। सोमवार को घरों में मरोज पर्व का पहला बकरा काटा जाएगा। इस पर्व में हिस्सा लेने के लिए नौकरीपेशा लोग भी अपने घरों को लौटते हैं। इसके चलते रविवार को बाजार क्षेत्र में खासा चहल-पहल दिखाई दी। वाहनों की कमी के चलते लोगों को ओवरलोड वाहनों में सफर करना पड़ा। पांच सीटर वाहन में 30-40 लोग सफर करते दिखाई दिए। लोगों को जान हथेली में रखकर सफर करना पड़ा।
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स्थानीय निवासी और पूर्व प्रधान मोहन लाल शर्मा, बलवीर सिंह राठौर, वीरेंद्र सिंह पंवार, दौलत सिंह चौहान और सतपाल राय आदि का कहना है कि हर बार प्रशासन से क्षेत्र में त्योहार होने पर अतिरिक्त वाहनों के संचालन की मांग की जाती है लेकिन, इस ओर कोई सुनवाई नहीं होती। बड़ा हादसा होने पर ही विभागों को वाहनों की संख्या बढ़ाने की याद आती है और मामला पुराना होते ही इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। विकासनगर में भी लोग छोटे वाहनों में ओवरलोड होकर अपने गंतव्य को रवाना होते दिखाई दिए, वहीं संपर्क करने पर एआरटीओ ने फोन नहीं उठाया।
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