{"_id":"6681cf89eed6252d210cfa77","slug":"for-the-implementation-of-the-three-new-criminal-laws-in-the-dehradun-news-c-5-1-drn1030-445888-2024-07-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"Dehradun News: पुलिस को नए कानूनों के क्रियान्वयन के लिए मिले 20 करोड़ रुपये","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Dehradun News: पुलिस को नए कानूनों के क्रियान्वयन के लिए मिले 20 करोड़ रुपये
विज्ञापन
I
I
I
I
I- बॉडी वॉर्न कैमरे और विवेचना अधिकारियों के लिए टैबलेट खरीद करेगी पुलिस
I
I- विवेचना की प्रगति दर्ज करने के लिए बना आईओ एप, तैयार हो रहा बड़ा सर्वरI
प्रदेश में तीनों नए आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन के लिए पुलिस को शुरुआती फेज में 20 करोड़ रुपये का बजट मिला है। इससे पुलिस बॉडी वॉर्न कैमरे (शर्ट पर लगाया जाने वाला कैमरा) और विवेचना अधिकारियों के लिए टैबलेट की खरीद करेगी।
इसके अलावा आईओ नाम से एक एप भी पुलिस ने तैयार कराया है। इस एप पर विवेचना अधिकारी सात साल से अधिक के मुकदमों में विवेचना की प्रगति को दर्ज करेंगे। इसके अलावा सारे डाटा को स्टोर करने के लिए एक बड़ा सर्वर भी तैयार किया जा रहा है। ताकि, लंबे समय तक डाटा को सुरक्षित रखा जा सके। बता दें कि नए आपराधिक कानूनों में तकनीकी पर जोर दिया गया है। मसलन, तलाशी भी होगी तो इसकी वीडियो रिकॉर्डिंग होगी। इसके लिए विवेचना अधिकारी व अन्य पुलिस अधिकारी अपने कपड़ों पर एक छोटा कैमरा लगाकर मौके पर जाएंगे। ताकि, हर गतिविधि को इसमें दर्ज किया जा सके। दैनिक डायरी भी टैबलेट में व्यवस्थित की जाएगी। विवेचना के हर तथ्य को इस टैबलेट में ही दर्ज किया जाएगा।
इसके बाद इसी टैबलेट को कोर्ट में भी प्रस्तुत किया जाएगा। ताकि, सब कुछ ऑनलाइन और प्रोफेशनल तरीके से किया जा सके। ऐसे कई बदलावों के लिए बड़े बजट की आवश्यकता पुलिस को पड़ेगी। पुलिस प्रवक्ता आईजी डॉ. निलेश आनंद भरणे ने बताया कि शुरुआती फेज में 20 करोड़ रुपये का बजट मिला है। इस बजट से बॉडी वॉर्न कैमरे और टैबलेट खरीदे जाएंगे। पुलिस को शुरुआती तौर पर चार से पांच हजार बॉडी वॉर्न कैमरों की जरूरत पड़ेगी। इसके अलावा इतने ही टैबलेट की खरीद पुलिस के विवेचना अधिकारियों के लिए की जाएगी।
विज्ञापन
इसके अलावा एक एप आईओ (इन्वेस्टिगेटिंग ऑफिसर) नाम से बनाया गया है। इस पर विवेचना अधिकारी अपनी जांच प्रगति को दर्ज करेंगे। इसके लिए उन्हें ट्रेनिंग दी जा चुकी है। डॉ. भरणे ने बताया कि इस कानून की अब तक 20 हजार से अधिक पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को ट्रेनिंग दी जा चुकी है। सभी कर्मचारियों का एक ऑनलाइन टेस्ट भी हो रहा है। इसके बाद उन्हें प्रमाणपत्र जारी किए जा रहे हैं। जरूरी साजों सामान जुटाने में अभी पुलिस को तीन से चार महीने का वक्त लग सकता है।
खरीद प्रक्रिया भी जल्द शुरू होने वाली है। शुरुआती बजट से एक बड़ा सर्वर रूम तैयार किया जा रहा है। इसमें सभी प्रकार की प्रगति को सुरक्षित रखा जाएगा। इसकी सुरक्षा के लिए भी विशेष प्रबंध किए जा रहे हैं। ताकि, इसमें कोई सेंध न लगा सके। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सोमवार को आईओ एप का उद्घाटन करेंगे।
Iफोरेंसिक किट के लिए खरीदी जाएंगी मोटरसाइकिलेंI
डॉ. भरणे ने बताया कि सात साल से अधिक के अपराधों में पुलिस मौके पर ही फोरेंसिक जांच करेगी। इसके लिए ऐसे वाहनों की जरूरत पड़ेगी जो कहीं भी किसी भी वक्त जा सकें। फोरेंसिक किट को एक मोटरसाइकिल पर रखा जाएगा। हर थाने के लिए मोटरसाइकिल की खरीद की जाएगी। इसके अलावा हर जिले में मोबाइल फोरेंसिक वैन की भी खरीद की जा रही है। इन सबके लिए बजट की मांग की गई है।
विज्ञापन
I
I
I
I- बॉडी वॉर्न कैमरे और विवेचना अधिकारियों के लिए टैबलेट खरीद करेगी पुलिस
I
I- विवेचना की प्रगति दर्ज करने के लिए बना आईओ एप, तैयार हो रहा बड़ा सर्वरI
प्रदेश में तीनों नए आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन के लिए पुलिस को शुरुआती फेज में 20 करोड़ रुपये का बजट मिला है। इससे पुलिस बॉडी वॉर्न कैमरे (शर्ट पर लगाया जाने वाला कैमरा) और विवेचना अधिकारियों के लिए टैबलेट की खरीद करेगी।
इसके अलावा आईओ नाम से एक एप भी पुलिस ने तैयार कराया है। इस एप पर विवेचना अधिकारी सात साल से अधिक के मुकदमों में विवेचना की प्रगति को दर्ज करेंगे। इसके अलावा सारे डाटा को स्टोर करने के लिए एक बड़ा सर्वर भी तैयार किया जा रहा है। ताकि, लंबे समय तक डाटा को सुरक्षित रखा जा सके। बता दें कि नए आपराधिक कानूनों में तकनीकी पर जोर दिया गया है। मसलन, तलाशी भी होगी तो इसकी वीडियो रिकॉर्डिंग होगी। इसके लिए विवेचना अधिकारी व अन्य पुलिस अधिकारी अपने कपड़ों पर एक छोटा कैमरा लगाकर मौके पर जाएंगे। ताकि, हर गतिविधि को इसमें दर्ज किया जा सके। दैनिक डायरी भी टैबलेट में व्यवस्थित की जाएगी। विवेचना के हर तथ्य को इस टैबलेट में ही दर्ज किया जाएगा।
विज्ञापन
इसके बाद इसी टैबलेट को कोर्ट में भी प्रस्तुत किया जाएगा। ताकि, सब कुछ ऑनलाइन और प्रोफेशनल तरीके से किया जा सके। ऐसे कई बदलावों के लिए बड़े बजट की आवश्यकता पुलिस को पड़ेगी। पुलिस प्रवक्ता आईजी डॉ. निलेश आनंद भरणे ने बताया कि शुरुआती फेज में 20 करोड़ रुपये का बजट मिला है। इस बजट से बॉडी वॉर्न कैमरे और टैबलेट खरीदे जाएंगे। पुलिस को शुरुआती तौर पर चार से पांच हजार बॉडी वॉर्न कैमरों की जरूरत पड़ेगी। इसके अलावा इतने ही टैबलेट की खरीद पुलिस के विवेचना अधिकारियों के लिए की जाएगी।
विज्ञापन
इसके अलावा एक एप आईओ (इन्वेस्टिगेटिंग ऑफिसर) नाम से बनाया गया है। इस पर विवेचना अधिकारी अपनी जांच प्रगति को दर्ज करेंगे। इसके लिए उन्हें ट्रेनिंग दी जा चुकी है। डॉ. भरणे ने बताया कि इस कानून की अब तक 20 हजार से अधिक पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को ट्रेनिंग दी जा चुकी है। सभी कर्मचारियों का एक ऑनलाइन टेस्ट भी हो रहा है। इसके बाद उन्हें प्रमाणपत्र जारी किए जा रहे हैं। जरूरी साजों सामान जुटाने में अभी पुलिस को तीन से चार महीने का वक्त लग सकता है।
खरीद प्रक्रिया भी जल्द शुरू होने वाली है। शुरुआती बजट से एक बड़ा सर्वर रूम तैयार किया जा रहा है। इसमें सभी प्रकार की प्रगति को सुरक्षित रखा जाएगा। इसकी सुरक्षा के लिए भी विशेष प्रबंध किए जा रहे हैं। ताकि, इसमें कोई सेंध न लगा सके। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सोमवार को आईओ एप का उद्घाटन करेंगे।
Iफोरेंसिक किट के लिए खरीदी जाएंगी मोटरसाइकिलेंI
डॉ. भरणे ने बताया कि सात साल से अधिक के अपराधों में पुलिस मौके पर ही फोरेंसिक जांच करेगी। इसके लिए ऐसे वाहनों की जरूरत पड़ेगी जो कहीं भी किसी भी वक्त जा सकें। फोरेंसिक किट को एक मोटरसाइकिल पर रखा जाएगा। हर थाने के लिए मोटरसाइकिल की खरीद की जाएगी। इसके अलावा हर जिले में मोबाइल फोरेंसिक वैन की भी खरीद की जा रही है। इन सबके लिए बजट की मांग की गई है।