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हरिद्वार: 200 करोड़ से बुझेगी जिले के आठ अर्द्धनगरीय क्षेत्रों की प्यास

Wed, 03 Oct 2018 11:56 AM IST
अंकित गर्ग, अमर उजाला, रुड़की
अंकित गर्ग, अमर उजाला, रुड़की Updated Wed, 03 Oct 2018 11:56 AM IST
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for haridwar semi urban areas water 200 crore rupee needed
Water Tap - फोटो : डेमो

हरिद्वार जिले के आठ अर्द्धनगरीय क्षेत्रों में 200 करोड़ के बजट लोग शुद्ध पेयजल मुहैया कराए जाने के योजना है। इस बजट से पेयजल टैंक और लाइनें बिछाई जाएंगी।

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पेयजल निगम की वर्ल्ड बैंक प्रोजेक्ट यूनिट की ओर से सर्वे का काम पूरा होने के बाद अब डीपीआर तैयार की जा रही है। जिसे जल्द ही स्वीकृति के लिए शासन को भेजा जाना है। योजना के अंतर्गत हरिद्वार सांसद रमेश पोखरियाल निशंक की ओर से केंद्र सरकार को जिले में पेयजल आपूर्ति के लिए प्रस्ताव भेजे गए थे। इस योजना से जिले में काफी हद तक शुद्ध पेयजल की कमी को दूर किया जा सकेगा।
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हरिद्वार जिला सहित प्रदेश के अन्य जिलों में शुद्ध पेयजल की शत प्रतिशत आपूर्ति दूर की कौड़ी बनी हुई है। हरिद्वार जिले की बात करें तो यहां दस साल पूर्व विभिन्न गांवों में ग्रामीण पेयजल योजना के अंतर्गत ओवरहैड टैंक बनाकर खड़े कर दिए गए थे, लेकिन अधिकांश टैंक बनने के बाद से ठप पड़े हैं। किसी टैंक की छत चूने लगी हैं तो किसी टैंक के ट्यूबवेल ने पानी छोड़ दिया है। वहीं कई जगहों पर गांव स्तर पर बनाई गई पेयजल समितियों की ओर से बिजली का बिल जमा नहीं होने से कनेक्शन काटे जा चुके हैं। ऐसे में अब वर्ल्ड बैंक प्रोजेक्ट के तहत प्रदेश के 35 अर्द्धनगरीय क्षेत्रों का चयन किया गया है।
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इनमें से हरिद्वार क्षेत्र के सैदपुरा, भंगेड़ी महावतपुर, नगला इमरती, ढंडेरा, मोहनपुरा, रवाली महदूद, बहादराबाद, जगजीतपुर को शामिल किया गया है। पेयजल निगम की वर्ल्ड बैंक प्रोजेक्ट यूनिट के अधिकारियों के मुताबिक सर्वे का काम पूरा हो चुका है। बजट स्वीकृति के साथ ही डीपीआर तैयार की जा रही है। इसे जल्द ही शासन को भेजे जाने की तैयारी है। हरिद्वार सांसद रमेश पोखरियाल निशंक ने बताया कि हरिद्वार जिले में मोहनपुरा, नगला इमरती समेत कई अन्य क्षेत्रों में शुद्ध पेजयल की आपूर्ति नहीं हो पा रही थी। इस बाबत उनकी ओर से विभिन्न क्षेत्रों में पेयजल के लिए प्रस्ताव बनाकर केंद्र सरकार को भेजे गए थे। योजना स्वीकृत होने के बाद जल्द ही काम शुरू कराया जाएगा।              
          
वर्ल्ड बैंक प्रोजेक्ट के अंतर्गत 975 करोड़ की पेजयल योजना के लिए प्रदेश के 35 अर्द्धनगरीय क्षेत्रों का चयन किया गया है। इनमें से 26 क्षेत्रों में ओवरहैड टैंक बनाए जाएंगे। इसके लिए सर्वे के बाद अब डीपीआर तैयार की जा रही है। जल्द ही शासन को भेजी जाएगी।              
- मुनीश कुमार, अधिशासी अभियंता, वर्ल्ड बैंक प्रोजेक्ट यूनिट पेयजल निगम हरिद्वार             

18 साल बाद भी ओवरहैड टैंक से नहीं मिला एक बूंद पानी        
लगभग18 साल पहले ग्रामीण पेयजल योजना के अंतर्गत निहंदपुर गांव में लाखों रुपए खर्च कर बनाया गया ओवरहैड टैंक से आज तक ग्रामीणों को दो बूंद पानी भी नहीं निकल पाया है। सफेद हाथी की तरह खड़ा यह टैंक जल निगम के अधिकारियों की उदासीनता ही नहीं सरकारी धन के दुरुपयोग की कहानी भी बयां कर रहा है। ग्रामीणों की शिकायतों के बाद भी इसे चालू नहीं कराया गया है। ग्राम प्रधान भी इस ओवरहैड टैंक के संचालन की मांग विभागीय अधिकारियों और तहसील दिवस में शिकायत दर्ज कराकर कर चुके हैं।

लक्सर ब्लॉक के निहंदपुर सुठारी गांव में वर्ष 2000 में गांव में ग्रामीणों को पेयजल मुहैया कराने की मंशा से लाखों रुपये की कीमत से ओवरहेड टैंक का निर्माण कराया गया था, लेकिन 18 साल बीत जाने के बावजूद आज तक ओवरहेड टैंक से ग्रामीणों को दो बूंद पानी नहीं मिल पाया है। इससे गांव के लोग प्रदूषित पानी पीने को मजबूर है। इतना ही नहीं ओवरहैड टैंक बनाने के बाद आज तक गांव में न ही पाइप लाइन बिछाई गई और न ही बिजली कनेक्शन हो पाया। मजेदार बात तो यह है इतने साल बाद भी निर्माण एजेंसी ने ओवरहैड टैंक गांव को हैंडओवर नहीं किया। ग्रामीण महबूब, मुनीश अहमद, फखरुद्दीन, फरीद अहमद आदि का कहना है कि गांव में बने ओवरहैड टैंक से जहां एक ओर ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल नसीब नहीं हो रहा है, वहीं दूसरी ओर ओवरहेड टैंक का रख-रखाव न होने के चलते भी उसकी स्थिति बेकार हो गई है।
       
गांव के पेयजल ओवरहैड टैंक को चालू कराने के लिए पेयजल विभाग के अधिकारियों को कई बार पत्र व्यवहार किया गया, लेकिन उन्होंने इस तरफ कोई ध्यान नहीं दिया। कभी बजट का तो कभी कोई अन्य बहाना बनाकर टाल मटोल करते रहते हैं।
- शमीम अहमद, ग्राम प्रधान निहंदपुर सुठारी
     
सार्वजनिक स्थानों पर भी पानी की किल्लत
कस्बा क्षेत्र में सार्वजनिक स्थानों पर भी आम लोग पानी की बूंद-बूंद को तरस रहे हैं। हालत यह है कि रेलवे स्टेशन, गन्ना विकास समिति कार्यालय, खंड विकास कार्यालय समेत तमाम दूसरे सरकारी दफ्तरों तक में पेयजल की समुचित व्यवस्था नहीं है। मामले की पूरी जानकारी होने के बाद भी जिम्मेदार अधिकारियों के स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।   

रेलवे स्टेशन पर खराब पड़ी कई टंकियां
लक्सर नगर स्थित रेलवे स्टेशन पर लबे समय से पानी की कई टंकियां खराब पड़ी हैं। अन्य टंकियों में पानी आने का कोई समय निश्चित नहीं है। अधिकतर समय ये टोंटियां सूखी पड़ी रहती हैं। इसके अलावा स्टेशन पर हैंडपंप की भी कोई समुचित व्यवस्था नही हैं।      
    
एक मात्र हैंडपंप के भरोसे  लोग
लक्सर नगर में स्थित सीओ, पूर्ति, एसडीएम व स्टांप कोषागार कार्यालय में मात्र एक हैंडपंप लगा है। यहां पर पानी की कोई टंकी नहीं लगी है। इसके अलावा एक अन्य सरकारी हैंडपंप आवासीय क्षेत्र में लगा है। पेयजल के लिए यहां पहुंचने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है, जबकि गेट के पास लगा वाटर कूलर भी ग्रामीणों को ज्यादा राहत नहीं दे पा रहा है।
    
यहां भी पानी की किल्लत बरकरार
लक्सर के बिजली दफ्तर में पेयजल की कोई व्यवस्था नहीं है। न ही यहां पर टंकी लगी है। यहां मात्र एक हैंडपंप है, उससे भी सही पानी नहीं आता है। सबसे बुरा आलम गन्ना विकास समिति व गन्ना विकास परिषद का है। यहां आने वाले किसानों के लिए पेयजल की कोई समुचित व्यवस्था नहीं है। इसके चलते किसानों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। वहीं खंड विकास कार्यालय में भी पीने के पानी की स्थिति अन्य जगहों जैसी ही है। इसके अलावा शिक्षा विभाग, आबकारी विभाग, रुड़की बस अड्डा, मैटाडोर स्टैंड आदि पर भी पीने के पानी की कोई व्यवस्था नहीं है।  
    
सरकारी कार्यालयों में पेयजल की व्यवस्था की जानकारी की जाएगी। जिम्मेदार अधिकारियों को इस ओर व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए जाएंगे।
- कौस्तुभ मिश्र, एसडीएम लक्सर
   
दरगाह क्षेत्र में शोपीस बना दो करोड़ का ओवरहैड टैंक
पिरान कलियर दरगाह क्षेत्र में एक करोड़ 82 लाख से बना ओवरहैड टैंक वर्षों से चालू हालत में नहीं है। साल सात बीत जाने के बाद भी यहां के लोग ओवरहैड टैंक की सुविधा होने के बावजूद पानी को तरस रहे हैं। दरगाह पिरान कलियर में पेयजल व्यवस्था को दुरुस्त करने एवं सौंदर्यीकरण के लिए तत्कालीन दरगाह प्रशासक जिला अधिकारी डॉ. आर मीनाक्षी सुंदरम ने वर्ष 2010 में करीब पांच करोड़ से दो पार्क, पार्किंग के साथ एक करोड़ 82 लाख रुपये की लागत से एक ओवरहैड टैंक बनवाया था। इसका जिम्मा यूपी की एक कंपनी को दिया गया था। वर्ष 2010-11 में बनकर तैयार हुए इस ओवरहैड टैंक का कोई उपयोग आज तक नहीं हो पाया है। ओवरहैड टैंक को चालू कराने के लिए साबिर पाक के सालाना उर्स के दौरान होने वाली मेला बैठक में जिला प्रशासन के सामने मांगे उठाई जाती रही हैं। अब डेढ़ माह बाद उर्स शुरू होने वाला है। इस बाबत दरगाह प्रबंधक शाहिद अली का कहना है कि कार्यदायी संस्था को ओवरहैड टैंक को ठीक करने का नोटिस जारी किया गया है। साथ ही डीएम को रिपोर्ट भेजी गई है।  


किसी काम का नहीं यहां बना टैंक
ज्वालापुर विधानसभा क्षेत्र के लालवाला मजबता गांव में 10 साल पहले बनाया गया पानी टैंक किसी काम का नहीं है। आज तक इस टैंक से पानी की सप्लाई नहीं हो पाई है। लालवाला खालसा गांव में चार मजरों में पानी की सुविधा के लिए स्वजल विभाग ने लगभग 42 लाख रुपए की लागत से एक पानी का टैंक बनाया था। आलम ये है कि दस साल बीत जाने के बाद भी टैंक शोपीस बना हुआ है। लगातार लोग पानी नहीं मिलने से शिकायतें करते रहते हैं, लेकिन आज तक किसी भी अधिकारी ने ग्रामीणों की इस मांग पर कोई ध्यान नहीं दिया है। इसके चलते ग्रामीणों को नलों से आने वाला दूषित पानी पीने को ही मजबूर होना पड़ रहा है। इस बाबत ग्राम प्रधान विजय कुमार का कहना है कि प्रस्ताव भेजा गया है। जल्द ही पानी के टैंक को चालू कराया जाएगा।

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