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यहां क्रिकेट के लिए दोस्त बने, राजनीति के कट्टर ‘दुश्मन’

Tue, 19 Jun 2018 11:34 AM IST
अनिल चन्दोला, अमर उजाला, देहरादून
अनिल चन्दोला, अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 19 Jun 2018 11:34 AM IST
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for bcci recognition politician come together
trivendra singh rawat

राजनीति के मैदान पर एक-दूसरे के कट्टर दुश्मन रहे मौजूदा मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और पूर्व कैबिनेट मंत्री हीरा सिंह बिष्ट ने आपसी झगड़ा छोड़कर प्रदेश में क्रिकेट के विकास के लिए एक-दूसरे को गले लगा लिया था। उनकी इस पहल के बाद ही राज्य में बीसीसीआई मान्यता को लेकर कवायद तेज हुई और कुछ महीनों के अंतराल में ही उत्तराखंड के लिए समिति गठित करने पर सहमति बन गई है। 

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राजनीति के धुरंधर खिलाड़ी त्रिवेंद्र सिंह रावत और हीरा सिंह बिष्ट खेल संघों में भी खासे सक्रिय रहे। सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत जहां पिछले लंबे समय से उत्तराखंड क्रिकेट एसोसिएशन (यूसीए) के अध्यक्ष हैं, वहीं हीरा सिंह बिष्ट भी क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड (सीएयू) की कमान संभाल रहे हैं। मौजूदा सरकार के समय राज्य को बीसीसीआई मान्यता दिलाने की कवायद तेज हुई। चारों क्रिकेट एसोसिएशनों के बीच झगड़े को मान्यता न मिलने का मुख्य कारण माना गया। यहीं से दोनों राजनीतिक प्रतिद्वंदियों ने प्रदेश के खिलाड़ियों के हित में एक होने का फैसला किया। दोनों एसोसिएशनों ने आपसी स्वार्थ और झगड़े को छोड़कर मान्यता के लिए मिलकर लड़ने का फैसला किया। 
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तब त्रिवेंद्र सिंह रावत की यूसीए को हीरा सिंह बिष्ट की सीएयू में मर्ज कर दिया गया। इसके बाद यूनाइटेड क्रिकेट एसोसिएशन पर भी एकजुट होने का दबाव बढ़ा। यहीं से राज्य की मान्यता की लड़ाई को दिशा मिली। सरकार के स्तर से इस लड़ाई में पूरा समर्थन मिला तो खेल मंत्री अरविंद पांडे भी खुलकर मान्यता के लिए प्रयास करने में जुट गए। इसी का नतीजा है कि राज्य में समिति के गठन की कवायद हो सकी है।
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शुक्ला और पांडे की जुगलबंदी भी काम आई
राजनीति में एक दूसरे के विरोधी कांग्रेस नेता और आईपीएल के कमिश्नर राजीव शुक्ला एवं उत्तराखंड भाजपा सरकार के खेल मंत्री की जुगलबंदी का भी कहीं न कहीं समिति के गठन में रोल रहा है। सूत्रों के अनुसार, बीते दिनों देहरादून के राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में अफगानिस्तान और बांग्लादेश के बीच टी-20 मैच देखने आए राजीव शुक्ला के साथ खेल मंत्री अरविंद पांडे की प्रदेश में क्रिकेट को लेकर बातचीत हुई थी। इसके अलावा पांडे ने राजीव शुक्ला से आईपीएल की मेजबानी की भी पैरवी की थी। 

राज्य के क्रिकेट और क्रिकेटरों के हित में एसोसिएशनों ने एक मंच पर आने का फैसला किया, जिसका स्वागत होना चाहिए। 18 साल बाद राज्य के लिए यह बड़ी उपलब्धि है। इससे प्रदेश के खिलाड़ियों को बहुत ज्यादा फायदा होगा। यह उत्तराखंड के लिए ऐतिहासिक दिन है। 
- जावेद बट्ट, महासचिव, उत्तराखंड यूथ ट्वेंटी-20 क्रिकेट एसोसिएशन

राज्य के क्रिकेटरों और क्रिकेट से जुड़े लोगों के लिए यह ऐतिहासिक दिन है। कई क्रिकेटर जब मान्यता न होने के कारण दूसरे राज्यों का रुख करते हैं तो वाकई दुख होता है। वैसे भी अपने राज्य के लिए खेलने का गौरव कुछ अलग होता है। 
- रवि नेगी, क्रिकेट कोच

प्रदेश के सैकड़ों प्रतिभावान बच्चों को मान्यता न होने के कारण दूसरे राज्यों के चक्कर काटने पड़े। कई खिलाड़ियों का भविष्य बर्बाद हो गया। अब यही उम्मीद है कि राज्य की नई प्रतिभाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिलेगा।
- डीके मिश्रा, अभिभावक

अब सबकी जिम्मेदारी है कि प्रदेश में अब ‘गेम’ नहीं क्रिकेट होना चाहिए। प्रदेश की प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने और राज्य में क्रिकेट के भले के लिए काम करने की जरूरत है। खेल मंत्री समेत सभी एसोसिएशनों को बधाई कि उन्होंने खिलाड़ियों की बेहतरी के लिए यह प्रयास किए।  
- संदीप गुप्ता, अभिभावक

राज्य के खिलाड़ियों को अब भटकना नहीं होगा। युवा खिलाड़ी अपने प्रदेश के लिए खेलने का सपना पूरा कर सकेंगे। मान्यता न होने के कारण कई खिलाड़ियों को नुकसान झेलना पड़ा है। अब खिलाड़ियों के साथ यह ‘खेल’ नहीं होगा।  
- विपिन बलूनी, सोशल बलूनी क्रिकेट एकेडमी

हर राज्य का खिलाड़ी चाहता है कि वह अपने स्टेट की कैप पहनकर खेले। खिलाड़ियों को अब इसका मौका मिलेगा। यह ऐतिहासिक मौका है, जो प्रदेश की प्रतिभाओं को नई ऊंचाईयों तक पहुंचने का मौका देगा। युवा क्रिकेटरों के लिए आज का दिन यादगार है। 

- जगमोहन नागरकोटी, युवा क्रिकेटर

प्रदेश के युवा क्रिकेटरों के लिए यह जश्न का दिन है। कई खिलाड़ी राज्य के लिए खेलने का सपना देखते हुए खत्म हो गए। अब उम्मीद जगी है। आने वाले वक्त में प्रदेश के युवा क्रिकेटर देश के लिए खेलने का भी गौरव हासिल करेंगे।
- अमित पांडे, पूर्व क्रिकेटर

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