कभी देखा है छह इंच के बरगद का पेड़
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छह इंच का बरगद का पेड़, दस-दस ग्राम के टमाटर और लाल रंग की बंदगोभी। शनिवार को राजभवन में दो दिवसीय पुष्पप्रदर्शनी बोनसाई पौधे देख लोग हैरान रह गए।
बिना मिट्टी के गमलों में लहलहाते पौधे भी आकर्षण का केंद्र रहे। रंग-बिरंगे फूलों, फलों और सब्जियों की कई अनदेखी-अनसुनी प्रजातियां भी प्रदर्शनी में मौजूद हैं। शनिवार को राजभवन फूलों की खुशबू से महक उठा।
फूलों की दो सौ से अधिक प्रजातियां
गुलाब, जरबेरा, कारनेशन, ग्लेडोलियस, लिली समेत देसी-विदेशी फूलों की दो सौ से अधिक प्रजातियां प्रदर्शनी में हैं। लकी बैंबू, कोकोपिट में लगाए गए बोनसाई प्लांट, कैक्टस की प्रजातियां भी लोगों को खूब भा रही हैं।
जरबेरा की तीस से अधिक, जबकि आर्किड की छह वेरायटी प्रदर्शनी में हैं। हरिद्वार के ज्येष्ठ उद्यान निरीक्षक सुधीर कुमार पांडे बताते हैं कि एक आर्किड की कीमत बाजार में पांच सौ रुपये है। दस दिन तक यह खराब नहीं होता।
यह है बोनसाई
बोनसाई पौधे किसी बड़े पेड़ के बौने रूप को कहा जाता है। बिना मिट्टी के कोकोपिट में किसी पेड़ का बीज या कलम लगाया जाता है।
इसके बाद खास देखभाल के साथ पौधे की जड़ों, शाखों की इस तरह काट-छांट की जाती है कि वह दशकों की उम्र के बावजूद दो फीट से अधिक ऊंचा न हो सके। इस तकनीक से घर में गमलों में बरगद, पिलखन, पीपल, गूलर जैसे पेड़ लगाए जा सकते हैं।
पौधे में गणपति
बोनसाई पौधों की फाइकस प्रजाति में डक, रैबिट, गणेश की आकृति लोगों को आकर्षित कर रही है। हालांकि, कीमत के लिहाज से ये पौधे जेब पर भारी पड़ सकते हैं। इनकी कीमत 17-18 हजार रुपये तक हो सकती है।
‘फूलों की खेती से संवारें आर्थिकी’
वसंतोत्सव का शुभारंभ राज्यपाल डा. अजीज कुरैशी ने किया। उन्होंने कहा कि पुष्प उत्पादन छोटे काश्तकारों के लिए आमदनी का बेहतर जरिया बन सकता है। यह परंपरागत कृषि का बेहतर विकल्प है।
राज्यपाल ने पर्वतीय क्षेत्रों में जंगली जानवरों से फसलों को बढ़ते नुकसान को देखते हुए सगंध पादपों की खेती के प्रोत्साहन पर जोर दिया। प्रदर्शनी में कुमाऊं के छोलिया नृत्य की प्रस्तुतियों ने लोकरंग की छटा बिखेरी।
राज्यपाल ने डाक तार विभाग द्वारा विशेष रूप से तैयार डाक टिकट का लोकार्पण किया। कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री अमृता रावत भी मौजूद रहीं।