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ऋषिकेश में बाढ़ सुरक्षा कार्य अधूरा, दहशत में ग्रामीण 

Fri, 27 May 2016 12:16 PM IST
नवीन नौटियाल/ अमर उजाला, ऋषिकेश
नवीन नौटियाल/ अमर उजाला, ऋषिकेश Updated Fri, 27 May 2016 12:16 PM IST
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Flood protection work unfinished in rishikesh
- फोटो : file photo

बारिश की दस्तक से गंगा और सौंग नदी किनारे बसे दर्जनों गांवों में रहने वाले लोगों की नींद उड़ी है। बाढ़ सुरक्षा इंतजाम को लेकर बाढ़ नियंत्रण खंड कुंभ कर्णी नींद सोया है। महकमा अभी सर्वे करने और बाढ़ सुरक्षा दीवार बनाने के लिए प्रस्ताव तैयार करने की बात कर लोगों की जान से खिलवाड़ कर रहा है। गौरतलब है कि तेज जलप्रवाह में पिछले वर्षों में  कई हेक्टेयर कृषि भूमि, पशु और भवन  पहले भी जलप्रवाह में समा चुके हैं।

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नदी किनारे बसे कई गांवों में हर बरसात में उफनाई नदी से होने वाली तबाही का मंजर याद रहता है। पिछली बरसात में गौहरी माफी में उफनाई सौंग नदी से बाढ़ सुरक्षा को बनाए गए विभिन्न जगहों पर कई पुस्ते क्षतिग्रस्त हो गए थे। उस वक्त स्थिति यह हो गई थी कि कई  परिवारों को जान बचाने के लिए गांव के स्कूलों में रात काटने को मजबूर होना पड़ा था या फिर घर छोड़कर पलायन कर गए थे।
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सौंग नदी किनारे बसा गौहरी माफी गांव वर्ष 1993 से  लगातार बाढ़ से  प्रभावित होता रहा हैै। इस दौरान ग्रामीणों को काफी जान  माल का नुकसान  उठाना पड़ा। वर्ष 2009 में ग्रामसभा गौहरी माफी की ओर से  बाढ़ नियंत्रण सिंचाई विभाग देहरादून को बाढ़ सुरक्षा तट बंध बनाने के लिए  प्रस्ताव भेजा  गया। वर्ष 2013 में सौंग नदी में आई भीषण बाढ़ ने भयंकर तबाही मचाई। इस दौरान कई ग्रामीणों की भूमि, भवनों को काफी नुकसान पहुंचा।
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इसके बाद ग्रामीणों के संघर्ष के बाद बाढ़ नियंत्रण विभाग ने सौंग नदी  किनारे तटबंध  बनाने की मंजूरी देते हुए 5 करोड़ 96 लाख रूपये अवमुक्त किए थे। जनवरी  2014 में तटबंध बनाने का काम शुरू हुआ। लेकिन इसी बीच एक एनजीओ ने काम वाले स्थल को राजाजी नेशनल पार्क के अंतर्गत बताते हुए एनजीटी में याचिका दायर की।

इसके बाद निर्माधीन तटबंध में एनजीटी के आदेश पर 28 अप्रैल को रोक लगा दी गई। एनजीटी में चली लंबी सुनाई के बाद 31 मार्च 2016 को एनजीटी ने तट बंध निर्माण की स्वीकृति दे दी है। स्वीकृति मिलने के तीन माह बाद भी कार्य दायी संस्था ने काम शुरू नहीं किया है।

क्यों नही हो पा रहा निर्माण
तट बंध निर्माण का काम जनवरी 2014 में 5 करोड़ 96 लाख रूपये की लागत से शुरू हुआ।  61 लाख 72 हजार 115 रूपये का काम भी हो गया था। लेकिन एनजीटी की रोक के बाद मामले की सुनवाई लंबे समय तक चलने के कारण तट बंध निर्माण योजना की  शेष धनराशि लैप्स हो गई है।

इन इन स्थानों पर है बाढ़ का खतरा
सौंग और गंगा नदी से छिद्दरवाला, साहबनगर, चकजोगीवाला, जोगीवालामाफी, ठाकुरपुर, टिहरीफार्म, रायवाला और हरिपुरकलां बरसात में बाढ़ से खासे  प्रभावित होते हैं।

क्या कहते हैं ग्रामीण
बरसात शुरू होते ही पिछली बार आई भंयकर जलप्रवाह का मंजर याद आता है। उस वक्त हम लोगों को घर छोड़कर स्कूल में रात काटने को मजबूर होना पड़ा था। सरकार हम लोगों की जान के साथ खिलवाड़ कर रही है।
- सूरत सिंह चौहान, ग्रामीण

हर साल बाढ़ से गांव में काफी नुकसान होता है। जिसके बाद सरकार पचास बांटकर ग्रामीणों के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम करती है। बरसात के समय हमें बाढ़ के खतरे का ड़र इस कदर सताता है कि हमें अपने बच्चों की  सुरक्षा के लिए रातभर जागने को मजबूर होना पड़ता है।

- सुनीता न्यूली, वार्ड मेंबर सदस्य

निर्माण कार्य पर रोक लगने के बाद लंबा समय बीतने के कारण निर्माण योजना के लिए आया बजट लैप्स हो गया है। तबबंध निर्माण के लिए विभाग ने सर्वे कर लिया है। सर्वे रिपोर्ट को तकनीकि समिति को भेजा जाएगा। इसके बाद शासन को बजट  के लिए प्रस्ताव भेजा जाएगा। निर्माण कब शुरू होगा कुछ कहा नहीं जा सकता है।
- आरपी चमोली, सहायक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण खंड ऋषिकेश

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