Uttarakhand News: ट्रांसफर एक्ट में खामियां, 20-22 सालों से जमे हैं सुगम में, डिप्लोमा इंजीनियर्स में आक्रोश
स्थानांतरण एक्ट में व्याप्त विसंगतियों के कारण लोनिवि में कार्यरत सहायक अभियंता, कनिष्ठ और अपर सहायक अभियंताओं के स्थानांतरण नाम मात्र के ही हो पा रहे हैं। इसके कारण कई अभियंता 20 से अधिक वर्षों से सुगम वाले सुगम और दुर्गम वाले दुर्गम में ही सेवाएं देने को मजबूर हैं। इससे डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ से जुड़े कर्मचारियों में रोष है।
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उत्तराखंड लोक निर्माण विभाग में कार्यरत कई डिप्लोमा इंजीनियर्स 20 से 22 सालों से सुगम वाले सुगम तो दुर्गम वाले दुर्गम में सेवाएं दे रहे हैं। उत्तराखंड स्थानांतरण एक्ट 2017 में खामियां बताते हुए अब डिप्लोमा इंजीनियर्स ने इन्हें दूर करने की मांग मुख्य सचिव डॉ. एसएस संधु से की है।
उत्तराखंड डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ ने इस संबंध में मुख्य सचिव को एक पत्र लिखा है। पत्र में कहा गया है कि स्थानांतरण एक्ट में व्याप्त विसंगतियों के कारण लोनिवि में कार्यरत सहायक अभियंता, कनिष्ठ और अपर सहायक अभियंताओं के स्थानांतरण नाम मात्र के ही हो पा रहे हैं। इसके कारण कई अभियंता 20 से अधिक वर्षों से सुगम वाले सुगम और दुर्गम वाले दुर्गम में ही सेवाएं देने को मजबूर हैं। इससे डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ से जुड़े कर्मचारियों में रोष है।
संघ के प्रांतीय महामंत्री छब्बील दास ने बताया कि इस संबंध में पूर्व में विभाग के प्रमुख अभियंता को ज्ञापन सौंपा गया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब शासन से गुहार लगाई गई है।
क्या है विसंगति
विषंगति-एक
स्थानांतरण एक्ट की धारा 7 घ के अनुसार, जिन कार्मिकों ने पूर्व मेंं 10 वर्ष की सेवा दुर्गम में कर ली है, यदि वह सुगम खंड में स्थानांतरित हो जाता है, तब उसकी चार वर्ष की सुगम की सेवा होने के बाद भी वह दुर्गम का पात्र नहीं रहेगा। भविष्य में उसका कोई स्थानांतरण नहीं होगा।
विषंगति-दो
यदि कोई कार्मिक आठ वर्ष की सेवा दुर्गम में करता है तो दुर्गम का फैक्टर लगाकर उसकी दुर्गम की सेवा 10 वर्ष की मानी जाती है। इसके बाद उसका स्थानांतरण सुगम में हो जाता है तो वह हमेशा स्थानांतरण की पात्रता से बाहर हो जाता है। चाहे उसकी सेवा 20 से 25 साल बची हो। इस विसंगति से स्थानांतरण में सुगम-दुर्गम में बड़ी बाधा उत्पन्न हो रही है।
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विषंगति-तीन
लोनिवि में कुछ अभियंत्रण संवर्ग (विद्युत, यांत्रिक खंड) में कर्मचारियों की संख्या कम है। उनके सुगम-दुर्गम की पात्रता सूची दहाई के अंक तक भी नहीं पहुंचती है। इससे उनके स्थानांतरण एक या शून्य ही रह जाते हैं। कई वर्षों से इस संवर्ग में स्थानांतरण ही नहीं हो पाए हैं। ऐसे में सुगम वाले सुगम में मजे कर रहे हैं, दुर्गम वाले दुर्गम में ही पड़े हैं। एक्ट के हिसाब से आगे भी उनके ट्रांसफर की कोई संभावना नहीं है।
इन तमाम परिस्थितियों को देखते हुए हम एक्ट में सुधार की लड़ाई लड़ रहे हैं। विभाग में पात्रता सूची का शत-प्रतिशत या विभाग में कार्यरत कुल कार्मिकों का कम से कम 30 प्रतिशत स्थानांतरण सुनिश्चित किया जाना चाहिए। इसके अलावा एक्ट की धारा 7 घ में संशोधन बहुत जरूरी है। - छब्बील दास सैनी, प्रांतीय महामंत्री, उत्तराखंड डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ