आम आदमी के लिए अब 'घर' बनाना होगा नामुमकिम

अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 31 Jan 2014 01:07 PM IST
flats rate will increase in uttarakhand
आसमान छूती जमीनों की कीमतों के कारण उत्तराखंड में घर का सपना साकार करना बेहद मुश्किल है, लेकिन जल्द ही आम आदमी के लिए यह नामुमकिन हो सकता है।

बढ़ जाएगी किमत
नगर एवं ग्राम्य नियोजन विभाग का प्रस्ताव लागू हुआ तो जो फ्लैट अभी 20 से 25 लाख रुपए में मिल रहा है उसकी कीमत 80 लाख रुपए तक पहुंच जाएगी।

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प्रस्ताव कहता है कि पहले जितनी जमीन पर आठ फ्लैट बन जाते थे, अब उससे भी अधिक जमीन पर सिर्फ चार ही फ्लैट बनाए जाने चाहिए।

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प्रस्ताव के अनुसार बिल्डर अब 750 वर्ग मीटर भूमि पर केवल चार फ्लैट ही बना पाएगा। जबकि, मौजूदा नियम के अनुसार 300 वर्ग मीटर में आठ फ्लैट बन सकते हैं।

संशोधन या साजिश
बिल्डिंग बायलाज 2011 में संशोधन के प्रस्ताव को लेकर कई तरह की चर्चाएं हैं। सूत्रों का कहना है कि देहरादून, हरिद्वार सहित अन्य कई शहरों में बड़े बिल्डरों के पांच हजार से अधिक फ्लैट खाली पड़े हैं।

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इन फ्लैटों की कीमत 40 से 50 लाख रुपए के बीच होने के कारण खरीदार नहीं मिल रहे हैं। लेकिन, बायलाज में संशोधन हुआ तो फ्लैटों की कीमत बेतहाशा बढ़ेगी और यह फ्लैट हाथोंहाथ बिक जाएंगे। माना जा रहा है कि बड़े बिल्डरों के दबाव में ही यह प्रस्ताव तैयार किया गया है।

दो साल पहले समझ में नहीं आया
नगर एवं ग्राम्य नियोजन विभाग ने दो साल पहले ही बिल्डिंग बायलाज बनाया था। तमाम बिंदुओं की पड़ताल करने के बाद इसे अंतिम रूप दिया गया। ऐसे में सवाल यह है कि 2011 से 2013 के बीच ऐसा क्या बदला कि बायजाल में संशोधन करने की जरूरत पड़ गई।

ये है हाल
- 750 वर्ग मीटर भूमि पर बन पाएंगे सिर्फ चार फ्लैट
- 300 वर्ग मीटर भूमि पर अभी बनते हैं आठ फ्लैट
- 2 साल पहले ही तैयार हुआ था बिल्डिंग बायलाज

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नगर एवं ग्राम्य नियोजन विभाग का प्रस्ताव लागू हुआ तो आम आदमी का अपने घर का सपना कभी पूरा नहीं हो पाएगा। भूमि के हिसाब से फ्लैटों की संख्या घटेगी तो कीमत बढ़ना तय है।
- डीएस राणा, महासचिव उत्तरांचल इंजीनियर्स एवं

यह प्रस्ताव लोगों की सुविधा को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। कम भूमि पर ज्यादा फ्लैट से लोगों को ही परेशानी हो रही है। 300 वर्ग मीटर भूमि पर आठ के बजाए दस फ्लैट बनाए जा रहे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए क्षेत्रफल बढ़ाकर यूनिट संख्या कम करने का प्रस्ताव किया जा रहा है।
- एस पंत, मुख्य नगर नियोजक, नगर एवं ग्राम्य नियोजन विभाग

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