फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Fish fossils dating back 4.5 million years have been discovered in Mohand for the first time Uttarakhand news

Dehradun: पहली बार मोहंड में जलीय जीव के जीवाश्म मिला, वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान ने किया अध्ययन

Sat, 04 Apr 2026 03:44 PM IST
Renu Saklani विजेंद्र श्रीवास्तव, अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
विजेंद्र श्रीवास्तव, अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: Renu Saklani Updated Sat, 04 Apr 2026 03:44 PM IST
सार

पहली बार मोहंड में जलीय जीव के जीवाश्म मिले हैं। वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान ने इसका अध्ययन किया है।

विज्ञापन
Fish fossils dating back 4.5 million years have been discovered in Mohand for the first time Uttarakhand news
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

मोहंड में पहली बार 45 लाख वर्ष पुराने मछलियों के जीवाश्म मिले हैं। इसमें एक-दो नहीं बल्कि तीन अलग-अलग मछली की प्रजातियों के जीवाश्म हैं। वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिक के अनुसार इस क्षेत्र में पहली बार मछलियों के जीवाश्म मिले हैं।

विज्ञापन

 

मोहंड (सहरानपुर जिला) में वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान लंबे समय से अध्ययन कर रहा है। संस्थान के वैज्ञानिक निंगथौजम प्रेमजीत सिंह बताते हैं कि शिवालिक की पहाड़ियां जीवश्म की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है। यहां पर काफी समय से अध्ययन चल रहा है। अभी तक यहां पर जमीन के जानवरों के जीवाश्म मिलते थे। यहां पर अध्ययन के दौरान पहली बार 45 लाख साल पुराने मछलियों (जलीय जीव) के जीवाश्म (कान की हड्डी) मिले हैं।

विज्ञापन


इसमें एक सांप मछली है दूसरा ज्रेबा मछली या धारीदार और तीसरा गोबी परिवार की मछली है। इसमें ज्रेबा मछली (ट्राइकोगैस्टर फासियाटा) के मछली के जीवाश्म दूसरी बार रिपोर्ट हुआ है। इससे पहले संबधित मछली का जीवाश्म दुनिया में केवल एक बार ही इंडोनेशिया के सुमात्रा में रिपोर्ट हुआ था।

विज्ञापन
विज्ञापन

 

क्षेत्र में झील होने की संभावना

वैज्ञानिक प्रेमजीत सिंह बताते हैं कि जो मछलियां मिली है, वह ताजे पानी की मछलियां है। इससे यह संभावना हो सकती है कि मोहंड क्षेत्र में कभी ताजे पानी की झील- तालाब रहा होगा या फिर बहुत धीमी गति से बहने वाली नदी रही होगी। इसमें घनी वनस्पतियां रही होंगी। इस अध्ययन से पानी के पर्यावरण को समझने में मदद मिलेगी और आगे की खोज से ज्यादा रहस्य खुल सकते हैं।



ये भी पढे़ं...Uttarakhand: चुनावी मोर्चे पर अकेले पड़ गए कांग्रेस के कमांडर, नेताओं की खींचतान से घमासान, बनना पड़ रहा ढाल

 

इंडियन बुश रैट का जीवाश्म मिल चुका है

वैज्ञानिक प्रेमजीत सिंह कहते हैं कि इससे पहले मोहंड क्षेत्र में इंडियन बुश रैट के जीवाश्म मिले थे। जो वर्तमान में मिलने वाली प्रजाति से अलग है। इससे यह पता चलता है कि इस क्षेत्र में इंडियन बुश रैट की कई प्रजातियां थी।

 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed