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जंगलों में वन्य जीवों के साथ ही पहली बार होगी बाघों की गणना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोपेश्वर
Updated Thu, 25 Oct 2018 08:46 AM IST
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बाघ
- फोटो : social media
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उत्तराखंड के चमोली जिले के जंगलों में वन्य जीवों के साथ ही पहली बार बाघ (टाइगर) की गणना भी होगी। वन महकमे ने इसके लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं। बाघ की गणना चार चरणों में होगी।
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अभी तक वन विभाग मुख्य रूप से गुलदार, भालू, मोनाल, लंगूर, जंगली सूअर और भरल जैसे वन्य जीवों की ही गणना करता है, लेकिन वर्ष 2016 में केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग के केदारनाथ रेंज और चमोली के बेनीताल क्षेत्र में बाघ देखे जाने की बात सामने आई थी।
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बेनीताल क्षेत्र में ट्रैकरों ने वन विभाग के अधिकारियों से बाघ देखे जाने की बात कही थी, जबकि केदारनाथ क्षेत्र में विभाग की ओर से लगाए गए कैमरे में भी बाघ कैद हुआ था। इसके बाद से वन महकमा हरकत में आया। बाघ की गणना के लिए बीते सितंबर माह में केदारनाथ, बदरीनाथ और नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क के वन अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है।
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बदरीनाथ वन्य जीव प्रभाग के उप प्रभागीय वनाधिकारी एनएन पांडेय ने बताया कि पहली बार केदारनाथ, बदरीनाथ और नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क में बाघ की गणना शुरू होगी। इसके लिए खाका तैयार किया जा रहा है। सबसे पहले जंगल और आबादी क्षेत्रों में तालाब और चाल-खाल की गिनती की जाएगी। दूसरे चरण में जंगल में गोबर, पंजे के निशान, वन्य जीवों को मारने की प्रवृति से उस क्षेत्र में बाघ की मौजूदगी के साक्ष्य जुटाए जाएंगे।
तीसरे चरण में तालाब और चाल-खाल के इर्द-गिर्द कैमरे लगाए जाएंगे। चौथे चरण में कैमरों की जांच और चिह्नित वन क्षेत्र में बाघ विशेषज्ञों की ओर से सर्वे किया जाएगा। उन्होंने बताया कि बाघ करीब 500 हेक्टेयर वन क्षेत्र में ही विचरण करता है, लेकिन कभी-कभी शिकार के कारण वह अपना वास स्थल बदल देता है। वह ज्यादातर तालाब व चाल-खाल के आसपास अपना वास स्थल बना लेता है। लिहाजा इन जगहों पर खास नजर रखी जाएगी।