लापता हुए बेटे की तलाश में उत्तराखंड से ईरान पहुंचे पिता, मर्चेंट नेवी में बतौर ट्रेनी करता था काम
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ईरान के असालू बंदरगाह से लापता अपने बेटे आयुष की कोई खबर नहीं मिली, तो मजबूर पिता अनूप चौधरी ने खुद ही खाड़ी देश जाकर उसकी तलाश का बीड़ा उठाया है। रविवार को वे अपनी भतीजी के साथ दुबई के लिए रवाना हो गए।
एक महीने की वीजा अवधि के दौरान दुबई से लेकर ईरान के घटनास्थल तक पहुंचने का पिता ने पक्का इरादा किया है। खाड़ी देशों में सक्रिय प्रवासी उत्तराखंडियों कासंगठन इस कोशिश में उनके साथ खड़ा हुआ है। मूलरूप से कोटद्वार निवासी आयुष ने मर्चेंट नेवी में बतौर ट्रेनी इस वर्ष मई में काम शुरू किया था।
घर में तब से खुशी का माहौल था, लेकिन 17 जुलाई 2019 को दुबई की संबंधित शिप कंपनी से आई सूचना ने तूफान खड़ा कर दिया। सूचना आयुष के असालू बंदरगाह में समुद्र में गिरने से संबंधित थी, जिस पर परिजनों का यकीन नहीं है। विदेश मंत्रालय में इस मामले की लगातार पैरवी करने के बाद अब आयुष के पिता और ताऊ की बेटी शैली दुबई रवाना हो गई हैं।
नोएडा की प्लेसमेंट एजेंसी ने दिलाई थी नियुक्ति
मूल रूप से कोटद्वार निवासी आयुष का परिवार लंबे समय से नोएडा में रह रहा है। आयुष को नोएडा की एक प्लेसमेंट कंपनी ने दुबई की शिप कंपनी में नौकरी दिलाई थी। इसके बाद, उसे ईरान भेज दिया गया था। आयुष के ताऊ बिजेंद्र चौधरी के अनुसार, विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात कर उन्हें पूरी जानकारी दी गई है।
विदेश मंत्रालय अपने स्तर से प्रयास कर रहा है। इस बीच, लोकसभा में गढ़वाल सांसद तीरथ सिंह रावत के स्तर पर भी यह मामला उठाए जाने से विदेश मंत्रालय की सक्रियता बढ़ी है, लेकिन नतीजा फिलहाल कुछ नहीं निकला है। नोएडा पुलिस ने इस संबंध में प्लेसमेंट एजेंसी के संचालकों से भी पूछताछ शुरू की है।
प्रवासी उत्तराखंडी बोले-हम हर कदम में साथ हैं
खाड़ी देशों में प्रवासी उत्तराखंडी संगठन से जुडे़ रोशन रतूड़ी, मौला चांद समेत तमाम उत्तराखंडियों ने आयुष के प्रकरण पर एकजुटता दिखाई है। चौधरी के अनुसार, प्रवासी उत्तराखंडी हर संभव मदद कर रहे हैं।
उनके भरोसे पर ही आयुष के पिता और बहन वहां गए हैं। सबसे पहला प्रयास दुबई में मंत्रालय में जाकर स्थिति का पता करने की है। इसके बाद, ईरान के असालू बंदरगाह क्षेत्र में जाकर भी आयुष की तलाश की जाएगी।