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खेतों की सिंचाई के लिए दिन-रात कांधे पर फावड़े लेकर घूम रहे किसान
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धान की बुवाई के सीजन में विकासनगर क्षेत्र का किसान सिंचाई के पानी के लिए तरस गया है। कटापत्थर नहर में पानी की कमी के कारण किसानों को पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं मिल रहा है। किसान पानी के इंतजाम के लिए रात से लेकर दिन तक अपने कांधे पर फावड़ा लिए इस नहर से उस नहर मारा-मारा फिर रहा है।
धान की बुवाई का इस बार का सीजन क्षेत्र के किसानों के लिए मुसीबत बनकर आया है। जलविद्युत परियोजना के लिए व्यासी में बनाए गए बांध में यमुना का पानी रोक दिए जाने के कारण विकासनगर क्षेत्र के किसानों की लाइफ लाइन कटापत्थर नहर में पानी की क्षमता बेहद कम हो गई है। इसका असर पूरे क्षेत्र के किसानों पर पड़ रहा है। बताते चलें कि धान की बुवाई के लिए अधिक पानी की आवश्यकता होती है, लेकिन नहर में पानी नहीं होने से किसानों को पानी मयस्सर नहीं हो रहा है। ढ़करानी, हरिपुर व भीमावाला के किसान सुरेश कुमार, बनारसी, अमित कुमार, प्रमोद पाल, अजमेर चौधरी, चरण सिंह, हारून अली, उमराव सिंह, ओमप्रकाश पाल ने बताया कि रात के समय कटापत्थर नहर में व्यासी डैम से पानी छोड़ा जाता है। पानी को अपने खेतों तक लाने के लिए किसान रात नौ बजे से ही प्रयास शुरू कर देते हैं। लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद भी पानी खेतों तक नहीं पहुंच पाता है। उनका कहना है कि यदि इसी प्रकार की स्थिति रही तो इस बार धान की फसल में किसानों को बड़े पैमाने पर नुकसान उठाना पड़ेगा।
कटापत्थर नहर में नहीं बह रहा पर्याप्त मात्रा में पानी
क्षेत्र की कई हजार हेक्टेयर भूमि की सिंचाई के लिए कटापत्थर से बनाई गई नहर में आमतौर पर छह क्यूमैक पानी बहता आया था। लेकिन व्यासी बांध में पानी रोके जाने के बाद से पानी की क्षमता मात्र डेढ़ क्यूमैक रह गई है। पहले नहर 24 घंटे चलती थी लेकिन अब मात्र छह से आठ घंटे ही नहर को पानी मिल रहा है, जिसके कारण नहर से की जाने वाली सिंचाई की पूरी व्यवस्था चौपट होकर रह गई है।
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किसानों की सहायता को बनी हेल्पलाइन भी रही बेअसर
सिंचाई की समस्या को देखते हुए क्षेत्रीय विधायक मुन्ना सिंह चौहान के दिशा-निर्देशन में डाकपत्थर स्थित सिंचाई विभाग के कार्यालय में एक हेल्पलाइन की शुरूआत मई के महीने में की गई थी। हेल्पलाइन का मकसद सिंचाई संबंधी किसानों की शिकायतों पर कार्रवाई करना था, लेकिन हेल्पलाइन की स्थिति का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि शुरूआत के बाद से अभी तक हेल्पलाइन में मात्र चार शिकायतें ही किसानों ने की हैं। इसके अलावा इन चार शिकायतों पर भी सिंचाई विभाग कार्रवाई नहीं कर पाया है। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता आरएस गुंसाई का कहना है कि किसानों ने पानी की कमी की शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन नहर में पानी नहीं होने के कारण उनकी समस्या का समाधान नहीं किया जा सका।
किसानों ने कटापत्थर नहर के अतिरिक्त शक्ति नहर या फिर अन्य माध्यमों से पानी की व्यवस्था कराने के लिए प्रस्ताव रखा है, जिस पर विचार किया जा रहा है। सिंचाई विभाग, जलविद्युत निगम के अधिकारियों से चर्चा करके इस संबंध में किसानों के हित के लिए आवश्यक कदम उठाया जाएगा। - मुन्ना सिंह चौहान, विधायक विकासनगर।
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धान की बुवाई का इस बार का सीजन क्षेत्र के किसानों के लिए मुसीबत बनकर आया है। जलविद्युत परियोजना के लिए व्यासी में बनाए गए बांध में यमुना का पानी रोक दिए जाने के कारण विकासनगर क्षेत्र के किसानों की लाइफ लाइन कटापत्थर नहर में पानी की क्षमता बेहद कम हो गई है। इसका असर पूरे क्षेत्र के किसानों पर पड़ रहा है। बताते चलें कि धान की बुवाई के लिए अधिक पानी की आवश्यकता होती है, लेकिन नहर में पानी नहीं होने से किसानों को पानी मयस्सर नहीं हो रहा है। ढ़करानी, हरिपुर व भीमावाला के किसान सुरेश कुमार, बनारसी, अमित कुमार, प्रमोद पाल, अजमेर चौधरी, चरण सिंह, हारून अली, उमराव सिंह, ओमप्रकाश पाल ने बताया कि रात के समय कटापत्थर नहर में व्यासी डैम से पानी छोड़ा जाता है। पानी को अपने खेतों तक लाने के लिए किसान रात नौ बजे से ही प्रयास शुरू कर देते हैं। लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद भी पानी खेतों तक नहीं पहुंच पाता है। उनका कहना है कि यदि इसी प्रकार की स्थिति रही तो इस बार धान की फसल में किसानों को बड़े पैमाने पर नुकसान उठाना पड़ेगा।
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कटापत्थर नहर में नहीं बह रहा पर्याप्त मात्रा में पानी
क्षेत्र की कई हजार हेक्टेयर भूमि की सिंचाई के लिए कटापत्थर से बनाई गई नहर में आमतौर पर छह क्यूमैक पानी बहता आया था। लेकिन व्यासी बांध में पानी रोके जाने के बाद से पानी की क्षमता मात्र डेढ़ क्यूमैक रह गई है। पहले नहर 24 घंटे चलती थी लेकिन अब मात्र छह से आठ घंटे ही नहर को पानी मिल रहा है, जिसके कारण नहर से की जाने वाली सिंचाई की पूरी व्यवस्था चौपट होकर रह गई है।
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किसानों की सहायता को बनी हेल्पलाइन भी रही बेअसर
सिंचाई की समस्या को देखते हुए क्षेत्रीय विधायक मुन्ना सिंह चौहान के दिशा-निर्देशन में डाकपत्थर स्थित सिंचाई विभाग के कार्यालय में एक हेल्पलाइन की शुरूआत मई के महीने में की गई थी। हेल्पलाइन का मकसद सिंचाई संबंधी किसानों की शिकायतों पर कार्रवाई करना था, लेकिन हेल्पलाइन की स्थिति का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि शुरूआत के बाद से अभी तक हेल्पलाइन में मात्र चार शिकायतें ही किसानों ने की हैं। इसके अलावा इन चार शिकायतों पर भी सिंचाई विभाग कार्रवाई नहीं कर पाया है। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता आरएस गुंसाई का कहना है कि किसानों ने पानी की कमी की शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन नहर में पानी नहीं होने के कारण उनकी समस्या का समाधान नहीं किया जा सका।
किसानों ने कटापत्थर नहर के अतिरिक्त शक्ति नहर या फिर अन्य माध्यमों से पानी की व्यवस्था कराने के लिए प्रस्ताव रखा है, जिस पर विचार किया जा रहा है। सिंचाई विभाग, जलविद्युत निगम के अधिकारियों से चर्चा करके इस संबंध में किसानों के हित के लिए आवश्यक कदम उठाया जाएगा। - मुन्ना सिंह चौहान, विधायक विकासनगर।