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किसानों के खाते भी होंगे ऑनलाइन, तैयारियों में जुटा कोऑपरेटिव बैंक
धन सिंह बिष्ट/ अमर उजाला, रुद्रपुर
Updated Tue, 06 Dec 2016 11:30 AM IST
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किसान
- फोटो : amar ujala
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डिस्ट्रिक्ट कोऑपरेटिव बैंक (डीसीबी) से संचालित सहकारी समिति से जुड़े किसानों को भी अब ऑनलाइन बैंकिंग सुविधा का लाभ मिलेगा।
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इसके लिए बैंक ने जिलेभर की सहकारी समितियों को ऑनलाइन करने की तैयारियां शुरू कर दी हैं, नाबार्ड की योजना के प्रारंभिक चरण में रुद्रपुर की बगवाड़ा, गदरपुर सहकारी समिति का चयन किया गया है। समितियों के ऑनलाइन होने से जिले के 65 हजार किसान लाभान्वित होंगे।
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ऊधमसिंह नगर जिले में डीसीबी से संचालित होने वाली 35 सहकारी समितियों में 65 हजार किसान खाताधारक हैं जो सीजन के समय कटाई, बुआई के लिए समितियों से लोन लेते हैं, लेकिन समितियों के ऑफलाइन मोड में काम करने से किसान खाताधारकों को एटीएम, चेक बुक की सुविधा नहीं मिलती।
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जिससे किसान अन्य बैंकों से लेनदेन नहीं कर पाते, नोटबंदी के बाद यही सबसे बड़ी वजह बनी कि किसान समितियों में खुले अपने खातों में जमा रकम का भी उपयोग नहीं कर सके, लेकिन अब इस तरह की दिक्कतों से किसानों को जल्द राहत मिलने के आसार हैं, नाबार्ड की योजना के तहत डीसीबी जिलेभर की सभी सहकारी समितियों को ऑनलाइन करने की तैयारियों में जुट गया है। समितियों के ऑनलाइन होने से खाताधारक किसानों को एटीएम, चेकबुक की सुविधा मिलेगी, जिनसे वह अन्य बैंकों और उनके एटीएम से भी लेनदेन सुचारु कर सकते हैं।
समितियों को ऑनलाइन करने के पहले चरण में ट्रायल के लिए रुद्रपुर की बगवाड़ा, गदरपुर सहकारी समिति का चयन कर सॉफ्टवेयर लोड किया जा रहा है। सफलता मिलने पर 30 दिसंबर तक जिले की सभी सहकारी समितियों को ऑनलाइन करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसके बाद किसानों को समितियों से एटीएम कार्ड, मल्टीसिटी चेकबुक की सुविधा मिलेगी।
- सुभाष बेहड़ चेयरमैन , डिस्ट्रिक्ट कोऑपरेटिव बैंक
समय पर होता काम तो लोन चुका लेते किसान
नाबार्ड द्वारा सहकारी समितियों को ऑनलाइन करने की योजना पर अगर समय रहते काम हो गया होता तो किसान नोटबंदी के बाद भी सहकारी समितियों से लिए गए लोन को समय पर चुका सकते थे, सूत्रों के अनुसार एक माह पहले ही नाबार्ड ने उक्त योजना के लिए बैंकों को निर्देशित कर दिया था लेकिन योजना के क्रियान्वयन के लिए एजेंसी का चयन न होने पर देरी हो गई। जिले की 35 सहकारी समितियों से 65 हजार किसानों को 360 करोड़ का लोन दिलाया गया है, जिसमें से नोटबंदी से पहले मात्र 90 करोड़ की ही वसूली हो सकी है। नोटबंदी के चलते बाकी की वसूली पर विराम लग गया, जिसका खामियाजा बैंक के साथ ही किसान भी भुगत रहे हैं।
लोन चुकाने में भी मिलेगी मदद
केंद्र सरकार द्वारा लिए गए नोटबंदी के फैसले से सबसे अधिक असर देश के किसानों को पड़ा। नोटबंदी के बाद सरकार द्वारा सहकारी बैंकों में पुरानी करेंसी न लेने का आदेश जारी करने के बाद न ही किसान सहकारी समितियों में जमा अपनी रकम को निकाल पाए और न ही लोन की अदायगी कर पाए, लेकिन अगर जल्द ही सहकारी समितियां ऑनलाइन हो गईं तो किसान एटीएम, मल्टीसिटी चेकबुक को अन्य बैंकों में इस्तेमाल कर कर्ज की रकम को समितियों में जमा कर सकते हैं।