बैंक में लगाया 25 करोड़ का डिमांड ड्राफ्ट, हकीकत सामने आई तो सकते में आए अधिकारी और पुलिस
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कुछ लोगों ने बैंक में 25 करोड़ रुपए का डिमांड ड्राफ्ट लगाया लेकिन जब इसकी हकीकत सामने आई तो बैंक अधिकारी ही नहीं पुलिस के भी होश उड़ गए। बैंक में फर्जी डिमांड ड्राफ्ट लगाने के मामले में पुलिस ने गिरोह के सरगना की तलाश में दिल्ली में ताबड़तोड़ दबिश दी।
पुलिस उस संस्था के कार्यालय भी पहुंची, जिसके नाम से ये लोग चेक कैश कराने आए थे। यहां पता चला कि संस्था का पंजीकरण दो साल पहले रद्द हो चुका है। गिरोह में संस्था से जुड़ी एक महिला समेत कई ओर अन्य लोगों के भी शामिल होने की बात सामने आई है। पुलिस पूरे प्रकरण की गंभीरता से जांच कर रही है।
गंगनहर कोतवाली क्षेत्र स्थित आईसीआईसीआई बैंक में दस अक्तूबर को आवास विकास कॉलोनी निवासी राजेंद्र त्यागी के साथ तीन लोग आए थे। तीनों ने बैंक में 25 करोड़ का डीडी लगाने के लिए दिया था।
शक होने पर बैंक प्रबंधक गौरव श्रीवास्तव ने डीडी की जांच कराई तो वह फर्जी निकला। आरोपी दिल्ली की एक संस्था के नाम से पांच करोड़ का चेक भी कैश कराने आए थे। बैंक अधिकारियों ने राजेंद्र त्यागी को मौके पर ही पकड़कर पुलिस को सौंप दिया था, जबकि दो फरार हो गए थे।
पुलिस ने तीन लोगों पर मुकदमा दर्ज कर राजेंद्र को जेल भेज दिया था। इसके बाद पुलिस ने विपिन यादव निवासी बेतिया, जिला पश्चिमी चंपारण, बिहार और नीटू निवासी शंकरपुरी ब्रह्मपुरी कोतवाली रुड़की समेत पांच और लोगों को जेल भेजा था।
पुलिस को पता चला था कि इस काम का मास्टर माइंड दिल्ली निवासी विजय है। तभी से पुलिस उसकी तलाश कर रही थी। दो दिन पूर्व पुलिस विजय की तलाश में दिल्ली पहुंची और ताबड़तोड़ छापा मारा, लेकिन उसका कुछ पता नहीं चला।
एसपी देहात मणिकांत मिश्र ने बताया कि पुलिस दिल्ली स्थित साकेत में स्थित संस्था के कार्यालय पहुंची तो पता चला कि संस्था का दो साल पहले रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया गया था। ये लोग तभी से संस्था के नाम से फर्जी काम करते आ रहे हैं। एसपी देहात ने बताया कि इस गिरोह में संस्था से जुड़ी एक महिला समेत कई अन्य लोग भी शामिल हैं। जल्द सभी की गिरफ्तारी की जाएगी।