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एक्सक्लूसिव : मुर्दा बदमाशों को फाइलों से ‘आजाद’ करेगी उत्तराखंड पुलिस

Thu, 28 Nov 2019 03:23 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal राकेश शर्मा, अमर उजाला, देहरादून
राकेश शर्मा, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Thu, 28 Nov 2019 03:23 PM IST
सार

  • रिकॉर्ड में अब भी जिंदा है सालों पहले मर चुके अपराधी, दस साल बाद सत्यापन अभियान शुरू
  • देहरादून जिले के 18 गैंगों के करीब 30 बदमाशों की हो चुकी मौत

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Exclusive: Uttarakhand police will cut the name of died accused
प्रतीकात्मक तस्वीर

विस्तार

कई बरस पहले मर चुके बदमाश आज भी पुलिस रिकार्ड में जिंदा हैं। दस साल बाद पुलिस ने प्रदेशभर में सूचीबद्ध गैंगों का सत्यापन शुरू किया है, जिनमें कई चौंकाने वाली जानकारी सामने आ रही हैं।

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उत्तराखंड बनने से पहले यूपी के समय सूचीबद्ध गैंग अब भी पुलिस की फाइलों में चल रहे हैं। भले ही 19 साल में गैंग की कोई गतिविधि सामने नहीं आई है। अकेले देहरादून जिले में सूचीबद्ध 18 गैंगाें के करीब 30 बदमाशों की मौत हो चुकी है।
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पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था अशोक कुमार के निर्देश पर प्रदेशभर में सूचीबद्ध गैंगाें के सत्यापन और नए गैंगाें को सूचीबद्ध करने के अभियान के दौरान इस तरह के चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। सूत्राें की मानें तो करीब दस साल बाद गैंगाें की स्थिति का आंकलन करने पुलिस सड़कों पर उतरी है। देहरादून में अभियान की कमान एसपी सिटी श्वेता चौबे के हाथों में है।
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सूत्राें के मुताबिक देहरादून जिले में सबसे ज्यादा 18 गैंग बताए गए हैं। 1992 का रमेश उर्फ छोटू गैंग और 1995 का नरेश कुमार उर्फ मुन्ना गैंग अब भी रिकार्ड में चल रहा है। जबकि, मुन्ना गैंग के छह में से तीन बदमाशों की मौत हो चुकी है और बाकी तीन जिंदगी के आखिरी दिन गिन रहे हैं।

नौ साल से कोई गैंग नहीं हुआ चिह्नित

ऐसे ही स्थिति 1998 में सूचीबद्ध हुए जितेन्द्र पाल उर्फ जेपी गैंग, जुगल किशोर गैंग, रवि थापा गैंग और गैंगाराम गैंग की है। इन गैंग के छह बदमाशों की मौत हो चुकी है, जबकि अन्य शांत चल रहे हैं। 

देहरादून के विपरीत हरिद्वार में कई ऐसे गैंग एक्टिव हैं, जो यदा-कदा कानून व्यवस्था के लिए चुनौती बनते हैं। इनमें सुनील राठी, संजीव माहेश्वरी उर्फ जीवा, नाजिम और प्रवीण वाल्मीकि गैंग का नाम सुर्खियों में है। ये गैंग हरिद्वार से लेकर देहरादून तक अपना नेटवर्क रखते हैं। हरिद्वार में भी बरसों पुराने कई गैंग पुलिस रिकार्ड में चल रहे हैं, लेकिन काफी समय से उनकी गतिविधि भी सामने नहीं आई है।  
देहरादून जिले में करीब नौ साल से कोई नया गैंग सूचीबद्ध नहीं हो पाया है। 2010 में जाहिद हुसैन, राम सिंह और मोहम्मद मिंटू के गैंग को सूचीबद्ध किया गया था। इनके बाद से कोई गैंग पुलिस की नजरों में नहीं आया। हालांकि इस अवधि में चेन लूट, चोरी, टप्पेबाजी आदि अपराधों में कई गैंग सामने आए, जिनकी करतूताें की वजह से जन सामान्य में असुरक्षा का माहौल बना।

प्रदेश भर में सूचीबद्ध गैंगाें के सत्यापन का अभियान शुरू किया गया है, ताकि यह साफ हो सके कि कौन-कौन से गैंग सक्रिय हैं और कौन-कौन शांत है। काफी बदमाशों की मौत हो चुकी है। पुलिस को निर्देश दिए गए हैं कि लंबे समय से शांत गैंगाें की फाइल बंद करने के साथ नए सक्रिय गैंगाें को सूचीबद्ध किया जाए। 
- अशोक कुमार, पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था

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