फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Exclusive News Forest panchayats will be empowered in Uttarakhand Now

Exclusive: उत्तराखंड में सशक्त होंगी वन पंचायतें, अब मिलेगा चालान काटने का अधिकार, प्रस्ताव शासन को भेजा

Tue, 08 Aug 2023 07:10 PM IST
अलका त्यागी विनोद मुसान, अमर उजाला, देहरादून
विनोद मुसान, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Tue, 08 Aug 2023 07:10 PM IST
सार

इस संबंध में वन विभाग की ओर से प्रस्ताव तैयार कर शासन को सौंप दिया गया है। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में इस पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। 

विज्ञापन
Exclusive News Forest panchayats will be empowered in Uttarakhand Now
प्रस्ताव शासन को भेजा - फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर

विस्तार

प्रदेश में 11,220 वन पंचायतों को और सशक्त बनाने की तैयारी है। इसके लिए उन्हें छोटे-मोटे वन अपराधों में वन दरोगा की तरह चालन काटने से लेकर वनोपज के संंबंध में निर्णय लेने जैसे अधिकार दिए जाएंगे।

विज्ञापन


इस संबंध में वन विभाग की ओर से प्रस्ताव तैयार कर शासन को सौंप दिया गया है। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में इस पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। प्रदेश में 453166.55 वर्ग किमी वन भूमि वन पंचायतों के अधीन है। जिसका पूरा रखरखाव वन पंचायतों से संबंधित प्रबंधन समितियां करती हैं। उत्तराखंड देश में अकेला ऐसा राज्य है, जहां वन पंचायतों का गठन किया गया है।
विज्ञापन


ब्रिटिशकाल में ही वर्ष 1815 उत्तर प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों (अब उत्तराखंड) में अंग्रेजों के शासन में यह व्यवस्था शुरू हुई थी। तब से लेकर उत्तराखंड राज्य गठन तक इसमें 14 बार महत्वपूर्ण बदलाव किए गए। अब उत्तराखंड गठन के बाद से इसमें तीसरी बार संशोधन की तैयारी है। इस संबंध में पूर्व में मुख्य सचिव डॉ. एसएस संधु की ओर से निर्देश जारी किए गए थे।
विज्ञापन
विज्ञापन


उत्तराखंड में बारिश का कहर: पहाड़ से मैदान तक बरसी आफत, कई लोग बहे, भवन हुए ध्वस्त, तबाही बयां करती तस्वीरें

मुख्य वन संरक्षक, वन पंचायत एवं सामुदायिक वानिकी डॉ. पराग मधुकर धकाते ने बताया, उत्तराखंड पंचायती वन नियमावली 2012 में संशोधन के बाद प्रबंधन समितियां एक गवर्निंग बॉडी की तरह काम करेंगी। इसमें उन्हें छोटे वन अपराधों में चालान करने, वन क्षेत्र में कूड़ा-कचरा फेंकने में कार्रवाई, लीसा, शिलाजीत, कीड़ाजड़ी, चीड़ गुलिया और अन्य गैर प्रकाष्ठ वन उपज की बिक्री और प्रबंधन के अधिकार दिए जा सकते हैं। कई ऐसे मामले प्रबंधन समिति के सुपुर्द कर दिए जाएंगे, जिनके लिए अभी तक डीएफओ स्तर के अधिकारी की अनुमति लेनी पड़ती है।

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में होगी बैठक

प्रमुख वन संरक्षक वन पंचायत डॉ. धनजंय मोहन ने नियमावली में संशोधन करने की पुष्टि की है। बताया, इस संबंध में शीघ्र ही मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बैठक होनी है, जिसमें अंतिम निर्णय लिया जाएगा। बताया, वन पंचायतों को समय की जरूरत के अनुसार और सशक्त बनाने के लिए संशोधन प्रक्रिया को अपनाया जा रहा है।


प्रदेश में वन पंचायतों की स्थिति

मंडल      संख्या      क्षेत्रफल (वर्ग किमी)
गढ़वाल    5,329     245372.59
कुमाऊं    5,891      207793.96
कुल        11220     453166.55

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed