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Dehradun News: होली पर अत्यधिक तला-भुना खाना कर सकता है नुकसान, रखें ध्यान
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विकासनगर। होली के दिन घरों में मिठाई और तेल से बने पकवानों का जमकर सेवन किया जाता है। जरूरत से अधिक तला-भुना चीख खाने से पेट में भारीपन, एसिडिटी और दर्द जैसी शिकायत होने लगती है। समय पर उपाय न करने पर उल्टी और दस्त की समस्या हो सकती है। वहीं, रंगों में मौजूद केमिकल कई बार खाने के साथ शरीर के भीतर पहुंच जाते हैं। इससे फूड प्वाइजनिंग हो सकती है। कुछ घरेलू उपाय से अधिक भोजन के सेवन के बाद होने वाली समस्या से बचा जा सकती है।
उप जिला अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विजय सिंह का कहना है कि मौसम में बदलाव शुरू हो गया। सर्दियों में शरीर में कैलोरी की मांग बढ़ने पर लोग अधिक भोजन करते हैं, लेकिन गर्मी में हल्का और संतुलित भोजन ही करना चाहिए। होली पर घर में बाहर से गुजिया, मठरी, मटर, शक्कर पारा, नमक पारा, नमकीन, गोलगप्पे आदि खरीद कर लाए जाते हैं। कुछ लोग घर पर ही मिठाइयां और नमकीन तैयार करते हैं। इसके अलावा पूड़ी, पनीर, छोले आदि गरिष्ठ पकवानों का भी सेवन करते हैं। इससे पाचन तंत्र पर दबाव बढ़ता है और पाचन क्रिया धीमी हो जाती है। लोगों को एसिडिटी, पेट में मरोड़, दर्द और कब्ज की शिकायत होने लगती है।
डॉ. विजय सिंह ने बताया कि सिथेटिक रंगों में कॉपर सल्फेट, मरकरी सल्फाइट, लेड ऑक्साइड, प्यूशियन ब्लू, एल्युमिनियम ब्रोमाइड आदि केमिकल होते हैं। ऐसे में होली खेलकर अच्छी तरह हाथ को धोकर ही कोई भी खाद्य पदार्थ का सेवन करना चाहिए। अगर रंगों वाले हाथ से खाद्य पदार्थ का सेवन करते हैं तो केमिकल शरीर के भीतर जाने से फूड प्वाइजनिंग हो सकती है। इसमें बार-बार उल्टी, दस्त और पेट में तेज दर्द की शिकायत हो सकती है। इस स्थिति में सीधा चिकित्सक के पास उपचार करवाएं। शरीर में पानी और खनिज की कमी स्थिति में मरीज को अस्पताल में भर्ती भी करना पड़ता है।
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कैसे करें बचाव
- हल्का और सुपाच्य भोजन करें
- पानी अधिक से अधिक पीएं
- तली-भुनी चीजाें का सेवन कम करें
- भोजन करने के बाद सीधा न सोएं
- हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोने के बाद ही भोजन करें
समस्या होने पर क्या करें
- दही का सेवन करें
- केले का सेवन करें
- अदरक को छील कर चूसे
- गर्म पानी के साथ भुना हुआ जीरा, अजवाइन, मेथी और काले नमक का मिश्रण की फंकी लें
- जलजीरा का सेवन भी फायदेमंद होता है।
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उप जिला अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विजय सिंह का कहना है कि मौसम में बदलाव शुरू हो गया। सर्दियों में शरीर में कैलोरी की मांग बढ़ने पर लोग अधिक भोजन करते हैं, लेकिन गर्मी में हल्का और संतुलित भोजन ही करना चाहिए। होली पर घर में बाहर से गुजिया, मठरी, मटर, शक्कर पारा, नमक पारा, नमकीन, गोलगप्पे आदि खरीद कर लाए जाते हैं। कुछ लोग घर पर ही मिठाइयां और नमकीन तैयार करते हैं। इसके अलावा पूड़ी, पनीर, छोले आदि गरिष्ठ पकवानों का भी सेवन करते हैं। इससे पाचन तंत्र पर दबाव बढ़ता है और पाचन क्रिया धीमी हो जाती है। लोगों को एसिडिटी, पेट में मरोड़, दर्द और कब्ज की शिकायत होने लगती है।
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डॉ. विजय सिंह ने बताया कि सिथेटिक रंगों में कॉपर सल्फेट, मरकरी सल्फाइट, लेड ऑक्साइड, प्यूशियन ब्लू, एल्युमिनियम ब्रोमाइड आदि केमिकल होते हैं। ऐसे में होली खेलकर अच्छी तरह हाथ को धोकर ही कोई भी खाद्य पदार्थ का सेवन करना चाहिए। अगर रंगों वाले हाथ से खाद्य पदार्थ का सेवन करते हैं तो केमिकल शरीर के भीतर जाने से फूड प्वाइजनिंग हो सकती है। इसमें बार-बार उल्टी, दस्त और पेट में तेज दर्द की शिकायत हो सकती है। इस स्थिति में सीधा चिकित्सक के पास उपचार करवाएं। शरीर में पानी और खनिज की कमी स्थिति में मरीज को अस्पताल में भर्ती भी करना पड़ता है।
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कैसे करें बचाव
- हल्का और सुपाच्य भोजन करें
- पानी अधिक से अधिक पीएं
- तली-भुनी चीजाें का सेवन कम करें
- भोजन करने के बाद सीधा न सोएं
- हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोने के बाद ही भोजन करें
समस्या होने पर क्या करें
- दही का सेवन करें
- केले का सेवन करें
- अदरक को छील कर चूसे
- गर्म पानी के साथ भुना हुआ जीरा, अजवाइन, मेथी और काले नमक का मिश्रण की फंकी लें
- जलजीरा का सेवन भी फायदेमंद होता है।