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भारतीय परंपराओं को सहेजना सभी का दायित्व
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भारतीय परंपराओं को सहेज कर रखने का दायित्व केवल ब्राह्मणों का नहीं, बल्कि सभी वर्गों का है। ब्राह्मण समाज महासंघ के द्वितीय स्थापना दिवस पर महंत किशनगिरी महाराज ने कहा कि संकल्प, पूजा, पद्धति अलग-अलग हो सकती हैं, लेकिन गंतव्य सभी का एक सा है।
बृहस्पतिवार को टपकेश्वर महादेव मंदिर परिसर में आयोजित ब्राह्मण समाज महासंघ के द्वितीय स्थापना दिवस पर अनंत विभूषित महंत किशनगिरी महाराज ने कहा कि आज युवा पीढ़ी को संस्कारवान बनाने की आवश्यकता है। ब्राह्मणों को इस दिशा में ज्यादा सक्रिय होने की जरूरत है। साथ ही मंथन करने की भी जरूरत है। भागवताचार्य पं. सुभाष चन्द्र जोशी ने कहा कि कर्म में आचरण की श्रेष्ठता प्रमुख होनी चाहिए। ब्राह्मण ने अपनी पहचान खो दी है, वह शिखा, सूत्र, सन्दल (तिलक), शस्त्र व शास्त्र से दूर हो गया है। अपने गणवेश छोड़ चुका है। हमें अपनी पहचान को अपनाना ही होगा।
वहीं, आचार्य पवन कुमार शास्त्री ने कहा कि ब्राह्मण सदैव दूसरों के लिए जीता है। इस मौके पर महासंघ के मुख्य संयोजक ओपी वशिष्ठ, पंडित उदयशंकर भट्ट, अरुण कुमार शर्मा, सोमदत्त शर्मा मौजूद रहे।
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बृहस्पतिवार को टपकेश्वर महादेव मंदिर परिसर में आयोजित ब्राह्मण समाज महासंघ के द्वितीय स्थापना दिवस पर अनंत विभूषित महंत किशनगिरी महाराज ने कहा कि आज युवा पीढ़ी को संस्कारवान बनाने की आवश्यकता है। ब्राह्मणों को इस दिशा में ज्यादा सक्रिय होने की जरूरत है। साथ ही मंथन करने की भी जरूरत है। भागवताचार्य पं. सुभाष चन्द्र जोशी ने कहा कि कर्म में आचरण की श्रेष्ठता प्रमुख होनी चाहिए। ब्राह्मण ने अपनी पहचान खो दी है, वह शिखा, सूत्र, सन्दल (तिलक), शस्त्र व शास्त्र से दूर हो गया है। अपने गणवेश छोड़ चुका है। हमें अपनी पहचान को अपनाना ही होगा।
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वहीं, आचार्य पवन कुमार शास्त्री ने कहा कि ब्राह्मण सदैव दूसरों के लिए जीता है। इस मौके पर महासंघ के मुख्य संयोजक ओपी वशिष्ठ, पंडित उदयशंकर भट्ट, अरुण कुमार शर्मा, सोमदत्त शर्मा मौजूद रहे।
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