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जड़ी-बूटी निर्यात बढ़ाने को जर्मनी देगा सौ करोड़

Tue, 28 Mar 2017 11:05 AM IST
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 28 Mar 2017 11:05 AM IST
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Enhancing herbs Germany will give 100 crore
herb - फोटो : file photo

उत्तराखंड में जड़ी-बूटियों की गुणवत्ता सुधारने और विश्व बाजार में इनका निर्यात बढ़ाने के लिए जर्मनी सौ करोड़ रुपये देगा।

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यह धनराशि तकनीकी सहयोग के लिए प्रदान की जाएगी। पश्चिमी हिमालय क्षेत्र में जड़ी-बूटियां प्रचुर मात्रा में हैं, लेकिन गुणवत्ता की वजह से निर्यात उतना नहीं बढ़ पा रहा है जितना होना चाहिए। जड़ी-बूटियों का निर्यात बढ़ने से पर्वतीय क्षेत्रों में जहां कारोबार बढ़ेगा, वहीं पलायन जैसी ज्वलंत समस्या पर भी अंकुश लगेगा।
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जर्मन एजेंसी जीआईजेड के सौ करोड़ के इस तकनीकी सहयोग वाले प्रोजेक्ट का उत्तराखंड के साथ हिमाचल प्रदेश को भी लाभ मिलेगा। इस संबंध में बुधवार को दिल्ली में महानिदेशक वन एवं पर्यावरण डा. एसएस नेगी की अध्यक्षता में बैठक बुलाई है। इसमें प्रोजेक्ट के विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की जाएगी। गुणवत्ता ठीक न होने से प्रदेश के अलावा हिमाचल प्रदेश में भी जड़ी-बूटियों का निर्यात बाधित हो रहा है। जबकि इस समय विश्व बाजार में सबसे अधिक मांग हिमालयी जड़ी-बूटियों की है। 
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ब्रिटेन, फ्रांस, इटली आदि देशों की एजेंसियां हिमालयी जड़ी-बूटियों के संबंध में खोज करा रही हैं। जीआईजेड का तकनीकी सहयोग मिलने पर राज्यों को जड़ी-बूटियों के कारोबार में बहुत फायदा होगा। उत्तराखंड में जड़ी-बूटी केंद्र का निर्माण जापान इंटरनेशनल कोआपरेशन एजेंसी (जायका) के माध्यम से कराया जा रहा है। सहस्त्रधारा रोड स्थित आईटी पार्क में जायका से मिले शुरुआती 16 करोड़ के बजट से जड़ी-बूटी केंद्र का कार्य शुरू हुआ है। जर्मन एजेंसी जीआईजेड के फंड से यहां इंफ्रास्ट्रक्चर और तकनीकी सिस्टम तैयार किया जाएगा। 

पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में जड़ी-बूटियों की गुणवत्ता में सुधार आएगा तो निश्चित रूप से निर्यात बढ़ेगा। साथ ही रोजगार बढ़ने से पहाड़ों से पलायन भी रुकेगा। तकनीकी सहयोग के लिए जीआईजेड से सौ करोड़ की सहायता प्रस्तावित है। इस संबंध में बुधवार को बैठक बुलाई गई है।
- डा. एसएस नेगी, महानिदेशक वन एवं पर्यावरण, केंद्र सरकार

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