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इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट बिल के विरोध में उतरे इंजीनियर
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
Updated Sun, 24 Apr 2016 03:10 AM IST
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इंजीनियरों ने हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी है।
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ऑल इंडिया पॉवर इंजीनियर्स फेडरेशन (एआइपीईएफ) ने इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट बिल-2014 लागू करने के विरोध में आंदोलन का निर्णय लिया है। चेतावनी दी कि बिजली इंजीनियरों की सहमति के खिलाफ बिल पास कराने की कोशिश हुई तो देशभर के 80 हजार से अधिक इंजीनियर हड़ताल पर चले जाएंगे।
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शनिवार को हरिद्वार बाईपास स्थित एक होटल में आयोजित फेडरेशन की राष्ट्रीय काउंसिल की बैठक में इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट बिल-2014 का पुरजोर विरोध हुआ। एआइपीईएफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शैलेंद्र दुबे ने कहा कि यह बिल बिजली बोर्डों का निजीकरण कर देगा। निजी कंपनियां सिर्फ लाभ वाले क्षेत्रों में ही बिजली पहुंचाने पर जोर देंगी।
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गुजरात समेत 17 राज्य कर रहे विरोध
स्टैंडिंग कमेटी के समक्ष गुजरात समेत 17 राज्यों ने इस बिल का विरोध किया है। उन्होंने बताया कि केंद्रीय ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल से इस मामले में वार्ता हुई है। फेडरेशन के महासचिव कार्तिकेय दूबे ने बताया कि राज्यों के लिए इसे लागू करना अनिवार्य नहीं होना चाहिए।
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साथ ही जो भी बिजली वितरण करे, वह समान रूप से हर क्षेत्र को बिजली दे। उन्होंने कहा कि दरअसल, हर राज्य की अपनी-अपनी भौगोलिक और आर्थिक परिस्थितियां रहती हैं। इसलिए बिजली की नीति राज्यों को तय करनी चाहिए।
बैठक में 18 राज्यों के फेडरेशन प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बैठक में फेडरेशन के राष्ट्रीय महासचिव पी रत्नाकर राव, संरक्षक के अशोक राव, उत्तरांचल पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष जेएमएस रौथाण, महासचिव कार्तिकेय दुबे, बलवंत सिंह आदि मौजूद रहे।