कोटद्वार: हाईवे पर बने मंदिर को प्रशासन ने जेसीबी से ढहाया, हिंदू संगठनों ने जताया विरोध
- सुकई में मंदिर तोड़ने का ग्रामीणों ने किया विरोध, बैरंग लौटा प्रशासन
- सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 20 मार्च तक थलीसैंण तहसील क्षेत्र में नेशनल हाईवे पर टूटने हैं सात मंदिर
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उत्तराखंड के कोटद्वार में एसडीएम थलीसैंण की अगुवाई में प्रशासन की टीम ने शुक्रवार को बुआखाल-काशीपुर हाईवे पर जिवई में स्थित राम मंदिर को जेसीबी से ढहा दिया। मंदिर तोड़ने की कार्रवाई पर हिंदूवादी संगठनों और स्थानीय लोगों में प्रशासन के खिलाफ रोष व्याप्त है। सुकई में ग्रामीणों के भारी विरोध के बाद मंदिर तोड़ने के लिए पहुंची प्रशासन की टीम को बैरंग लौटना पड़ा।
शुक्रवार को उपजिलाधिकारी थलीसैण अरविंद बिष्ट पुलिस फोर्स के साथ बुआखाल-काशीपुर एनएच-309 पर जिवई स्थित राम मंदिर पहुंचे। टीम ने जेसीबी की मदद से राम मंदिर को ध्वस्त कर दिया। उपजिलाधिकारी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2009 में सार्वजनिक स्थानों पर बने धार्मिक ढांचों को हटाने के आदेश दिए थे, लेकिन, 11 साल बाद भी कार्रवाई लटकी रही।
सुप्रीम कोर्ट ने पुन: मामले का संज्ञान लेते हुए सरकार से इस आदेश पर हुई कार्रवाई के संबंध में पूछा था। मामले में प्रदेश सरकार ने धार्मिक ढांचों को हटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट से एक साल का समय देने की अपील की थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में प्रदेश सरकार को 20 मार्च तक सार्वजनिक स्थानों पर बने ढांचों को हर हाल में हटाने के आदेश दिए हैं।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन के क्रम में एनएच से धार्मिक ढांचे हटाए जा रहे हैं। बताया कि सलोनधार स्थित सिद्धपीठ कालभैरव मंदिर, दीबा मंदिर सहित कुल सात मंदिर टूटने हैं। इसके तहत जिवई स्थित राम मंदिर को ध्वस्त किया गया है।
सुकुई स्थित रामेश्वर मंदिर को तोड़ने गई प्रशासन की टीम को स्थानीय ग्रामीणों के विरोध का सामना करना पड़ा। ग्रामीणों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए इसे हिंदू धर्म के लोगों की आस्था पर कुठाराघात बताया।
ग्रामीण हर हाल में मंदिर नहीं तोड़ने देने की बात पर अड़े रहे। उपजिलाधिकारी ने ग्रामीणों को समझाने का बहुत प्रयास किया, लेकिन वे नहीं माने। ग्रामीणों ने कहा कि प्रशासन जब तक दूसरा मंदिर बनाकर नहीं दे देता, वे मंदिरों को नहीं तोड़ने देंगे। लोग मंदिर के आगे जमे रहे।
ग्रामीणों ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सरकार के खिलाफ रोष व्यक्त किया। विरोध करने वालों में सुकई की प्रधान धनेश्वरी देवी, महिला मंगल दल अध्यक्षा लीला देवी, उप प्रधान बिमला देवी, चंपा देवी, मंजू देवी, अमरीश सिंह, बालकृष्ण, सुनील सिंह समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल रहे।