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आपातकाल: नहीं भरे उस काली रात के घाव, जेल में कट गया था हाथ, आज भी पेंशन के लिए तरस रहा परिवार

Wed, 26 Jun 2019 08:35 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कर्णप्रयाग
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कर्णप्रयाग Published by: अलका त्यागी Updated Wed, 26 Jun 2019 08:35 AM IST
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Emergency 1975 This fighterman family Craving for pension till now 
- फोटो : फाइल फोटो

इमरजेंसी के दौरान जेल में बंद रहे विद्यादत्त तिवारी के परिवार को आज तक पेंशन नहीं मिल पाई है। बुजुर्ग बताते हैं कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश में इमरजेंसी लगाकर हाहाकार मचा दिया था।

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चमोली जिले के कई लोग इमरजेंसी के दौर में जेलों में बंद रहे। भारत के लोकतंत्र में 25 जून 1975 के दिन को याद कर आज भी पहाड़ के लोग सिहर उठते हैं। बहुगुणा विचार मंच के गढ़वाल/कुमाऊं संयोजक हरीश पुजारी आपातकाल को याद करते हुए बताते हैं कि भारत की आजादी के बाद जब देश गरीबी और भुखमरी के दौर से गुजर रहा था, तो राष्ट्रपिता महात्मा गांधी गांवों का विकास करके भारत को आगे बढ़ाना चाहते थे। 

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जबकि पंडित जवाहर लाल नेहरू उद्योगों को तवज्जो देने के पक्ष में थे और वे औद्योगिक क्रांति के जरिये भारत का आर्थिक, सामाजिक विकास करना चाहते थे। देश आर्थिक दृष्टि से मजबूत बन ही रहा था कि 25 जून 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने आपातकाल की घोषणा कर देश को दशकों पीछे धकेल दिया।  

 

मोरारजी देसाई, अटल बिहारी वाजपेयी, चौधरी चरण सिंह, लालकृष्ण आडवाणी सहित चमोली जिले के विद्यादत्त तिवारी, हरीश चंद्र जोशी, राम जीवन शुक्ला, सरदार संत सिंह सहित कई लोगों को जेल में बंद कर दिया गया था। पुजारी बताते हैं कि इस दौरान विद्यादत्त तिवारी का एक हाथ भी कट गया था, लेकिन आज भी उनके परिवार को पेंशन नहीं मिल पाई है।

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