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ये क्या? अब हाथी, नील गाय, बंदर और सूअर भी खाएंगे गर्भ निरोधक गोली

Thu, 18 Jan 2018 09:01 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 18 Jan 2018 09:01 AM IST
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elephant, monkey, pigs, blue bull will use contraceptives
elephant - फोटो : अमर उजाला
अब गर्भ निरोधक गोलियां हाथी, बंदर, सूअर और नील गाय भी खाएंगे। इतना ही नहीं इनकी नसबंदी भी होगी।
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देश में बढ़ रहे मानव वन्य जीव संघर्ष की स्थिति से निजात पाने के लिए पहली बार केंद्र ने चार जानवरों की आबादी नियंत्रित करने का फैसला किया है। इसके लिए सबसे पहले बंदर, सूअर, नील गाय और हाथी को चुना गया है।

इन जानवरों की वजह से आम लोगों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है। कें द्र ने इस संबंध में देहरादून स्थित भारतीय वन्य जीव संस्थान (डब्ल्युआईआई) को तीन साल के लिए प्रोजेक्ट दिया है। इन जानवरों की आबादी गर्भ निरोधक गोलियों और नसबंदी से रोकी जाएगी।
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मानव वन्य जीव संघर्ष की स्थिति लगातार बढ़ रही है। सालों से इस पर केंद्र और राज्य सरकारों के बीच मंथन चल रहा है। मानव वन्य जीव संघर्ष के किरदारों में हाथी, बंदर, नील गाय, सूअर के अलावा गुलदार, बाघ, भालू आदि भी शामिल हैं। लेकिन मानव, फसल आदि को सबसे अधिक नुकसान हाथी, नील गाय, बंदर और सूअर पहुंचाते हैं।
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उत्तराखंड समेत विभिन्न राज्यों ने अपनी रिपोर्ट केंद्र को भेजी है। इस पर केंद्र ने पहले चरण में आबादी पर अंकुश के लिए इन चार जानवरों को चुना है।

भारतीय वन्य जीव संस्थान को तीन साल के लिए पायलट प्रोजेक्ट दिया गया है। इस प्रोजेक्ट के लिए 10 करोड़ बजट आवंटित कर दिया गया। संस्थान के निदेशक डॉ. वीबी माथुर ने बताया कि जानवरों की आबादी पर अंकुश लगाने के लिए इनकी प्रजनन क्षमता पर अंकुश लगाया जाएगा।

हर जानवर के लिए अलग तकनीक अपनाई जाएगी। कुछ को गर्भनिरोधक दवाएं दी जाएंगी और कुछ की नसबंदी होगी। इसके लिए प्रोजेक्ट में नेशनल इंस्टीट्यूट आफ इम्युनोलॉजी को भी शामिल किया गया है। दवाओं की डोज का निर्धारण यह इंस्टीट्यूट करेगा। अल्ट्रासाउंड के लिए संस्थान में मशीन उपलब्ध हो गई है। पशुओं की गर्भ निरोधक दवाएं अभी यूरोप की कंपनियां बनाती हैं। भारतीय कंपनियों से दवाएं बनाने के लिए बात की जाएगी।

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