उत्तराखंड में बिजली उपभोक्ताओं को मिली बड़ी राहत, अब केवल इतने फीसदी रहेगी बिजली की दरें
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यूपीसीएल की बोर्ड बैठक में मंगलवार को घरेलू बिजली के दामों में छह फीसदी और कुल मिलाकर औसतन 13.72 फीसदी बढ़ोत्तरी का प्रस्ताव पारित किया गया। यह प्रस्ताव राज्य विद्युत नियामक आयोग की मंजूरी के बाद ही लागू हो पाएगा। वहीं बीपीएल श्रेणी के उपभोक्ताओं के लिए दरों में कोई बढ़ोत्तरी नहीं की गई है।
ऊर्जा सचिव राधिका झा ने बोर्ड बैठक में लिए गए निर्णय की जानकारी देते हुए बताया कि यूपीसीएल प्रबंधन की ओर से घरेलू बिजली के दामों में 17 फीसदी बढ़ोत्तरी का प्रस्ताव बैठक में लाया गया, जिसमें कटौती करते हुए छह फीसदी किया गया है। यदि इस प्रस्ताव को राज्य विद्युत नियामक आयोग में मंजूरी मिल जाती है तो घरेलू बिजली के दामों पर प्रति यूनिट औसतन 24 पैसे की बढ़ोत्तरी होगी।
इसके अलावा व्यावसायिक, छोटे उद्योगों, बड़े उद्योगों व रेलवे को दी जाने वाली बिजली में औसतन 13.72 फीसदी की बढ़ोत्तरी का निर्णय लिया गया है। ऐसे में व्यावसायिक बिजली के दामों में औसतन 79 पैसे की बढ़ोत्तरी होगी। यदि राज्य नियामक आयोग से इन प्रस्तावों को मंजूरी मिल जाती है तो व्यावसायिक बिजली की दर प्रति यूनिट 6.62 रुपये हो जाएगी।
बोर्ड बैठक में लिए गए निर्णय के मुताबिक बीपीएल श्रेणी के उपभोक्ताआें के लिए बिजली के दामों में कोई बढ़ोत्तरी नहीं की गई है। बोर्ड बैठक मेें निर्णय लिया गया कि यूपीसीएल दो दिन के भीतर घरेलू बिजली उपभोक्ताओं को छोड़कर व्यावसायिक समेत उद्योगों को दी जाने वाली बिजली की दरों का निर्धारण कर राज्य विद्युत नियायक आयोग को अपनी रिपोर्ट सौंप देगा। ताकि नियामक आयोग सुनवाई कर बिजली की दरों का निर्धारण कर सके। बोर्ड बैठक में ऊर्जा सचिव राधिका झा के अलावा प्रबंध निदेशक बीसीके मिश्रा, निदेशक परिचालक अतुल अग्रवाल, निदेशक मानव संसाधन पीसी ध्यानी, समेत तमाम अधिकारी उपस्थित थे।
जीएसटी की तर्ज पर आनलाइन मिले बिजली कनेक्शन
उत्तराखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष सुभाष कुमार ने मंगलवार को जन सुनवाई की, जिसमें उद्यमियों ने राज्य विद्युत नियामक आयोग से मांग की है कि नई फैक्ट्री का कनेक्शन लेते समय ली जाने वाली 10000 रुपये की प्रोसेसिंग फीस को समाप्त किया जाए। इसके साथ ही उपभोक्ताओं ने जीएसटी की तर्ज पर आनलाइन बिजली कनेक्शन देने की मांग उठाई है।
आयोग में जन सुनवाई के दौरान उपभोक्ताओं ने आयोग अध्यक्ष के सामने बिजली कनेक्शन मिलने में आ रही आ परेशानियों समेत कई मुद्दे उठाए। उत्तराखंड इंडस्ट्री वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल मारवाह ने उद्योगों को नए बिजली कनेक्शन देते समय 10000 रुपये की प्र्रोसेसिंग फीस को माफ करने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि जीएसटी की तर्ज पर बिजली कनेक्शन की प्रक्रिया आनलाइन की जाए ताकि तमाम झंझटों से मुक्ति मिल सके। आवेदन करते समय दस्तावेजों की हार्ड कापी की अनिवार्यता को समाप्त किया जाए। कनेक्शन देने में एसडीओ व अवर अभियंताओं की दखलंदाजी को कम किया जाए। इसके अलावा कनेक्शन देने की समय सीमा को कम किया जाए और जिस दिन बिल बनाया जाए उसके तीन दिन के भीतर बिल उपभोक्ता को मुहैया कराया जाए।
उद्यमी पंकज गुप्ता ने मुद्दा उठाया कि यूपीसीएल से सुरक्षा प्रतिपूर्ति का भुगतान डिमांड ड्राफ्ट के बजाए भुगतान के अन्य माध्यमों से कराया जाए। दिवस जोशी ने कनेक्टेड लोड, अधिकतम मांग, भार में कमी, मीटर एवं मीटर टेस्टिंग जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। कमलदीप कांबोज ने कहा कि बिजली कनेक्शन की प्रक्रिया को और अधिक आसान बनाया जाए ताकि उपभोक्ताआें को सहूलियतें हो। इसके अलावा उन्होंने यूपीसीएल की ओर नए बिजली कनेक्शन देते समय प्रावधानों के तहत निर्धारित सामान मुहैया नहीं कराने की बात कही। वीरू बिष्ट ने कहा कि कनेक्शन देते समय उपयोग होने वाले सामानाें का पूर्ण विवरण आकलन में नहीं शामिल किया जाता है।
साथ ही बिलिंग व्यवस्था में और अधिक सुधार लाने की बात कही। साथ ही सुझाव दिया कि अस्थायी बिजली कनेक्शन देते समय मीटर की अनिवार्यता लागू की जाए। इस पर आयोग अध्यक्ष ने मांगों पर सकारात्मक विचार करने का आश्वासन दिया।
बड़ी फैक्ट्रियों को कनेक्शन देने के लिए मांगे नौ महीने
राज्य में बड़ी औद्योगिक इकाइयों को बिजली कनेक्शन देने में अब छह माह के बजाय नौ माह का वक्त लग सकता है। कारण कि पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (पिटकुल) ने राज्य विद्युत आयोग से गुजारिश की है कि बड़ी औद्योगिक इकाइयों को बिजली कनेक्शन देने में छह माह के भीतर निर्माण कार्यों को पूरा करने में दिक्कतें आ रही हैं। ऐसे में इस समस्या को देखते हुए ट्रांसमिशन लाइनों को बनाने व कनेक्शन देने में तीन माह का अतिरिक्त समय दिया जाए। नियामक आयोग के अध्यक्ष सुभाष कुमार का कहना है कि इस संबंध में विचार विमर्श करने के बाद कोई अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि वर्तमान में राज्य में बड़ी औद्योगिक इकाइयों को बिजली कनेक्शन देने में अलग से पावर सब स्टेशन स्थापित करना होता है, जिसके लिए कई किमी लंबी हाईटेंशन लाइनें भी बिछानी पड़ती हैं। आयोग की ओर से ऐसी इकाइयोें को बिजली कनेक्शन देने के लिए छह माह की समय सीमा निर्धारित की गई है। जबकि बड़ी फैक्ट्रियों को कनेक्शन देने में एक साल से भी अधिक समय लग रहा है।
ऐसे में पिटकुल प्रबंधन ने आयोग से गुजारिश की है कि बड़ी फैक्ट्रियों को ट्रांसमिशन लाइन युक्त बिजली कनेक्शन देने के लिए 270 दिन (नौ माह) का वक्त दिया जाए। पिटकुल के अधीक्षण अभियंता विकास शर्मा ने बताया कि इस संबंध में आयोग के समक्ष प्रत्यावेदन दे दिया गया है। अब यह आयोग पर निर्भर करता है कि वह क्या निर्णय लेता है।