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तो उत्तराखंड मे दूर होगी बिजली की कमी
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Wed, 14 Jan 2015 11:18 AM IST
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उत्तराखंड की लटकी जल विद्युत परियोजनाओं पर एक बार फिर आस बंधी है। जल विद्युत परियोजनाओं पर राज्य सरकार के तर्कों से केंद्र सरकार भी इत्तफाक रखती है।
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केंद्र सरकार फिर से परीक्षण कराने को तैयार
लिहाजा केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में मजबूत पैरवी का आश्वासन दिया है। यदि ये कदम कारगर साबित हुआ तो राज्य में करीब तीन हजार मेगावाट बिजली उत्पादन की बाधा दूर हो जाएगी। वहीं, राज्य के संवेदी क्षेत्र (ईको सेंसिटिव) को लेकर दी गई दलीलों पर केंद्र सरकार फिर से परीक्षण कराने को तैयार है।
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प्रदेश की जल विद्युत परियोजनाओं और पर्यावरण से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय में प्रमुख सचिव नृपेंद्र मिश्र के साथ केंद्र और राज्य के अधिकारियों की बैठक हुई। जिसमें केंद्रीय जल संसाधन, ऊर्जा और पर्यावरण मंत्रालय के अधिकारियों के साथ राज्य के मुख्य सचिव एन. रविशंकर, अपर मुख्य सचिव राकेश शर्मा और ऊर्जा सचिव उमाकांत पंवार शामिल हुए।
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मुख्य सचिव ने बताया कि राज्य सरकार ने केंद्र से ठप पड़ी जल विद्युत परियोजनाएं और उससे हो रहे आर्थिक नुकसान की बात कही। वहीं संवेदी क्षेत्र को लेकर केंद्र की ओर से जारी अधिसूचना को निरस्त करने का अनुरोध किया है। हमने केंद्र से संबंधित क्षेत्र का पुन: परीक्षण कराने को कहा है।
सीएस का कहना है कि सौ किलोमीटर का संवेदी क्षेत्र राज्य के विकास को प्रभावित कर रहा है। राज्य सरकार भी पर्यावरण को लेकर चिंतित है लेकिन केंद्र सरकार को कोई सुगम मार्ग निकालना चाहिए ताकि राज्य को नुकसान न हो।
उल्लेखनीय है कि संवेदी क्षेत्र के चलते भागीरथी नदी पर लोहारी नागपाला समेत नौ और अलकनंदा को मिलाकर कुल 24 जल विद्युत परियोजनाएं लटकी हैं। इन परियोजनाओं के माध्यम से राज्य को करीब तीन हजार मेगावाट अतिरिक्त बिजली मिलेगी। लोहारी नागपाल पर करीब 15 सौ करोड़ रुपए खर्च भी किए जा चुके हैं।