नदियों में सिल्ट आने से उत्तराखंड की बत्ती गुल
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उत्तराखंड की नदियों में सिल्ट आने से प्रदेश में बिजली संकट गहराने लगा है। गुरुवार को प्रदेश की तीन जल विद्युत परियोजनाओं से कोई उत्पादन नहीं हो पाया।
हिमाचल की नदियों में भी सिल्ट की वजह से उत्तराखंड के हिस्से की बिजली नहीं मिल सकी। उत्पादन कम होने से औद्योगिक क्षेत्रों में चार से पांच घंटे तक की बिजली कटौती करनी पड़ी।
मानसून आने से पहले ही पहाड़ में हो रही बारिश से नदियों का जल स्तर बढ़ गया है। इसने उत्तराखंड जल विद्युत निगम (यूजेवीएनएल) और उत्तराखंड पावर कारपोरेशन लिमिटेड (ऊर्जा निगम) की चिंता बढ़ा दी है।
उत्पादन शून्य रहा
गुरुवार को यूजेवीएनएल के 190 मेगावाट क्षमता के जल विद्युत गृह कालागढ़, 10 मेगावाट के खटीमा विद्युत गृह से उत्पादन शून्य रहा।
इसके अलावा 120 मेगावाट के चीला जल विद्युत गृह से भी दोपहर दो बजे तक विद्युत उत्पादन नहीं मिल पाया। मनेरी भाली द्वितीय से 147 मेगावाट बिजली ही बन पाई।
हिमाचल के जल विद्युत गृह करछम वांगणु को भी सिल्ट की वजह से बंद किया गया है। इसके चलते उत्तराखंड के हिस्से की 60 मेगावाट बिजली भी नहीं मिल पायी।
औद्योगिक क्षेत्रों में ऐसी रही कटौती
नारा-रुड़की की विद्युत लाइन में फाल्ट आने की वजह से मरम्मत के लिए दोपहर बारह बजे से डेढ़ बजे तक इमरजंसी शटडाउन लिया गया। राज्य के जल विद्युत गृहों से विद्युत उत्पादन 16.74 मिलियन यूनिट रहा। राज्य की विद्युत मांग 36.98 एमयू के सापेक्ष उपलब्धता 35.20 एमयू रही।
सिडकुल हरिद्वार और पंतनगर में चार घंटे, नान कंटीनियस इंडस्ट्री गढ़वाल में 5 घंटे और कुमाऊं में 3 घंटे की बिजली कटौती करनी पड़ी। सेलाकुई इंडस्ट्रियल एरिया में छह घंटे तक की बिजली कटौती हुई।
हिमाचल से भी बिजली नहीं मिली
उत्तराखंड इंडस्ट्री एसोसिएशन के महासचिव अनिल मारवाह ने बताया कि बिजली कटौती से उत्पादन ठप हो रहा है।
‘राज्य के जल विद्युत गृहों से उत्पादन कम मिल रहा है। हिमाचल से भी बिजली नहीं मिली है। इसलिए कुछ क्षेत्रों में बिजली कटौती हुई। बिजली की खपत में लगातार बढ़ोतरी के चलते ऊर्जा निगम ने टेंडर के अलावा शुक्रवार के लिए 4.5 एमयू बिजली खरीद ली है।’--मधुसूदन, प्रवक्ता ऊर्जा निगम
‘सिल्ट आने की वजह से परियोजनाओं को नुकसान से बचाने के लिए उत्पादन रोकना पड़ रहा है। चौबीस घंटे कर्मचारियों की तैनाती की गई है। जैसे ही सिल्ट कम हो रही टरबाइनें चालू की जा रही है। फिलहाल यह समस्या बनी रहेगी।’--जीपी पटेल, प्रबंध निदेशक, यूजेवीएनएल