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Uttarakhand: बिजली प्रोजेक्ट लगाने होंगे महंगे, दाम भी बढ़ेंगे, आयोग ने जारी किया ड्राफ्ट, 13 जून को जनसुनवाई

Fri, 05 May 2023 07:14 AM IST
रेनू सकलानी आफताब अजमत, अमर उजाला, देहरादून
आफताब अजमत, अमर उजाला, देहरादून Published by: रेनू सकलानी Updated Fri, 05 May 2023 07:14 AM IST
सार

आयोग का कहना है कि चूंकि पांच साल में पावर प्रोजेक्ट निर्माण से जुड़ी सभी सामग्रियां महंगी हो गई हैं। इस वजह से पूंजीगत लागत बढ़ाने का प्रस्ताव किया गया है। आयोग ने नए अधिनियम का ड्राफ्ट जारी किया है। यह अगले पांच साल के लिए लागू होगा। इसके तहत सभी तरह के पावर प्रोजेक्टों की पूंजीगत लागत बढ़ाने का प्रस्ताव किया है।
 

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Electricity prices will increase in uttarakhand Setting up electricity projects will be expensive
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

प्रदेश में नवीकरणीय ऊर्जा के प्रोजेक्ट लगाने महंगे होंगे, जिससे इनसे मिलने वाली बिजली भी महंगी होगी। उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग इसके लिए नवीकरण ऊर्जा स्त्रोतों और गैर जीवाश्म ईंधन आधारित सह उत्पादक स्टेशनों से बिजली आपूर्ति हेतु शल्क एवं अन्य निबंधन विनियम 2023 लाने जा रहा है। इसका ड्राफ्ट जारी करते हुए आयोग ने 13 जून को जनसुनवाई तय की है।

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दरअसल, प्रदेश में अभी तक जो अधिनियम लागू था, उसकी मियाद 2018 से 2023 तक थी। इस बीच ऊर्जा क्षेत्र में कई बदलाव आए हैं। इन बदलावों को स्वीकार करते हुए नियामक आयोग ने नए अधिनियम का ड्राफ्ट जारी किया है। यह अगले पांच साल के लिए लागू होगा। इसके तहत सभी तरह के पावर प्रोजेक्टों की पूंजीगत लागत बढ़ाने का प्रस्ताव किया है।
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पूंजीगत लागत बढ़ने से इन प्रोजेक्ट से जो बिजली पैदा होगी, उसका टैरिफ भी बढ़ जाएगा। जिससे उपभोक्ताओं को महंगी बिजली मिलेगी। आयोग का कहना है कि चूंकि पांच साल में पावर प्रोजेक्ट निर्माण से जुड़ी सभी सामग्रियां महंगी हो गई हैं। इस वजह से पूंजीगत लागत बढ़ाने का प्रस्ताव किया गया है।

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पूंजीगत लागत में बढ़ोतरी का ये प्रस्ताव

प्रोजेक्ट साइज- 2018 में पूंजीगत लागत- पूंजीगत लागत की नई दरें

छोटे हाइड्रो प्लांट 05 मेगावाट तक(रुपये प्रति मेगावाट)- 10 करोड़ - 11.50 करोड़

छोटे हाइड्रो प्लांट 5-15 मेगावाट तक(रुपये प्रति मेगावाट)-9.50 करोड़- 11.25 करोड़

छोटे हाइड्रो प्लांट 15-25 मेगावाट तक(रुपये प्रति मेगावाट)- 9 करोड़- 11 करोड़

सोलर पीवी पावर प्रोजेक्ट(रुपये प्रति मेगावाट)- 3.88 करोड़- 3.60 करोड़
 

प्रोजेक्टों की आयु में ये होगा बदलाव

प्रोजेक्ट श्रेणी- पूर्व में आयु- अब आयु

विंड एनर्जी प्रोजेक्ट- 25-25

बायोमास पावर प्रोजेक्ट, आरडीएफ प्रोजेक्ट- 20-25

जीवाश्म ईंधन आधारित प्रोजेक्ट-20-25

छोटे हाइड्रो प्रोजेक्ट- 35- 40

बायोमास गैसिफायर आधारित प्रोजेक्ट- 20- 25

बायोगैस आधारित पावर प्रोजेक्ट- 20- 25

(आयु वर्ष में है। सोलर पीवी प्लांट की आयु पूर्व की भांति 25 वर्ष ही है।)

उपभोक्ता मांग सकेंगे ग्रीन एनर्जी

नवीकरणीय ऊर्जा स्त्रोतों से पैदा होने वाली बिजली के लिए उपभोक्ता सीधे यूपीसीएल से ग्रीन एनर्जी की मांग कर सकेंगे। पर्यावरण संरक्षण के तहत ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए आयोग ने ये प्रावधान किए हैं। इसके तहत इंडस्ट्री मालिक, होटल मालिक जैसे अधिक बिजली खपत वाले उपभोक्ता यूपीसीएल से 25 से 100 प्रतिशत तक ग्रीन एनर्जी की मांग कर सकते हैं। यूपीसीएल को सभी माध्यमों से ये बिजली उपलब्ध करानी होगी।

नवीकरणीय ऊर्जा स्त्रोतों से बिजली खरीद की बाध्यता

आयोग ने वायु ऊर्जा प्रोजेक्ट, हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट से हर साल यूपीसीएल के लिए निश्चित प्रतिशत में बिजली खरीद की अनिवार्यता की है। 2023-24 में हाइड्रो से कुल बिजली खपत का 0.66 प्रतिशत, अगले साल 1.08, 2025-26 में 1.80 प्रतिशत बिजली यूपीसीएल को खरीदनी होगी। इसी प्रकार, विंड एनर्जी से भी बिजली खरीद के लिए प्रतिशत तय किया गया है। वहीं, अन्य माध्यमों जैसे गैस आधारित या कोयला आधारित पावर प्रोजेक्ट से बिजली खरीद की भी प्रतिशत तय की गई है।

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पूर्व का अधिनियम 2018 से 2023 तक था। अब नए प्रावधानों के साथ अधिनियम का ड्राफ्ट जारी किया है, जिस पर दो जून तक सुझाव ई-मेल या डाक के माध्यम से भेज सकते हैं। 13 जून को सुबह 11 बजे आयोग कार्यालय में जनसुनवाई होगी। इसके बाद अधिनियम की अधिसूचना जारी होगी। -नीरज सती, सचिव, उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग

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