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उत्तराखंड: फिर से महंगी हो सकती है बिजली, UPCL की बोर्ड बैठक में 7.72 फीसदी दर बढ़ाने का प्रस्ताव पास

Tue, 13 Dec 2022 09:05 PM IST
अलका त्यागी अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Tue, 13 Dec 2022 09:05 PM IST
सार

मंगलवार को ऊर्जा निगम मुख्यालय में अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी की अध्यक्षता में यूपीसीएल की बोर्ड बैठक में बिजली दरें बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।

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Electricity may become expensive in Uttarakhand, UPCL will bring proposal in board meeting today
बिजली - फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर

विस्तार

उत्तराखंड में फिर से बिजली महंगी हो सकती है। उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) की बोर्ड बैठक में बिजली दरें 7.72 प्रतिशत बढ़ाने का प्रस्ताव पारित किया है। इसमें घरेलू बिजली दर में पांच प्रतिशत और औद्योगिक बिजली दरों में सात से आठ प्रतिशत बढ़ोतरी की सिफारिश की गई। 15 दिसंबर तक यूपीसीएल की ओर से दरें बढ़ाने का प्रस्ताव विद्युत नियामक आयोग में जमा किया जाएगा। 

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मंगलवार को ऊर्जा निगम मुख्यालय में अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी की अध्यक्षता में यूपीसीएल की बोर्ड बैठक में बिजली दरें बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। यूपीसीएल ने बिजली दरों में बढ़ोतरी करने पर तर्क दिया गया है कि निगम ने बीते वर्ष में 123 करोड़ की योजनाओं पर काम किया। इसके साथ ही दूसरे राज्यों से महंगी दरों पर बिजली खरीदी है। इसकी एवज में बिजली दरों में बढ़ोतरी की जानी है। बैठक में चर्चा के बाद बिजली दरों में 7.72 प्रतिशत की बढ़ोतरी का प्रस्ताव पारित किया गया।
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इसमें घरेलू बिजली दरों में पांच प्रतिशत और, गैर घरेलू बिजली दरों में 7 से 8 प्रतिशत बढ़ोतरी की सिफारिश है। यूपीसीएल की ओर से विद्युत नियामक आयोग में दरें बढ़ाने के लिए याचिका दायर की जाएगी। दरें बढ़ाने का फैसला नियामक आयोग की ओर से लिया जाएगा, जिसके बाद बढ़ी हुई दरें एक अप्रैल 2023 से लागू की जाएंगी। 

नियामक आयोग लेगा फैसला
बोर्ड बैठक में प्रस्ताव पारित करने के बाद यूपीसीएल 15 दिसंबर तक विद्युत नियामक आयोग में बिजली दरें बढ़ाने के लिए याचिका दायर करेगा। आयोग यूपीसीएल की प्रस्तावित दरों पर सुनवाई के बाद ही फैसला लेगा। यदि आयोग यूपीसीएल के प्रस्ताव को पास करता है तो एक अप्रैल 2023 से प्रदेश में बिजली महंगी हो जाएगी। 

बिजली दरें बढ़ाने पर यूपीसीएल का तर्क
यूपीसीएल का कहना है कि निगम ने ऋण लेकर 123 करोड़ के स्वीकृत प्रोजेक्ट का काम किया। इन्हें पूरा करने की रिपोर्ट नियामक आयोग को दे दी गई है। इन प्रोजेक्ट का पैसा वापस मिलना चाहिए था, जो नहीं मिला है। इसके चलते पुरानी देनदारी बढ़ रही है। व्यासी जलविद्युत परियोजना से निगम को 7.60 रुपये प्रति यूनिट बिजली मिलेगी। इसके अलावा पावर ग्रिड कॉरपोरेशन आफ इंडिया ने ट्रांसमिशन टेरिफ में 10 पैसे की बढ़ोतरी की है। प्रदेश में गैस पावर प्लांट नहीं चल रहे हैं। इस कारण से दूसरे राज्यों से महंगी बिजली खरीदनी पड़ रही है। 

ये हैं बिजली दरें बढ़ाने का प्रस्ताव
श्रेणी    प्रस्तावित बढ़ोतरी (प्रतिशत में)
घरेलू                   5.0
गैर घरेलू              7.8
पब्लिक यूटिलिटी  9.0
उद्योग                7 से 8 
इलेक्ट्रिक वाहन   5.0
रेलवे                  4.0 

बिजली दरों में 7.72 प्रतिशत की बढ़ोतरी का फैसला पुराने स्वीकृत प्रोजेक्टों की देनदारी के लिए लिया गया। यदि रेगुलेटरी कमीशन की तरफ से पहले निगम को ये मिला चुका होता तो बिजली दरों में एक रुपया भी नहीं बढ़ाते। निगम के दरों में बढ़ोतरी के प्रस्ताव से टेरिफ में कोई खास असर नहीं पड़ेगा।
- अनिल कुमार, प्रबंध निदेशक, यूपीसीएल

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