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‘वाद’ में नहीं फंसना, विकास का है सपना
रेनू सकलानी/अमर उजाला, देहरादून
Updated Tue, 08 Apr 2014 04:29 PM IST
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कभी जाति, कभी धर्म और कभी क्षेत्र के नाम पर बहुत बंट लिए। वोटर बंट जाते हैं, इसका ही फायदा नेता उठाते हैं और फिर पांच साल झेलनी पड़ती है ऐसी सरकार, जिसका जनता के मुद्दों, समस्याओं और उसके दर्द से कोई सरोकार नहीं रहता।
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जनता त्रस्त रहती है और नेता, मंत्री घपले-घोटालों से अपनी जेबें भरते रहते हैं। लेकिन अब यह नहीं चलेगा। हम किसी भी तरह के वाद में अब नहीं फंसने वाले। हमारा सपना है विकास और उम्मीद है ऐसी सरकार की जो महंगाई, भ्रष्टाचार के राक्षसों से हमें मुक्ति दिला सके।
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यह कहना है लोकतंत्र के महापर्व लोकसभा चुनाव 2014 में नई सरकार चुनने जा रहे मतदाताओं का।
अमर उजाला ने सोमवार को कारगी क्षेत्र में बुजुर्ग, महिलाओं, युवा, व्यापारी यानी विभिन्न वर्गों के मतदाताओं से लोकसभा चुनाव के मुद्दों और उनकी प्राथमिकताओं पर रायशुमारी की। 80 साल की रामनी देवी ने बताया कि वह पिछले आठ साल से वोट दे रही हैं।
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मंहगाई, भ्रष्टाचार पर चिंता
उनके मुताबिक इस अवधि में देश ने कई क्षेत्रों में तरक्की की तो महंगाई, अपराध, भ्रष्टाचार बेलगाम हो गए। कहा कि अब वक्त आ गया है कि जनता नेताओं के कामकाज का हिसाब अपने वोट से तय करे।
कारगी चौक निवासी 50 वर्षीय ललिता कोठारी ने कहा कि पिछले 10-12 साल से देश अस्थिरता के माहौल में है। आर्थिक तौर पर कमजोरी बढ़ी तो महंगाई, बेरोजगारी निरंकुश हैं। यह तस्वीर बदलनी चाहिए।
कादंबरी देवी ने शिक्षा महंगी होने का मसला उठाया। कहा आज अभिभावकों को बच्चों को पढ़ाने के लिए बैंकों से लाखों का कर्ज लेना पड़ रहा है, लेकिन पढ़ाई पूरी करने के बाद बच्चों की नौकरी भी ऐसी नहीं लग पा रही कि वे अपनी तनख्वाह से कर्ज चुका सकें।
महिलाओं की सुरक्षा है मुद्दा
श्री गुरु रामराय पीजी कालेज पथरीबाग की छात्रा अनुजा पंत ने महिला सुरक्षा को बड़ा मुद्दा माना। कहा कि आज लड़कियां, महिलाएं अकेले निकलने से गुरेज करने लगी हैं। उनमें सुरक्षा का अहसास नहीं है।
चुनाव में आपराधिक तत्वों पर लगाम लगाने पर भी उन्होंने जोर दिया। पूजा कोठारी का कहना था कि घर से बाहर निकलते ही कई निगाहें घूरने लगती हैं। सरकार को महिला अपराधों पर अंकुश के लिए और कठोर कानून बनाने चाहिए।
शिक्षा का बाजारीकरण समस्या
छात्रा चित्रांक्षी पंत का कहना है कि शिक्षा के बाजारीकरण ने अभिभावकों के सामने बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। महंगी फीस देकर शिक्षा हासिल करने के बावजूद नौकरी के लिए धक्के खाने पड़ते हैं। नेता चुनाव के समय बड़े-बड़े दावे करते हैं, लेकिन बाद में स्थिति जस की तस रहती है।
पथरीबाग के पास ठेली लगाने वाले अजय अरोड़ा कहते हैं कि चुनाव के वक्त ही हर नेता जनता का हितैषी होने का दावा करते हैं। लेकिन अब तक किसी भी सरकार ने महंगाई, भ्रष्टाचार और बेरोजगारी को खत्म करने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए।